Litchi Farming: लीची खाना जितना मजेदार होता है, उसकी खेती उतनी ही मुश्किल भरी होती है. दरअसल, गर्मी के मौसम में लीची की फसल जहां किसानों की आमदनी का बड़ा सहारा होती है. वहीं इस समय बागों पर कीटों का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है. फलों के पकने से पहले की स्टेज में बागों की सही देखभाल और उत्पादन दोनों तय करती है कि फसल कैसी होगी. जहां थोड़ी सी लापरवाही भी पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. ऐसे में कृषि एक्सपर्ट्स और बागवानों किसानों को इस समय में विशेष सतर्क रहने की सलाह भी देते हैं. तो चलिए आज हम भी आपको बताते हैं की लीची के बाग पर कीटों ने हमला कर दिया है तो किस तरह से आप फसल को बचा सकते हैं.

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थर्ड स्टेज में लीची की देखभाल बहुत जरूरी

कृषि एक्सपर्ट्स बताते हैं कि लीची के फल बनने के इस दौर में हल्की सिंचाई, पोषण प्रबंधन और समय पर दवा का छिड़काव जरूरी होता है. मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण फल झड़ने और कीट प्रकोप की संभावना बढ़ जाती है. ऐसे में जड़ों में नमी बनाए रखना और जरूरी पोषक तत्व देना फसल को सुरक्षित रखने में मदद करता है.

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लीची पर किन कीटों का सबसे ज्यादा खतरा?

कृषि विभाग के अनुसार इस समय लीची के बागों में तीन तरह के कीटों का खतरा सबसे ज्यादा है. इनमें पहला कीट लीची स्टिंक बग है यह लीची की कोमल पत्तियों और टहनियों से रस चूस कर पौधे को कमजोर कर देता है. जिससे फल काले होकर गिरने लगते हैं. वहीं दूसरा कीट मिली बैग है, यह तनों और मंजरियों पर तेजी से फैलता है और फूल सूखने लगते हैं. वहीं तीसरा किट लीची माइट है, यह पत्तियों के नीचे छिपकर उन्हें नुकसान पहुंचता है जिससे पत्तियां सिकुड़कर सूखने लगती है. वहीं इन कीटों के लगने का असर सीधे लीची के उत्पादन और गुणवत्ता पर पड़ता है. इन तीनों ही कीटों के अलावा फल बेधक कीट भी लीची के लिए बहुत खतरनाक है. यह फल में छेद कर अंदर से गूदा खराब कर देता है, जिससे फल समय से पहले गिरने लगते है और भारी नुकसान होता है.

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ऐसे करें कीटों पर कंट्रोल

कृषि एक्सपर्ट्स किसानों को सलाह देते हैं कि कीटों के शुरुआती लक्षण दिखते ही कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं. जैसे स्टिंक बग और अन्य कीटों के लिएबुप्रोफेजिन या इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव किया जा सकता है. वहीं मिली बग से बचाव के लिए बाग की सफाई रखें और पेड़ों के तनों पर ग्रीस लगाएं. वहीं लीची माइट के लिए सल्फर या दूसरी दवाओं का उपयोग किया जा सकता है. फल बेधक कीट से बचाव के लिए गिरे हुए फलों को हटाना और जरूरत पड़ने पर दवा का छिड़काव करना जरूरी है.

सिंचाई और पोषण का भी रखें ध्यान

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अनियमित सिंचाई और तापमान में बदलाव से फल फटने की क्षमता भी बढ़ती है. ऐसे में ड्रॉप सिंचाई जैसे तकनीक से नियमित नमी बनाए रखना फायदेमंद होता है. इसके अलावा कैल्शियम और बोरॉन का छिड़काव फलों की क्वालिटी सुधारने में मदद करता है और फल झड़ने की समस्या को कम करता है.

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