Fenugreek Cultivation Tips:  किसान अक्सर इस तरह की फसल की तलाश में रहते हैं. जो कम वक्त में अच्छा मुनाफा दे सके हैं. अगर आप भी कोई ऐसी फसल ढूंढ रहे हैं तो फिर आपके के लिए मेथी की फसल किसी फायदे के सौदे से कम नहीं. मेथी एक ऐसी हरी पत्तेदार फसल है. जिसकी पत्तियों का इस्तेमाल सब्जी और मसाले दोनों के तौर पर होता है.

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इसकी खेती बहुत ज्यादा मुश्किल नहीं मानी जाती और सही मौसम में फसल तेजी से तैयार हो सकती है. मेथी के बीजों की भी बाजार में मांग रहती है. इसलिए किसान इसे सिर्फ हरी सब्जी के तौर पर नहीं देखते. देश में राजस्थान मेथी उत्पादन का प्रमुख राज्य है. जबकि मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब और उत्तर प्रदेश में भी इसकी खेती होती है.  आप भी जान लें कैसे की जा सकती है इसकी खेती. 

जान लें बुवाई का सही तरीका

मेथी की खेती से अच्छी पैदावार लेने के लिए सबसे पहले सही समय पर बुवाई और अच्छी किस्म का चुनाव जरूरी है. सितंबर से नवंबर तक का समय हरी मेथी की बुवाई के लिए अच्छा माना जाता है. अच्छी पैदावार के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी बेहतर रहती है. जिसमें पानी की निकासी अच्छी हो. किस्मों की बात करें तो पूसा अर्ली बंचिंग, कसूरी मेथी, हिसार सोनाली और पंत रागिनी जैसी किस्में किसानों के बीच पाॅपुलर हैं. 

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कसूरी मेथी की खुशबू तेज होती है और बाजार में इसकी डिमांड भी अच्छी रहती है. बुवाई से पहले खेत की 2 से 3 बार अच्छी जुताई करके प्रति एकड़ 4 से 5 ट्रॉली अच्छी तरह तैयार गोबर की खाद मिलाई जा सकती है. बीज बोने से पहले ट्राइकोडर्मा या थीरम से ट्रीटमेंट करना फायदेमंद रहता है. जिससे फसल फंगस और शुरुआती बीमारियों से बची रहे. कतार से कतार की दूरी 20 से 25 सेंटीमीटर रखना बेहतर रहता है.

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देखभाल के जरूरी टिप्स

मेथी की खासियत यह है कि इसे बहुत ज्यादा पानी या महंगी केमिकल खाद की जरूरत नहीं पड़ती. बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें और इसके बाद मौसम और मिट्टी की नमी के हिसाब से 8 से 10 दिन के अंतर पर पानी देते रहें. ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा न हो वरना जड़ों के खराब होने का खतरा बढ़ सकता है. जैविक खाद और समय-समय पर निराई-गुड़ाई करने से पौधों की ग्रोथ बेहतर होती है. 

बुवाई के करीब 25 से 30 दिन बाद जब पौधे 15 से 20 सेंटीमीटर ऊंचे हो जाएं तो पहली कटाई की जा सकती है. कटाई के समय पौधे को जड़ से निकालने के बजाय जमीन से 2 से 3 इंच ऊपर से काटें. इससे पौधे में दोबारा नई शाखाएं निकल सकती हैं और एक ही फसल से 3 से 4 बार हरी पत्तियों की कटाई का मौका मिल सकता है. हर कटाई के बाद जरूरत के हिसाब से हल्की सिंचाई करने से अगली ग्रोथ बेहतर हो सकती है.

ऐसे बढ़ेगी कमाई

हरी मेथी किसानों के लिए कमाई के दो रास्ते खोल सकती है. पहला हरी पत्तियों की बिक्री और दूसरा बीज तैयार करके बेचना. सीजन की शुरुआत में जब हरी मेथी की सप्लाई कम होती है तब बाजार में इसके अच्छे भाव मिल सकते हैं. हालांकि कीमत मंडी, सीजन और क्वालिटी के हिसाब से बदलती रहती है. एक एकड़ से मिलने वाली हरी मेथी की मात्रा भी किस्म, मौसम और देखभाल पर निर्भर करती है. अगर किसान हरी पत्तियों की कुछ कटाई के बाद फसल को बीज के लिए छोड़ता है. तो आगे चलकर मेथी के बीज तैयार किए जा सकते हैं. 

इनका इस्तेमाल मसालों और दूसरे उत्पादों में होता है. बीज का बाजार भाव भी समय और क्वालिटी के हिसाब से बदलता रहता है. इसलिए मेथी से 80 हजार से 1.20 लाख रुपये तक की कमाई का अनुमान लगाया जा सकता है.  लेकिन इसे फिक्स मुनाफा नहीं कहा जा सकता है. जैसा कि हमने बताया कमाई के लिए कई और फैक्टर्स भी जरूरी होते हैं. अगर आप सही किस्म और अच्छी देखभाल के साथ खेती करते हैं तो कमाई भी अच्छी हो सकती है. 

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