Organic Farming Tips: खेती में बेहतर पैदावार पाने के लिए सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि सही जानकारी भी उतनी ही जरूरी होती है. खासकर जब बात जैविक खाद की बात आती है, तो इसकी मात्रा का सही होना बहुत जरूरी हो जाता है. ऐसे में कई किसान बिना सही माप-तोल के अंदाज़े से खाद डाल देते हैं. इससे या तो उनका खर्चा फालतू में बढ़ जाता है, या फिर फसल को सही  ताकत और पोषण नहीं मिल पाती जितनी उसे चाहिए.

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यही कारण है कि बुवाई से पहले यह जानना जरूरी है कि 1 एकड़ खेत में कितनी जैविक खाद डालनी चाहिए. जैविक खाद धीरे-धीरे मिट्टी में मिलती है और पौधों को ताकत देती है. साथ ही, यह मिट्टी को उपजाऊ बनाती है और उसमें पानी सोखने की शक्ति बढ़ाती है.  मिट्टी के लाभदायक कीड़ों को भी बढ़ाती है. साथ ही ये  फसल की गुणवत्ता को भी बढ़ाती है. 

जैविक खाद की मात्रा फसल और मिट्टी पर निर्भर

जैविक खेती में हर फसल के लिए खाद की मात्रा एक जैसी नहीं होती. यह इस बात पर निर्भर करता है कि फसल कौन सी है, आपकी जमीन कितनी उपजाऊ है और आप कौन सी खाद डाल रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच कराना और फसल की जरूरत को समझना जरूरी है. क्योंकि जैविक खाद जैसे गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट या नीम आधारित खाद अलग-अलग पोषक तत्व देती हैं, इसलिए उनकी मात्रा भी अलग होती है.

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1 एकड़ में कितनी जैविक खाद डालनी चाहिए

आम तौर पर 1 एकड़ खेत के लिए जैविक खाद की मात्रा सैकड़ों किलो में होती है, लेकिन यह खाद के प्रकार पर निर्भर करती है. 

  •  सामान्य फसल और सब्जियों के लिए लगभग 250 से 300 किलो जैविक खाद प्रति एकड़ दी जा सकती है
  •  वहीं बागवानी और गन्ने जैसी फसलों में यह मात्रा बढ़कर 500 किलो प्रति एकड़ तक जा सकती है

इसके अलावा, कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट को खेत में मिलाने के लिए मिट्टी की ऊपरी परत में 2 से 3 इंच तक मिलाने की सलाह दी जाती है, जिससे पौधों को धीरे-धीरे पोषण मिलता रहता है.

बुवाई से पहले कैसे करें सही इस्तेमाल

फसल लगाने से पहले जैविक खाद को खेत में मिलाना बहुत जरूरी है. जब आप आखिरी बार खेत की जुताई करें, तभी खाद डालकर मिट्टी में मिला दें ताकि वह अच्छे से सड़ जाए और पौधों को पूरी ताकत दे सके.जैविक खाद धीरे-धीरे काम करती है, इसलिए इसे पहले डालना ही सबसे अच्छा होता है. सही मात्रा में खाद डालने से न केवल फसल अच्छी होती है, बल्कि मिट्टी भी उपजाऊ बनती है और उसमें पानी सोखने की शक्ति बढ़ती है. अगर किसान बुवाई से पहले खाद का सही हिसाब लगा लें, तो कम खर्चे में बढ़िया पैदावार पा सकते हैं.

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