Goat Fodder Tips: बारिश का मौसम आते ही चारों तरफ हरियाली छा जाती है. पशुपालक के लिए मौसम और खुशियां लाता है अक्सर खुश हो जाते हैं कि क्योंकि इसमें बकरियों के लिए चारे की कोई कमी नहीं रहती. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही ताजी हरी घास मानसून में आपकी बकरियों के लिए सबसे बड़ी आफत बन सकती है. डॉक्टर्स का मानना है कि इस मौसम में बकरियों के खान-पान को लेकर की गई एक छोटी सी लापरवाही भी उन्हें गंभीर रूप से बीमार कर सकती है. 

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जिससे सीधे आपके काम-धंधे पर नुकसान का असर पड़ता है. दरअसल पहली बारिश के बाद उगने वाली नई घास में पानी और एसिड की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो बकरियों के पेट के हाजमे को पूरी तरह बिगाड़ देती है. इसलिए इस मौसम में चारे का सही मैनेजमेंट करना बेहद जरूरी हो जाता है. जान लीजिए चारा खिलाने का सही तरीका.

क्या है खिलाने का सही तरीका?

बारिश के दिनों में खेतों से सीधे काटकर लाया गया गीला चारा बकरियों को कभी नहीं खिलाना चाहिए. इस मौसम में हवा में नमी ज्यादा होने की वजह से चारे पर फंगस और जहरीले बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपते हैं. अगर बकरियां ऐसा चारा खा लें तो उन्हें पेट फूलने, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर शिकायतें हो जाती हैं.

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पहले चारा सुखा लें

डॉक्टर सलाह देते हैं कि जब भी बाहर से हरा चारा लाएं तो उसे पहले कुछ घंटों के लिए किसी छायादार और सूखी जगह पर फैलाकर रख दें. जिससे उसका एक्स्ट्रा पानी सूख जाए. इसके साथ ही चारे में फंगस की जांच जरूर कर लें और सड़ा-गला या बदबूदार चारा बकरियों के आगे बिल्कुल न डालें.

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पेट की बीमारियों से सुरक्षा

मानसून के दौरान बकरियों के पेट सही रखने का सबसे बढ़िया तरीका है सूखे और हरे चारे का सही तालमेल. इस मौसम में बकरियों को सिर्फ हरी घास पर निर्भर न रखें. बल्कि उनके डाइट प्लान में सूखा भूसा या सूखी पत्तियां जरूर शामिल करें. डॉक्टर्स के मुताबिक जब आप हरे चारे के साथ सूखा चारा मिलाकर देते हैं. तो बकरियों के पेट में गैस नहीं बनती और उनका डाइजेशन एकदम परफेक्ट रहता है. 

इस तरह पानी पिलाएं

इसके अलावा बारिश में साफ और उबला हुआ या गुनगुना पानी ही बकरियों को पीने के लिए दें क्योंकि दूषित पानी से पेट में कीड़े होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप अपनी बकरियों को हर बीमारी से सुरक्षित रख सकते हैं.

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