Growing Same Crop Repeatedly: खेती में अच्छी पैदावार के लिए सिर्फ बेहतर बीज और समय पर सिंचाई ही काफी नहीं होती, बल्कि खेत की मिट्टी का स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है. कई किसान लगातार एक ही खेत में साल दर साल एक ही फसल की खेती करते रहते हैं. शुरुआत में इसका असर ज्यादा दिखाई नहीं देता, लेकिन धीरे-धीरे मिट्टी की उर्वरता कम होने लगती है और फसल की पैदावार पर भी इसका सीधा असर पड़ता है. कृषि एक्सपर्ट्स का कहना भी है कि लगातार एक ही फसल उगाने की बजाय क्रॉप रोटेशन अपनाने से मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है और उत्पादन बेहतर मिलता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि खेत में बार-बार एक ही फसल लगा रहे हैं, तो पैदावार कितनी घट सकती है.
बार-बार एक ही फसल लगाने से क्यों घटती है पैदावार?
हर फसल मिट्टी से अलग-अलग मात्रा में पोषक तत्व लेती है, जब किसान लगातार एक ही फसल उगाते हैं तो वहीं पोषक तत्व बार-बार मिट्टी से निकलते रहते हैं. इससे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्वों की कमी होने लगती है. परिणाम स्वरूप मिट्टी की उर्वरता घटती है और समय के साथ फसल का उत्पादन कम होने लगता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार पौधे की वृद्धि और बेहतर उत्पादन के लिए संतुलित पोषण जरूरी होता है. अगर मिट्टी में पोषक तत्व लगातार कमी होते रहे तो केवल खाद और उर्वरक डालने से भी पहले जैसा उत्पादन मिलना मुश्किल हो सकता है.
मिट्टी की सेहत पर भी पड़ता है असर
लगातार एक ही फसल उगाने से केवल पोषक तत्व ही कम नहीं होते, बल्कि मिट्टी की संरचना भी प्रभावित होती है. मिट्टी में जैविक पदार्थ और लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या धीरे-धीरे घटने लगती है. इससे मिट्टी सख्त होने लगती है, पानी का अवशोषण कम हो जाता है और जड़ों का विकास भी प्रभावित होता है. ऐसी स्थिति में फसल को पर्याप्त हवा, नमी और पोषण नहीं मिल पाता, जिसका सीधा असर उसके बढ़ावार और उत्पादन पर दिखाई देता है.
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बढ़ जाता है कीट और बीमारियों का खतरा
एक ही फसल की लगातार खेती करने से उसे फसल पर हमला करने वाले कीट और रोग मिट्टी में लगातार बने रहते हैं. समय के साथ उनकी संख्या बढ़ जाती है, जिससे फसल पर रोगों का दबाव अधिक हो जाता है. इसके कारण किसानों को कीटनाशकों और फफूंदनाशकों का अधिक उपयोग करना पड़ता है, जिससे खेती की लागत भी बढ़ जाती है.
खरपतवार और मिट्टी के कटाव की भी बढ़ती है समस्या
एक जैसी खेती करने से खेत में एक ही प्रकार की खरपतवार तेजी से फैलने लगती है, वहीं खेत में विविधता नहीं होने के कारण मिट्टी, हवा और बारिश से होने वाले कटाव के प्रति भी ज्यादा संवेदनशील हो जाती है. इससे ऊपरी उपजाऊ परत धीरे-धीरे खत्म होने लगती है.
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