Israel Farming Techniques: आज के दौर में जब पानी की किल्लत और खराब होती मिट्टी भारतीय किसानों के लिए बड़ी टेंशन बन चुकी है. ऐसे में इजरायल का एग्रीकल्चर मॉडल अपनाया जाए तो खेती में अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है. इजरायल ने अपनी सूखी, रेतीली और बंजर जमीन को सिर्फ अपनी मॉडर्न टेक्नोलॉजी के दम पर उपजाऊ बना दिया है.
हमारे देश के किसान भी इस इजरायली फॉर्मूले को अपनाकर अपने खेती के तरीके बदल सकते हैं. अगर आपके पास भी ऐसी जमीन है जहां कुछ नहीं उगता तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. इजरायल की इन तीन तकनीकों को अपनाकर भारतीय किसान न सिर्फ अपनी लागत कम कर सकते हैं. बल्कि रिकॉर्ड तोड़ मुनाफा कमा सकते हैं.
ड्रिप इरिगेशन तकनीक
इजरायल की सफलता का सबसे बड़ा हथियार है पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखना. वहां की ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई तकनीक आज दुनिया भर में छा चुकी है. इस सिस्टम में पाइपों के जरिए पानी सीधे पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद करके पहुंचाया जाता है. इससे पानी हवा में उड़कर या बहकर बर्बाद नहीं होता और फसल को उसकी जरूरत के मुताबिक नमी मिलती रहती है.
भारतीय किसान खासकर वह जो पानी की कमी वाले इलाकों में रहते हैं. इस तकनीक को अपनाकर कम पानी में भी दोगुनी फसल उगा सकते हैं. आजकल सरकार भी इस सिस्टम को लगाने के लिए भारी सब्सिडी दे रही है. जिससे किसानों का खर्च बहुत कम हो जाता है.
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मल्चिंग तकनीक
बंजर और सूखी जमीन पर खेती करने के लिए इजरायल मल्चिंग शीट का बहुत इस्तेमाल करता है. इस तकनीक में पौधों की कतारों के बीच की जमीन को एक खास तरह की प्लास्टिक फिल्म या ऑर्गेनिक कचरे से ढक दिया जाता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि तेज धूप के बावजूद मिट्टी के अंदर की नमी उड़ती नहीं है और जमीन में लंबे समय तक गीलापन बना रहता है.
इसके अलावा यह शीट खेत में अनचाही घास और खरपतवार को उगने ही नहीं देती जिससे फसलों को पूरा पोषण मिलता है. भारतीय किसान सब्जियों और फलों की खेती में इस तकनीक का इस्तेमाल करके अपनी मेहनत और खाद का पैसा दोनों बचा सकते हैं.
ग्रीनहाउस फार्मिंग
इजरायल ने ग्रीनहाउस फार्मिंग को बड़े स्तर पर अपनाकर खेती को मौसम पर निर्भर रहने से काफी हद तक बचा लिया है. ग्रीनहाउस के अंदर तापमान, नमी और रोशनी को कंट्रोल किया जाता है, जिससे पौधों को बेहतर माहौल मिलता है. इसका फायदा यह होता है कि सालभर अच्छी क्वालिटी वाली सब्जियां, फूल और दूसरे हाई वैल्यू क्रॉप्स उगाए जा सकते हैं.
कीट और बीमारियों का खतरा भी कम रहता है. जिससे केमिकल का इस्तेमाल घटता है. भारत में पॉलीहाउस और ग्रीनहाउस खेती धीरे धीरे लोकप्रिय हो रही है. जिन किसानों के पास कम जमीन है वह भी इस तकनीक की मदद से ज्यादा उत्पादन और बेहतर मुनाफा हासिल कर सकते हैं.
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