Unhealthy Soil: खेत में अच्छी पैदावार सिर्फ बीज और खाद पर निर्भर नहीं करती, बल्कि मिट्टी की सेहत भी उतनी ही अहम होती है, क्योंकि स्वस्थ और उपजाऊ मिट्टी टिकाव खेती की नींव है. फसल की बंपर पैदावार इस बात पर निर्भर करती है कि खेत की मिट्टी कितनी उपजाऊ, जैविक तत्वों से भरपूर और रासायनिक से संतुलित है. हालांकि, कई दशकों से औद्योगीकरण और शहरीकरण के चलते खेत की मिट्टी की गुणवत्ता और उत्पादक क्षमता दिन-ब-दिन घटती जा रही है. ऐसे में 3-5 साल में मिट्टी की हेल्थ की जांच करनी चाहिए. दरअसल, अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी का हेल्दी होना जरूरी है. ऐसे में किसानों के लिए यह जानना जरूरी है कि मिट्टी खराब होने के शुरुआती संकेत क्या हैं और समय रहते इसे कैसे सुधारा जा सकता है?

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कमजोर पौधे दे सकते हैं सबसे पहला संकेत

अगर खेत में पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगें, उनकी बढ़ने की प्रक्रिया रुक जाए या जड़ें कमजोर दिखाई दें तो यह मिट्टी की खराब सेहत का संकेत हो सकता है. ऐसी मिट्टी में फसलों पर रोग लगने का खतरा भी बढ़ जाता है और पौधे पर्याप्त पोषक तत्व नहीं ले पाते हैं. 

मिट्टी की बनावट बताएगी असली स्थिति

स्वस्थ मिट्टी दानेदार, मुलायम और भुरभुरी होती है, जिससे पानी आसानी से नीचे चला जाता है और जड़ों को फैलने की पर्याप्त जगह मिलती है. वहीं, अगर मिट्टी सख्त हो जाए, बड़े ढेले बनने लगें या सतह पर कठोर परत दिखाई दे तो यह मिट्टी की गुणवत्ता घटने का संकेत माना जाता है.

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पोषक तत्वों की कमी भी करती है नुकसान

विशेषज्ञों के अनुसार, मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलन जरूरी होता है. इनकी कमी होने पर फसल का विकास प्रभावित होता है. ऐसे में समय-समय पर मृदा परीक्षण कराना जरूरी है, ताकि जरूरत के अनुसार खाद और पोषक तत्व दिए जा सकें.

पराली जलाना और रसायनों का अधिक इस्तेमाल पड़ सकता है भारी

खेत में पराली जलाने से मिट्टी की ऊपरी परत में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव पर असर पड़ता है. वहीं, रासायनिक उर्वरकों (Fertilizer) और कीटनाशकों का जरूरत से ज्यादा उपयोग भी मिट्टी की जैविक गुणवत्ता को नुकसान पहुंचा सकता है. इससे मिट्टी की उर्वरता धीरे-धीरे कम होने लगती है.

इन तरीकों से सुधारें मिट्टी की सेहत

मिट्टी को बेहतर बनाए रखने के लिए जैविक खेती को बढ़ावा दें. फसल चक्र अपनाएं और खेत में पर्याप्त पेड़-पौधे व हरियाली बनाए रखें. साथ ही, सिंचाई का सही प्रबंधन करें और मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरकों का इस्तेमाल करें. इससे मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक बेहतर बनी रह सकती है और फसल उत्पादन में भी सुधार हो सकता है.

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