Soil Testing Without Lab: खेती में अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी की सेहत सबसे अहम मानी जाती है. आमतौर पर किसान मिट्टी की स्थिति जानने के लिए सॉइल टेस्ट करवाते हैं, जिससे यह पता चलता है कि खेत में कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं और किसकी कमी है. हालांकि, हर बार लैब जांच करना संभव नहीं होता है, ऐसे में एक्सपर्ट का कहना है कि खेत खुद भी कई संकेत देता है, जिनकी मदद से किसान मिट्टी की सेहत का अंदाजा लगा सकते हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि खेत की मिट्टी बिना लैब टेस्ट के कैसी है इसका अंदाजा आप किन संकेतों से लगा सकते हैं. 

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केंचुओं की संख्या से मिलता है बड़ा संकेत 

एक्सपर्ट्स के अनुसार केंचुए मिट्टी की जैविक सक्रियता के सबसे भरोसेमंद संकेतों में से एक हैं. जिस मिट्टी में पर्याप्त जैविक पदार्थ, नमी और सूक्ष्मजीव मौजूद होते हैं, वहां केंचुए अच्छी संख्या में पाए जाते हैं. अगर खेत की मिट्टी खोदने पर केंचुए दिखाई दे तो यह मिट्टी के हेल्दी होने का संकेत माना जाता है. 

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पानी कितनी तेजी से सोखती है मिट्टी

मिट्टी की सेहत का अंदाजा उसके पानी सोखने की क्षमता से भी लगाया जा सकता है. हेल्दी मिट्टी वर्षा या सिंचाई का पानी जल्दी अपने आप समाहित कर लेती है, जबकि सख्त और दबाव ग्रस्त मिट्टी में पानी लंबे समय तक सतह पर जमा रहता है या बैठ जाता है. अगर खेत में पानी जल्दी रिसता है, तो यह बेहतर मिट्टी संरचना और जैविक गतिविधि का संकेत माना जाता है. 

मिट्टी की बनावट पर भी रखें नजर 

खेत की ऊपरी मिट्टी को हाथ में लेकर दबाने पर अगर वह छोटे-छोटे भुरभुरी ढलों के रूप में टूटती है, तो इसे अच्छी संरचना का संकेत माना जाता है. ऐसी मिट्टी में हवा और पानी दोनों का संतुलित प्रभाव बना रहता है. दूसरी ओर अगर मिट्टी धूल की तरह बिखर जाए या बहुत सख्त गुट्ठों में बदल जाए तो यह मिट्टी की खराब स्थिति का संकेत हो सकता है. 

बारिश के बाद मिट्टी की खुशबू भी बताती है स्थिति 

बारिश के बाद मिट्टी से आने वाली सोंधी खुशबू सिर्फ आनंद देने वाली नहीं होती, बल्कि मिट्टी की जैविक सक्रियता का भी संकेत होती है. यह खुशबू कुछ विशेष प्रकार के सूक्ष्मजीवों से उत्पन्न यौगिकों के कारण आती है. जिन खेतों में जैविक पदार्थ और सूक्ष्मजीव ज्यादा होते हैं, वहां यह खुशबू ज्यादा महसूस होती है. इसके उलट ज्यादा रासायनिक उपयोग वाली या कमजोर मिट्टी में यह सुगंध काफी कम हो सकती है. 

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खरपतवार भी बताते हैं मिट्टी का हाल 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि खेत में उगने वाले खरपतवार भी मिट्टी की स्थिति के बारे में जानकारी देते हैं. कुछ खरपतवार ऐसी जमीन में ज्यादा होते हैं, जहां जैविक पदार्थ काम होते हैं जबकि कुछ प्रजातियां बेहतर जैविक गतिविधि वाली मिट्टी में दिखाई देती है. अगर समय के साथ खेत में खरपतवार बढ़ रही है और कोई एक प्रजाति हावी नहीं है तो इसे मिट्टी के धीरे-धीरे सुधरने का संकेत माना जाता है.

पड़ोसी खेतों से तुलना भी कर सकते हैं किसान 

किसान अपने खेत की फसल की तुलना आसपास के खेतों से भी कर सकते हैं. मिट्टी की पौधे की हरियाली, तनों की मजबूती, फसल की एकरूपता और रोग कीटों का स्तर मिट्टी की स्थिति के बारे में काफी कुछ बता सकता है. अगर फसल समान परिस्थितियों में बेहतर दिखाई दें तो यह मिट्टी की अच्छी सेहत का संकेत हो सकता है.

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