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किसानों के लिए खुली तिजोरी, 10000 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद और 100% खरीद की गारंटी, सरकार ने शुरू किया महाअभियान

Government Aid For Farmers: दालों की खेती के लिए सरकार 10000 प्रति हेक्टेयर की सीधी मदद और 100% फसल खरीद की पक्की गारंटी दे रही है. इस महाअभियान से जुड़कर किसान बंपर मुनाफा कमा सकते हैं.

Government Aid For Farmers: केंद्र सरकार और देश के अलग-अलग राज्यों की सरकारें किसानों के लिए तरह-तरह की योजनाएं चलाती रहती हैं, ताकि अन्नदाता को हर मोड़ पर सपोर्ट मिल सके. इसी कड़ी में खेती-किसानी को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए एक ऐसा महाअभियान शुरू किया गया है, जो किसानों की दो सबसे बड़ी टेंशन को एक झटके में खत्म कर देगा पहली लागत का खर्च और दूसरी फसल बेचने की चिंता. 

इस नई सरकारी योजना के तहत किसानों को न सिर्फ 10000 रुपये प्रति हेक्टेयर की डायरेक्ट कैश मदद दी जाएगी.  बल्कि उनकी तैयार फसल को 100% खरीदने की पक्की लिखित गारंटी भी मिलेगी. यानी कि अब मंडी में फसल के दाम गिरने या आढ़तियों के चक्कर काटने का झंझट हमेशा के लिए खत्म होने वाला है. जान लें कैसे काम करेगी यह योजना.

क्या है सरकार का यह महाअभियान?

सरकार के इस मेगा प्लान का असली नाम राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन है. इस अभियान के जरिए सरकार का पूरा फोकस देश को दालों के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है. जिससे हमें दूसरे देशों से दालें इम्पोर्ट न करनी पड़ें.  सरकार किसानों को दालों जैसे अरहर, उड़द और मूंग की खेती करने के लिए बड़े पैमाने पर मोटिवेट कर रही है. 

जो 10000 रुपये की आर्थिक मदद दी जा रही है. उसका इस्तेमाल किसान हाई-क्वालिटी के बीज, खाद और आधुनिक कृषि उपकरण खरीदने में कर सकते हैं. यह सीधे तौर पर किसानों की लागत कम करके उनके मुनाफे को बढ़ाएगा.

यह भी पढ़ें: धान की फसल में कितनी होगी पैदावार, तय करेगी पहली टॉप ड्रेसिंग, जानें इसका सही समय

100% खरीद की गारंटी 

इस मिशन में फसल की 100% खरीद की गारंटी दी जाएगी. इस अभियान से जुड़कर किसान जो भी दलहन फसल उगाएंगे. उसे नाफेड और एनसीसीएफ  जैसी सरकारी एजेंसियां न्यूनतम समर्थन मूल्य या उससे भी बेहतर मार्केट रेट पर पूरी की पूरी खरीद लेंगी. यानी फसल बिकने की टेंशन बिल्कुल खत्म हो जाएगी. 

दी जाएगी ट्रेनिंग

इसके साथ ही किसानों को आधुनिक तौर-तरीकों से खेती करने के लिए बकायदा स्पेशल ट्रेनिंग और फ्री मिनी-किट भी दी जाएगी. ट्रेनिंग के दौरान कृषि वैज्ञानिक किसानों को बताएंगे कि कम पानी और कम लागत में कैसे रिकॉर्डतोड़ पैदावार ली जा सकती है. अगर आप भी इस महाअभियान का हिस्सा बनना चाहते हैं. तो तुरंत अपने नजदीकी कृषि विभाग में जाकर रजिस्ट्रेशन करवाएं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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