Fasal Beema Yojana: भारत जैसे कृषि प्रधान देश में यह सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह समय-समय पर किसानों की मदद के लिए जरूरी योजनाएं चलाती रहे. भारत में तरह-तरह के किसान हैं, जिनमें से कुछ छोटे खेत वाले किसान कर्ज लेकर अपना काम करते हैं. ऐसे में ये योजनाएं किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो सकती हैं. उन्हीं में से एक है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और आज हम आपको इसकी जानकारी और क्लेम करने की प्रक्रिया बताने जा रहे हैं.

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क्या है इस योजना का मकसद?

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) का मुख्य उद्देश्य किसानों को फसल नुकसान से आर्थिक सुरक्षा देना और उनकी खेती को स्थिर बनाए रखना है. अगर किसी प्राकृतिक कारण से फसल खराब हो जाती है तो इस योजना के तहत किसानों को आर्थिक मदद मिलती है, जिससे उनकी आय पूरी तरह प्रभावित नहीं होती और वे खेती जारी रख पाते हैं. साथ ही यह योजना किसानों को नई और आधुनिक खेती तकनीक अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित करती है. इसके अलावा, इससे किसानों को कृषि के लिए आसानी से कर्ज मिलने में मदद मिलती है. यह योजना खेती को सुरक्षित, टिकाऊ और किसानों के लिए कम जोखिम वाला बनाने का काम करती है.

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किन किसानों को मिलता है फायदा?

इस योजना के दायरे को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए बढ़ाया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लाभ ले सकें. बीमा क्लेम करने के लिए ज्यादा जटिल नियम नहीं हैं, लेकिन सिर्फ वही फसल इसमें शामिल होती हैं जिसे सरकार ने उस क्षेत्र के लिए तय किया है.

  • जमीन के मालिक किसान इसमें शामिल हो सकते हैं.
  • बटाईदार और किराए पर खेती करने वाले किसान भी इसमें शामिल हो सकते हैं.
  • जिन किसानों ने बैंक से फसल लोन लिया है, उनके लिए बीमा जरूरी साबित हो सकता है.
  • बिना लोन वाले किसान अपनी इच्छा से इसमें जुड़ सकते हैं.

किस तरह के नुकसान के लिए कर सकते हैं क्लेम?

यह योजना लगभग हर तरह की आपदा पर लागू होती है, जैसे.

  • आग लगना या बिजली गिरना.
  • तूफान, आंधी, ओलावृष्टि, चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाएं.
  • बाढ़ आना, पानी भर जाना या भूस्खलन.
  • सूखा या लंबे समय तक बारिश न होना.
  • कीड़े लगना या बीमारियां फैलना.

अगर नुकसान प्राकृतिक कारणों से हुआ है और किसान उसे रोक नहीं सकता था, तो ऐसे मामलों में क्लेम किया जा सकता है.

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क्या है क्लेम का प्रोसेस?

इस योजना को इस तरह से बनाया गया है कि हर तबके के किसान आसानी से इसका लाभ उठा सकें. ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं. बैंक, कोऑपरेटिव सोसाइटी या CSC सेंटर पर जाकर भी ऑफलाइन आवेदन किया जा सकता है, लेकिन बुवाई के 10 दिनों के अंदर आवेदन करना जरूरी होता है. नुकसान होने पर क्या करें?

  • नुकसान होने के 72 घंटे के अंदर ही बीमा कंपनी या अधिकारी को जानकारी देना जरूरी होता है.
  • अधिकारी फिर मौके पर आकर नुकसान का आकलन करते हैं.
  • रिपोर्ट सही पाए जाने पर क्लेम पास कर दिया जाता है.
  • उसके बीद मुआवजे की राशि सीधे बैंक खाते में आ जाती है.

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