Weather Alert For Farmers: देश के कई हिस्सों में इन दिनों जमकर बारिश हो रही है. मानसून में खेतों के लिए सिर्फ बारिश होना सही होता है. लेकिन अगर बारिश जरूरत से ज्यादा हो जाए तो फिर दिक्कत हो सकती है. मौसम विभाग की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक 6 से 11 अगस्त के बीच 17 से ज्यादा राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, गरज चमक और तेज हवाओं चलेंगी. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में मौसम करवट ले सकता है. 

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ऐसे में खेत में पहले से तय सिंचाई और खाद का शेड्यूल वैसे ही चलने देना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. अगर बारिश आने वाली है तो खेत में पानी न देना ही बेहतर है. इसी तरह बारिश से ठीक पहले खाद या कीटनाशक का छिड़काव भी नहीं करना चाहिए इस से भी फालतू पैसा बर्बाद होगा और मेहनत भी जाया होगी. मौसम को देखकर ही किसानों को अब खेती का प्लान आगे बढ़ाना होगा. ऐसे मौसम में सिंचाई और खाद देने के लिए इन बातों का रखें ध्यान. 

बारिश के पहले खाद और कीटनाशक का छिड़काव रोकें

जब भी बारिश के चांस हो तो खेतों में सिंचाई और खाद डालने का काम बिल्कुल रोक देना चाहिए. बारिश के साथ खेत में पानी पहुंचने पर डाली गई खाद बह सकती है और पौधों को उसका पूरा फायदा नहीं मिल पाएगा. कीटनाशक का छिड़काव करने के तुरंत बाद तेज बारिश हो जाए तो दवा पत्तियों पर टिक नहीं पाती जिससे मेहनत और खर्च दोनों बेकार हो सकते है. 

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इसलिए मौसम साफ होने और कुछ समय तक बारिश न होने पर ही छिड़काव करना सही रहेगा. जिन किसानों की धान, मक्का, सोयाबीन, कपास या दलहन की फसल खेत में खड़ी है. उन्हें ज्यादा एहितयात बरतनी होगी. लगातार बारिश के दौरान जरूरत से ज्यादा खाद डालना फसल के लिए भी सही नहीं होता है. इसलिए पहले खेत में नमी देखें और मौसम कैसा है तब ही कोई फैसला करें.

बारिश देखकर सिंचाई का वक्त तय करें

बारिश के मौसम में कई किसान सिंचाई का समय तय करने में गलती कर बैठते हैं. आसमान में बादल देखकर भी अगर खेत में पानी लगा दिया तो कुछ ही घंटों में जलभराव की स्थिति बन सकती है. खासकर भारी मिट्टी वाले खेतों में यह समस्या ज्यादा परेशान करती है. इसलिए बारिश का पूर्वानुमान देखते हुए सिंचाई को कुछ समय के लिए रोकना समझदारी है. 

अगर अच्छी बारिश हो चुकी है तो खेत में दोबारा पानी देने से पहले मिट्टी की नमी जरूर जांचें. धान को छोड़कर कई फसलों में लगातार पानी खड़ा रहना जड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है. ऐसे में खेत की मेड़ या निकासी वाली नालियों को खुला रखें जिससे एक्सट्रा पानी आसानी से बाहर निकल सके. मौसम विभाग ने भी जलभराव रोकने और खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की सलाह दी है.

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सब्जियों और तैयार फसल को लेकर भी रहें सावधान

भारी बारिश का असर सिर्फ खेतों में लगी बड़ी फसलों तक नहीं रहता. बल्कि सब्जियों और बागवानी फसलों पर भी इसका असर देखने को मिलता है. तेज हवा और ज्यादा नमी की वजह से पौधों के गिरने, तनों के टूटने और फलों में सड़न जैसी दिक्कते बढ़ सकती हैं. टमाटर, मिर्च, बैंगन जैसी सब्जियों के पौधों को पहले से सपोर्ट देना जरूरी है. जिससे तेज हवाओं के दौरान फसल को नुकसान कम हो. बेल वाली सब्जियों में मचान और सहारे की मजबूती भी जरूर जांच लें. 

अगर खेत या बगीचे में कोई फसल तुड़ाई के लिए तैयार है तो मौसम खराब होने से पहले उसकी हार्वेस्टिंग कर लेना फायदे का फैसला हो सकता है. लगातार बारिश से तैयार सब्जियों और फलों की क्वालिटी खराब हो सकती है और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. इसके अलावा खेत में जहां पानी जमा होने चांस है वहां पहले से पानी निकलने की व्यवस्था कर लें. किसान रोज मौसम विभाग के अपडेट को देखकर ही खेती से जुड़े अगले कामों की प्लानिंग करें. 

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