Dairy Buisness Subsidy: गांव हो या शहर के आसपास का इलाका, डेयरी बिजनेस आज भी सबसे भरोसेमंद और स्थिर कमाई के जरियों में गिना जाता है. सबसे बड़ा सवाल यही रहता है, इसे शुरू करने के लिए कम से कम कितनी गायों की जरूरत होती है, और सरकार से कितनी आर्थिक मदद मिल सकती है.
छोटे स्तर पर भी शुरू किया जा सकता है यह बिजनेस
डेयरी बिजनेस की सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बड़े निवेश के बिना भी शुरू किया जा सकता है. सिर्फ दो से पांच गायों के साथ भी एक छोटी डेयरी यूनिट खड़ी की जा सकती है, जो घरेलू खर्च चलाने के साथ साथ अतिरिक्त आमदनी का जरिया बन जाती है. वहीं अगर व्यावसायिक स्तर पर काम करना हो, तो 15 से 25 गायों वाली यूनिट ज्यादा मुनाफेदार मानी जाती है.
राज्यों के हिसाब से बदलती है सब्सिडी की शर्तें
अलग-अलग राज्यों में डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए अपनी अपनी योजनाएं चलाई जा रही हैं. कुछ राज्यों में 15 से 20 गायों वाली डेयरी यूनिट खोलने पर सभी वर्गों के किसानों को 40 फीसदी तक सब्सिडी मिलती है, जबकि कुछ योजनाओं में 25 दुधारू पशुओं वाली यूनिट पर 42 लाख रुपये तक का अनुदान भी दिया जा रहा है. यानी यूनिट जितनी बड़ी होगी, सब्सिडी का दायरा भी उतना ही बड़ा हो सकता है.
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लोन के साथ मिलती है भारी सब्सिडी भी
डेयरी बिजनेस शुरू करने के इच्छुक किसानों और नए उद्यमियों को सरकार की पशुपालन प्रोत्साहन योजनाओं के तहत 10 लाख रुपये तक का लोन मिल सकता है, और इस पर करीब 50 फीसदी तक की सब्सिडी भी दी जाती है. मतलब अगर 10 लाख का लोन स्वीकृत होता है, तो लाभार्थी को असल में करीब 5 लाख रुपये ही चुकाने पड़ते हैं, बाकी रकम अनुदान के तौर पर मिल जाती है.
बिना भारी गारंटी के भी मिल सकती है मदद
इन योजनाओं की खास बात यह है कि इनमें ज्यादातर मामलों में भारी गारंटी या जमीन गिरवी रखने की अनिवार्यता नहीं होती. लोन की रकम चरणबद्ध तरीके से जारी की जाती है, जिससे बिजनेस को धीरे-धीरे और सुरक्षित तरीके से बढ़ाया जा सकता है. सरकार का मकसद साफ है, ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में रोजगार के मौके बढ़ाना और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाना.
भारत की डेयरी क्षमता को मिल रही है नई ताकत
भारत दुनिया में दूध उत्पादन के मामले में पहले नंबर पर है, और सरकार इस स्थिति को और मजबूत करना चाहती है. यही वजह है कि गाय-भैंस पालन को बढ़ावा देने के लिए लगातार नई योजनाएं और सब्सिडी स्कीमें सामने आ रही हैं, ताकि छोटे किसान से लेकर बड़े उद्यमी तक, हर कोई इस क्षेत्र से जुड़ सके.
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