सर्दियों का मौसम शुरू होते ही पशुपालकों के सामने पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन जाता है. तापमान कम होने के कारण कई जगह हरे चारे का मिलना मुश्किल हो जाता है. इसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर पड़ता है. हालांकि किसान थोड़ी सी योजना बनाकर पहले से ही हरे चारे को सुरक्षित रख सकते हैं. इसके लिए साइलेज बनाने की तकनीक काफी उपयोगी मानी जाती है.

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जब खेत में मक्का, ज्वार, बाजरा जैसे हरे चारे की अच्छी उपलब्धता हो, तब उसका कुछ हिस्सा सुरक्षित करके रखा जा सकता है. जरूरत पड़ने पर यही चारा सर्दियों में पशुओं के काम आता है और चारे की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है. इस तकनीक से अतिरिक्त हरे चारे को भविष्य के लिए सुरक्षित किया जा सकता है. ऐसे में जानिए साइलेज से जुड़ी पुरी जानकारी.

क्या होता है साइलेज?

साइलेज हरे चारे को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का एक वैज्ञानिक तरीका है. इसमें हरे चारे को काटकर कम ऑक्सीजन वाली स्थिति में रखा जाता है. इस प्रोसेस में चारे में मौजूद पोषक तत्व काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं और जरूरत पड़ने पर इसे पशुओं को खिलाया जा सकता है. किसान मक्का, ज्वार और बाजरा के हरे चारे से साइलेज तैयार कर सकते हैं.

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कब करें चारे की तैयारी?

सर्दियों में चारे की कमी से बचने के लिए किसान को गर्मी और बरसात के मौसम में ही चारे की योजना बना लेनी चाहिए. जब आपके खेत में हरा चारा उपलब्ध हो, उसी समय उसका कुछ हिस्सा साइलेज बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे सर्दियों में चारे की उपलब्धता बनी रहती है और बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत कम हो जाती है.

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कैसे बनाएं साइलेज?

सबसे पहले अच्छी गुणवत्ता वाले हरे चारे को सही तरीके से काटें. इसके बाद उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटना जरूरी है, ताकि उसे अच्छी तरह दबाकर हवा बाहर निकाली जा सके. चारे को साइलेज पिट, ड्रम या एयरटाइट कंटेनर में भरकर अच्छी तरह दबाया जाता है. इसके बाद इसे इस तरह बंद किया जाता है कि अंदर हवा का आना-जाना कम से कम हो. साइलेज बनाते समय नमी का संतुलन भी बेहद अहम होता है. बहुत ज्यादा गीला चारा जल्दी खराब हो जाता है, जबकि बहुत ज्यादा सूखा चारा भी लंबे समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता.

पशुओं को कैसे खिलाएं?

साइलेज तैयार होने के बाद इसे धीरे-धीरे पशुओं के आहार में शामिल करना बेहतर होता है. शुरुआत में कम मात्रा देकर पशुओं को इसकी आदत डालना बेहतर रहता है. इसके साथ सूखा चारा, दाना और खनिज मिश्रण भी संतुलित मात्रा में दिया जाना चाहिए.

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