International Day of Plant Health: आज यानी 12 मई को इंटरनेशनल डे ऑफ प्लांट हेल्थ मनाया जाएगा. जो हमें याद दिलाता है कि फसलों की सेहत ही हमारी तरक्की की नींव है. आज के दौर में खेती सिर्फ हल और बैल तक सीमित नहीं रह गई है. बल्कि अब तकनीक ने खेतों की कमान संभाल ली है. पहले किसान को फसल की बीमारी का पता तब चलता था जब पौधा सूखने लगता था.

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लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट इमेजिंग जैसी मॉडर्न तकनीकें बीमारी आने से पहले ही उसे पकड़ लेती हैं. बदलती जलवायु और नए तरह के कीटों के हमले के बीच फसलों को बचाना एक बड़ी चुनौती है. लेकिन ड्रोन और स्मार्ट सेंसर्स ने इस काम को बहुत आसान बना दिया है. इन तकनीकों की मदद से न सिर्फ पैदावार बढ़ रही है और बेवजह का खर्च भी काफी कम हो गया है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सैटेलाइट से फसलों की मॉनिटरिंग

अब किसान अपने स्मार्टफोन के जरिए ही जान सकते हैं कि उनके खेत के किस हिस्से में बीमारी लगने वाली है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा का विश्लेषण करके यह बता देता है कि मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है या किस कीट का हमला हो सकता है. वहीं, सैटेलाइट इमेजिंग के जरिए पूरे खेत की ऊपर से निगरानी की जाती है.

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यह तकनीक खेत के उन हिस्सों को लाल या पीले रंग से मार्क कर देती है जहां फसल कमजोर होती है. इससे किसान को पूरे खेत में भटकने की जरूरत नहीं पड़ती. बल्कि वे सीधे उसी जगह पर जाकर इलाज कर सकते हैं जहां समस्या है. 

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ड्रोन तकनीक से फसलों की सुरक्षा और छिड़काव

ड्रोन अब खेती के सबसे भरोसेमंद साथी बन गए हैं. पुरानी तकनीक में किसान जब पूरे खेत में कीटनाशक छिड़कता था. तो बहुत सारा पैसा और दवा बर्बाद होती थी, लेकिन ड्रोन अब 'प्रिसिजन फार्मिंग' यानी सटीक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. ये ड्रोन हवा में उड़ते हुए हाई-रेजोल्यूशन कैमरों की मदद से उन पौधों की पहचान कर लेते हैं जो बीमार हैं और सिर्फ उन्हीं पर दवा का छिड़काव करते हैं.

इससे फसलों पर केमिकल का बोझ कम होता है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है. साथ ही, ड्रोन के जरिए बड़े-बड़े खेतों की निगरानी चंद मिनटों में हो जाती है, जिससे मेहनत और समय दोनों की बचत होती है. आने वाले समय में ये तकनीकें खेती को पूरी तरह से हाई-टेक और मुनाफे वाला बिजनेस बना देंगी.

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