Growing Litchi In Balcony: आमतौर पर लोगों को लगता है कि लीची जैसे रसीले फलों का पेड़ सिर्फ बड़े-बड़े खेतों या आलीशान फार्म हाउस में ही उगाया जा सकता है. लेकिन बदलते दौर में अर्बन गार्डनिंग के नए-नए तरीकों ने इस सोच को पूरी तरह से बदल दिया है. अब आप अपने फ्लैट की छोटी सी बालकनी या छत पर भी लीची का पौधा आसानी से लगा सकते हैं.
होम गार्डन के शौकीनों के लिए यह किसी बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है कि सही केयर और सही तकनीक की मदद से गमले में भी लीची की अच्छी पैदावार ली जा सकती है. एक्सपर्ट्स के बताए कुछ ऐसे बेहद आसान और असरदार तरीकों की मदद से आपका छोटा सा गार्डन भी शाही लीची की खुशबू से महक उठेगा. तो चलिए जानते हैं बालकनी में लीची उगाने का सबसे बेस्ट तरीका.
लीची के पौधे के लिए सही गमले का चुनाव
बालकनी में लीची का पौधा लगाने के लिए सबसे पहली और जरूरी शर्त है सही साइज के गमले का चुनाव करना. चूंकि लीची के पेड़ की जड़ें काफी फैलती हैं. इसलिए आपको कम से कम 18 से 24 इंच का बड़ा और गहरा गमला चुनना चाहिए. प्लास्टिक के बजाय मिट्टी या सीमेंट का गमला सबसे बेस्ट माना जाता है क्योंकि इनमें हवा का वेंटिलेशन अच्छा रहता है.
मिट्टी तैयार करने का फॉर्मूला
अब बात करते हैं सबसे जरूरी चीज यानी मिट्टी तैयार करने की. लीची के लिए एकदम उपजाऊ और भुरभुरी मिट्टी की जरूरत होती है. इसके लिए आप सामान्य बगीचे की मिट्टी में 30 परसेंट वर्मीकंपोस्ट या गोबर की पुरानी खाद, 20 परसेंट कोकोपीट और थोड़ा सा सैंड यानी रेत मिलाकर एक परफेक्ट पोटिंग मिक्स तैयार कर सकते हैं. गमले के नीचे ड्रेनेज होल पर छोटा पत्थर रखना न भूलें ताकि एक्स्ट्रा पानी आसानी से बाहर निकल सके.
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एक्सपर्ट के बताए प्लांटेशन टिप्स
गमला और मिट्टी तैयार होने के बाद किसी अच्छी रजिस्टर्ड नर्सरी से ग्राफ्टेड लीची का हेल्दी पौधा ही खरीदें. क्योंकि बीजों से उगाए गए पौधों में फल आने में सालों लग जाते हैं. पौधे को गमले के ठीक बीच में लगाकर हल्के हाथों से मिट्टी को दबा दें और तुरंत पानी दे दें. एक्सपर्ट्स के मुताबिक लीची के पौधे को रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की अच्छी और सीधी धूप मिलना बेहद जरूरी है, इसलिए इसे बालकनी के उसी कोने में रखें जहां धूप सबसे अच्छी आती हो.
बालकनी में पौधे की सही देखभाल का तरीका
गर्मियों के मौसम में पौधे में दोनों वक्त हल्की सिंचाई करें ताकि मिट्टी में हल्की नमी बनी रहे, लेकिन ध्यान रहे कि गमले में पानी की कीचड़ नहीं बननी चाहिए. हर दो-तीन महीने में पौधे की जड़ों के पास थोड़ी सी केंचुआ खाद डालते रहें और कीड़ों से बचाने के लिए कभी-कभी नीम ऑयल का स्प्रे करें.
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