<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>ट्रैक्टर खरीदने से पहले, किसान भाई जानें ये जरूरी बातें</title><atom:link href="https://www.abplive.com/agriculture/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Sat, 15 Aug 2026 16:50:05 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[बिना मिट्टी खेती करके कमाएं, जानें पूरा तरीका]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/hydroponics-technology-earn-money-by-farming-without-soil-know-this-method-3175451</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/hydroponics-technology-earn-money-by-farming-without-soil-know-this-method-3175451#respond</comments><pubDate>Sat, 15 Aug 2026 15:29:09 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/hydroponics-technology-earn-money-by-farming-without-soil-know-this-method-3175451</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Hydroponics Farming Technology: &lt;/strong&gt;खेती का तरीका अब धीमे-धीमे बदल रहा है पहले जहां किसानों के लिए खेत में फसल को सही से उगाने के लिए सही मिट्टी और सही सिंचाई की जरूरत होती है. कई बार जमीन में उर्वरकता कम होने की वजह से और पानी की सही व्यवस्था न होने के चलते फसल का उत्पादन प्रभावित हो जाता है. लेकिन क्या हो अब खेती के लिए आपको मिट्टी की जरूरत ही न पड़े. आपको बता दें&amp;nbsp;बिना मिट्टी के भी पौधे उगाए जा सकते हैं और अच्छी पैदावार ली जा सकती है. इसी तरीके को हाइड्रोपोनिक्स खेती कहा जाता है. इसमें पौधों की जड़ों को मिट्टी से पोषण देने के बजाय पानी के जरिए जरूरी पोषक तत्व दिए जाते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह तरीका उन लोगों के लिए सही है जिनके पास खेती के लिए कम जमीन होती है. इसमें पौधों को पाइप, कंटेनर में लगाया जाता है. पानी और पोषक तत्वों की मात्रा पर ध्यान देकर पौधों की ग्रोथ को मैनेज किया जाता है. सबसे अच्छी बात यह है कि सही सेटअप होने पर कम जगह में कई पौधे उगाए जा सकते हैं. इसे शुरू करने से पहले इस तकनीक के बारे में जानकारी और कितना खर्च होगा यह जान लेना चाहिए.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैसे काम करती है बिना मिट्टी वाली खेती?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस खेती में पौधे मिट्टी में नहीं लगाए जाते. उनकी जड़ों को पानी और उसमें घुले जरूरी पोषक तत्वों से खाना मिलता है. पौधे को एक ऐसी जगह रखा जाता है जहां उसकी जड़ें नीचे की तरफ रहती हैं और उन्हें पानी, हवा और पोषण मिलता रहता है. कई सिस्टम में पाइप का इस्तेमाल किया जाता है.&amp;nbsp;पानी को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए पंप भी लगाया जा सकता है.&amp;nbsp;इसका फायदा यह है कि पौधे को जितने पोषक तत्व चाहिए.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;उन्हें पानी के जरिए नियंत्रित तरीके से दिया जा सकता है.&amp;nbsp;पारंपरिक खेती की तरह पूरी जमीन तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती.&amp;nbsp;हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पानी की बचत भी होती है क्योंकि पानी को दोबारा इस्तेमाल किया जाता है. खेती के इस तरीके में आपको वाॅटर लेवल, न्यूट्रिएंट्स, लाइट और पौधों की ग्रोथ लगातार देखनी पड़ती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/15/59625a432a3050426e31b60d64e2dfb91786787234157907_original.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कम जगह में कई तरह की फसल उगा सकते हैं&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बिना मिट्टी वाली खेती का सबसे बड़ा फायदा जगह का बिल्कुल कम इस्तेमाल है. इसे आप बहुत ही कम जगह में शुरू कर सकते हैं. ध्यान रहे पौधों के लिए रोशनी और टेंपरेचर सही होना चाहिए. आपको बता दें इस तरीके से पत्तेदार सब्जियों और कुछ दूसरी फसलों को उगाया जा सकता है. इसमें सलाद पत्ता, पालक, मेथी जैसी फसलें फायदेमंद साबित हो सकती हैं. इसमें स्ट्रॉबेरी, टमाटर और दूसरी सब्जियों को भी उगाया जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आपको बता दें हर फसल इस तरीके से आसानी से नहीं उगती. इसलिए शुरुआत में ऐसी फसल ही लगाएं जिसकी जरूरतें आपके सेटअप के हिसाब से पूरी हो सकें. जगह बचने के साथ खेती को ऊंचाई की तरफ भी बढ़ाया जा सकता है. वर्टिकल तरीके से आप एक के ऊपर एक कई पौधे लगाए जा सकते हैं. इससे कम जगह का इस्तेमाल और ज्यादा अच्छे तरीके से हो जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/maize-farming-these-pests-increase-in-maize-after-rain-take-these-precautions-3175350&quot;&gt;मक्का में बारिश के बाद बढ़ जाते हैं ये कीट, ऐसे करें बचाव&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कितना आता है खर्च?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर आप इसे बड़े लेवल पर शुरू करना चाहते हैं. तो शुरुआत में पाइप, न्यूट्रिएंट टैंक, पंप और नेटपॉट्स का शुरूआत में थोड़ा इन्वेस्टमेंट करना होता है. अगर आप 500 से 1000 स्क्वायर फीट में इसे शुरू करना चाहते हैं तो 1.5 से 3 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है. हालांकि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड जैसे योजनाओं में किसानों को 50 फीसदी तक की सब्सिडी मिल जाती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नए किसानों के लिए पहले किसी कृषि संस्थान से 3 से 5 दिन की ट्रेनिंग सही रहेगी. किसान इसे शुरू में घर की छत पर 20-30 पौधों के साथ शुरू कर सकते हैं. इसमें पहले पानी का पीएच और टीडीएस मैनेज करना सीखना होदा. एक बार पूरा तरीका समझ जाएंगे तो फिर आप और पौधे लगा सकते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/15/865fde0c7918152db12661ba04c972a71786787473847907_original.png&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/pm-fasal-bima-yojana-crop-was-damaged-but-the-insurance-money-did-not-come-know-where-should-you-complain-3175386&quot;&gt;फसल खराब हुई लेकिन बीमा का पैसा नहीं आया, कहां करें शिकायत?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/15/9312f973e40f85b1c47638ee3b6fa1671786787615394907_original.png" width="220"/></item><item><title><![CDATA[फसल खराब हुई लेकिन बीमा का पैसा नहीं आया, कहां करें शिकायत?]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/pm-fasal-bima-yojana-crop-was-damaged-but-the-insurance-money-did-not-come-know-where-should-you-complain-3175386</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/pm-fasal-bima-yojana-crop-was-damaged-but-the-insurance-money-did-not-come-know-where-should-you-complain-3175386#respond</comments><pubDate>Sat, 15 Aug 2026 13:49:37 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/pm-fasal-bima-yojana-crop-was-damaged-but-the-insurance-money-did-not-come-know-where-should-you-complain-3175386</guid><description><![CDATA[फसल खराब हुई लेकिन बीमा का पैसा नहीं आया, कहां करें शिकायत?]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/15/39e5b88fbf96d3b71ed37bcc2112a8521786781624636907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[मक्का में बारिश के बाद बढ़ जाते हैं ये कीट, ऐसे करें बचाव]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/maize-farming-these-pests-increase-in-maize-after-rain-take-these-precautions-3175350</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/maize-farming-these-pests-increase-in-maize-after-rain-take-these-precautions-3175350#respond</comments><pubDate>Sat, 15 Aug 2026 12:23:46 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/maize-farming-these-pests-increase-in-maize-after-rain-take-these-precautions-3175350</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Maize Farming Tips:&lt;/strong&gt; बारिश मक्का की फसल के लिए जरूरी है लेकिन बारिश के बाद खेत में कुछ ऐसे कीड़ों की परेशानी बढ़ सकती है जो फसल को तेजी से नुकसान पहुंचाते हैं. जब खेत में नमी ज्यादा हो और मौसम लगातार नम बना रहे तब कई कीड़े मक्का के पौधों पर हमला करना शुरू कर देते हैं. शुरुआत में इनका असर बहुत कम दिखाई देता है. पत्तियों पर छोटे छेद देखकर किसान कई बार इसे नजरअंदाज कर देते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;लेकिन कुछ दिनों बाद यही नुकसान बढ़ सकता है और पौधे की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है. इसलिए बारिश के बाद मक्का के खेत पर थोड़ी ज्यादा नजर रखना जरूरी है. पत्तियों के साथ पौधे के बीच वाले हिस्से और तने को भी ध्यान से देखना चाहिए. अगर कहीं पत्तियां कटी हुई दिखें नए छेद नजर आएं तो तुरंत इसकी वजह पता करें. समय रहते कीड़े की पहचान हो जाए तो फसल को बड़े नुकसान से बचाना काफी आसान हो जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;फॉल आर्मीवर्म से मक्का को सबसे ज्यादा खतरा&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मक्का में फॉल आर्मीवर्म जिसे अमेरिकन सुंडी भी कहते हैं वह भी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है. बारिश के बाद मौसम इसके लिए सही होने पर इसकी संख्या तेजी से बढ़ सकती है. यह कीड़ा सबसे पहले मक्का की नरम पत्तियों को खाता है. धीरे-धीरे पत्तियों पर बड़े और अलग-अलग साइज के छेद दिखाई देने लगते हैं. पौधे के बीच वाले हिस्से में कीड़े का मल जैसा कचरा भी दिखाई दे सकता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर पत्तियों के बीच ऐसी गंदगी और नए छेद नजर आ रहे हैं तो पौधे को ध्यान से चेक करें. इस कीड़े की पहचान जल्दी हो जाए तो इसे कंट्रोल करना आसान रहता है. किसान बारिश के बाद हर कुछ दिन में खेत में जाकर कुछ पौधों को करीब से देखें पौधे के बीच निकल रही नई पत्तियों पर ध्यान दें. कीड़ा दिखाई देने पर बिना जानकारी के कोई भी दवा डालने से बचें. कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर सही मात्रा में सही दवा का इस्तेमाल करना ज्यादा सेफ रहता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/15/bc30615346ffa72c6243c9dc0b9166961786776397623907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;तना छेदक और शूट फ्लाई से भी रहें सावधान&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बारिश के &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में मक्का की फसल को तना छेदक और शूट फ्लाई जैसे कीड़ों से भी नुकसान हो सकता है. तना छेदक पौधे के अंदर जाकर तने को नुकसान पहुंचाता है. इसकी वजह से पौधे की ग्रोथ रुक सकती है और कई बार बीच की पत्ती सूखकर अलग होने लगती है. वहीं शूट फ्लाई का खतरा छोटी उम्र के पौधों में ज्यादा रहता है. इसके चलते पौधा कमजोर हो सकता है और उसकी बढ़त पर असर पड़ सकता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसलिए खेत में घूमते समय सिर्फ पत्तियों को देखना काफी नहीं है. कुछ पौधों को पास से देखें और अगर किसी पौधे की बीच वाली पत्ती सूख रही है और उसकी ग्रोथ बाकी पौधों से कम है तो उसे जरूर चेक करें. खेत में ज्यादा खरपतवार न रहने दें और फसल के आसपास सफाई रखें. अगर एक ही जगह कई पौधों में इस तरह के लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/15/b266e57190e389405f92601940cfe66b1786776659681907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/saffron-cultivation-in-india-saffron-cultivation-kashmir-saffron-cultivation-challenges-3174971&quot;&gt;Saffron Cultivation: केसर की खेती भारत में कहां-कहां होती है, क्यों है इतनी मुश्किल?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;बारिश के बाद ऐसे रखें फसल पर नजर&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बारिश रुकने के बाद किसान अगर कुछ मिनट खेत की जांच में लगा दें तो काफी नुकसान पहले ही रोका जा सकता है. खेत के सिर्फ किनारे वाले पौधों को ही न देखें बल्कि अलग-अलग हिस्सों के कुछ पौधों की पत्तियां और तना देखें. पत्तियों में नए छेद बन रहे हैं या नहीं बीच वाली नई पत्तियां ठीक हैं या नहीं और पौधे की ग्रोथ नार्मल है या नहीं. इन बातों पर ध्यान दें. अगर खेत में कहीं पानी जमा है तो उसकी निकासी भी जल्द करें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;लंबे समय तक पानी भरा रहने से पौधे कमजोर हो सकते हैं और दूसरी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं. कीड़ा मिलने पर सबसे पहले उसकी सही पहचान करें. सिर्फ अंदाजे से दवा डालने पर खर्च बढ़ सकता है और फायदा भी नहीं मिलेगा. जरूरत पड़ने पर कृषि विभाग या स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही दवा का इस्तेमाल करें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/soybean-farming-tips-if-the-leaves-turn-yellow-in-the-soybean-field-farmers-should-know-the-useful-thing-3175314&quot;&gt;सोयाबीन के खेत में पत्तियां पीली पड़ें तो क्या करें, किसान जानें काम की बात&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/15/b3a619d928912b447f0cf5f2684c05951786776562060907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[सोयाबीन के खेत में पत्तियां पीली पड़ें तो क्या करें, किसान जानें काम की बात]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/soybean-farming-tips-if-the-leaves-turn-yellow-in-the-soybean-field-farmers-should-know-the-useful-thing-3175314</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/soybean-farming-tips-if-the-leaves-turn-yellow-in-the-soybean-field-farmers-should-know-the-useful-thing-3175314#respond</comments><pubDate>Sat, 15 Aug 2026 11:10:58 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/soybean-farming-tips-if-the-leaves-turn-yellow-in-the-soybean-field-farmers-should-know-the-useful-thing-3175314</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Soyabean Farming Tips:&lt;/strong&gt; देश में बहुत से किसान सोयाबीन की खेती करते हैं. अक्सर देखा गया है कि सोयाबीन की पत्तियां पीली पड़ जाती है. जिससे किसान परेशान हो जाते हैं बारिश के &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में ऐसा अक्सर देखने को मिलता है जहां कुछ पत्तियां हरी रहती है तो वहीं कुछ पीली हो जाती हैं. ऐसे में किसान सोचते हैं कि फसल पर बीमारी ने अटैक कर दिया है और वह दवा स्प्रे करने लग जाते हैं. आपको बता दें पत्तियों का पीला पड़ जाना हर बार बीमारी नहीं होता.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कई बार खेत में ज्यादा पानी इकट्ठा होने से ऐसा हो जाता है. तो कई बार फसल में पोषक तत्वों की कमी के चलते ऐसा होता है. वहीं खेत में बार-बार एक ही फसल की खेती और मिट्टी में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी भी इसका एक कारण हो सकती है. पहले आपको यह देखना है यह दिक्कत पूरे खेत में है या फिर खेत के कुछ हिस्से में है उसी हिसाब से आगे इलाज करना बेहतर रहता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पहले पीलेपन की वजह पता करें&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर आपके खेत में लगी सोयाबीन की पत्तियां पीली पड़ती जा रही है. तो पहले आपको यह चेक करना है कि नीचे वाली पुरानी पत्तियां पीली पड़ रही है या बाद में ऊपर की पत्तियां भी पीली हो रही है. अगर ऐसा है तो फिर नाइट्रोजन की कमी इसका कारण हो सकती है. इसके अलावा अगर नई पत्तियां ज्यादा पीली दिख रही है तो फिर आयरन और सल्फर की कमी इसकी वजह हो सकती है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर आप खेत में लंबे समय से सोयाबीन और गेहूं की खेती किए जा रहे हैं. तो ऐसे में&amp;nbsp; मिट्टी के लिए जरूरी पोषक तत्वों का बैलेंस खराब हो सकता है. वही आप जरूरत से ज्यादा डीएपी और बहुत काम जैविक खाद&amp;nbsp; इस्तेमाल करते हैं उसका भी असर पड़ता है. ऐसे में पहले आपको मिट्टी की जांच करानी चाहिए और पता करना चाहिए किन-किन पोषक तत्वों की कमी है उसी हिसाब से आगे इलाज करना चाहिए.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/15/132128d435fd3512afcaa915dd5e8e3c1786772450250907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;खेत में पानी जमा है तो पहले उसे निकालें&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बारिश के दिनों में सोयाबीन के खेत में पानी जमा होना भी पत्तियों के पीले होने की बड़ी वजह बन सकता है. मिट्टी में बहुत देर तक पानी भरे रहने से जड़ों को सही से ऑक्सीजन नहीं मिल पाती है. और इसके चलते पौधे मिट्टी से जरूरी न्यूट्रिएंट्स नहीं ले पाते हैं. इस वजह से भी पत्तियों का कलर पीला हो जाता है. अगर ऐसा है तो पहले खेत में जो एक्स्ट्रा पानी भर गया है उसे बाहर निकाल दें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;और जहां-जहां पानी भरता है उन जगहों को ठीक कर लें ताकि आगे पानी ना भरे. अगर सिर्फ और जहां पानी भरा है वहां की पत्तियां पीली है तो समझ जाए ज्यादा पानी की वजह से दिक्कत हो रही है. ऐसे में अगर आप वाटर ड्रेनेज की दिक्कत को&amp;nbsp; सही कर लेंगे तो फिर यह दिक्कत भी ठीक हो जाएगी.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/15/29d24ba9242bccb239c6bc4460f6d9eb1786772436746907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/pm-kisan-yojana-yojana-can-four-brothers-of-a-family-take-benefits-in-the-scheme-know-the-rules-3175192&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या घर के चारों भाइयों को मिल सकता है किसान योजना में लाभ?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;न्यूट्रिएंट्स की कमी है तो जांच के बाद करें ट्रीटमेंट&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सोयाबीन की पत्तियां किस वजह से पीली है अगर यह पहले पता कर लिया जाए तो आगे इलाज करने में आसानी होती है.एक्सपर्ट्स के मुताबिक नाइट्रोजन की कमी के लक्षण दिखने पर 2 प्रतिशत यूरिया सॉल्यूशन का पत्तियों पर स्प्रे किया जा सकता है. वहीं आयरन की कमी होने पर फेरस सल्फेट का इस्तेमाल किया जाता है. कई बार नई पत्तियां पीली दिखाई देती हैं लेकिन उनकी नसें हरी रहती हैं. यह भी आयरन की कमी की वजह से हो सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हालांकि यहां सिर्फ पत्तियों का कलर देखकर ही कोई काम न करें. बारिश कैसी है और मिट्टी में नमी भी चेक करनी चाहिए. अगर पत्तियों पर पीले और हरे रंग के अलग-अलग पैच नजर आ रहे हैं. पत्तियां मुड़ने लगी हैं और पौधे की ग्रोथ कमजोर दिख रही है तो येलो मोजेक वायरस का हमला भी हो सकता है. इस बीमारी को फैलाने में सफेद मक्खी अहम भूमिका निभाती है. इसलिए पीलापन दिखते ही कोई भी दवा स्प्रे करने से पहले सही वजह पता कर लें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/cardamom-growing-tips-stick-it-in-a-banana-and-plant-it-in-a-pot-see-the-result-in-few-days-3174879&quot;&gt;केले में फंसाएं इलायची और गमले में लगा दें, कुछ ही दिनों में होगी तगड़ी कमाई&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/15/2770752924bc3e6b1393dda08d2bde9d1786771727332907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Saffron Cultivation: केसर की खेती भारत में कहां-कहां होती है, क्यों है इतनी मुश्किल?]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/saffron-cultivation-in-india-saffron-cultivation-kashmir-saffron-cultivation-challenges-3174971</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/saffron-cultivation-in-india-saffron-cultivation-kashmir-saffron-cultivation-challenges-3174971#respond</comments><pubDate>Sat, 15 Aug 2026 10:38:10 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/saffron-cultivation-in-india-saffron-cultivation-kashmir-saffron-cultivation-challenges-3174971</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Saffron Cultivation:&lt;/strong&gt; केसर दुनिया के सबसे मंहगे मसालों में से एक माना जाता है. इसके खाने में डालने से ही खाने का रंग, खूशबू और स्वाद तीनों बढ़ जाते हैं. वैसे तो केसर को भारत के कश्मीर से खासतौर पर जोड़ा जाता है लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसे भारत के अन्य राज्यों में भी उगाने का सफल प्रयास किया गया है. केसर की खेती जितनी आकर्षक लगती है उससे कई ज्यादा चुनौतीपूर्ण भी होती है. यहीं वजह है कि इसके दाम ज्यादा होते हैं और इसकी खेती सिमित मात्रा में होती हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कश्मीर को कहा जाता है केसर कैपिटल&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारत में मुख्य रूप से केसर की पारंपरिक खेती कश्मीर में की जाती है. कश्मीर अपनी सुदंरता के साथ-साथ केसर की खेती के लिए भी बेहद प्रसिद्ध है. कश्मीर का ठंडा वातावरण और यहां की जलवायु केसर की खेती के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है. केसर की खेती के लिए खासकर पुलवामा जिले के पंपोर और आसपास के क्षेत्र जैसे बडगाम और श्रीनगर काफी मशहूर माने जाते हैं. पंपोर को तो केसर का कटोरा भी कहा जाता है. वहीं पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों ने भी केसर उगाने के सफल प्रयास किए हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/tomato-cultivation-at-home-how-deep-your-pot-should-be-know-the-details-3173951&quot;&gt;&lt;strong&gt;घर पर करना चाहते हैं टमाटर की खेती, जानें कितना गहरा गमला चाहिए?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगस्त में की जाती है खेती&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आमतौर पर केसर की खेती अगस्त के महीने में की जाती है. वहीं इसमें फूल लगने की शुरूआत अक्टूबर के आखिरी हफ्ते या नवंबर के पहले हफ्ते में हो जाती है. जब यह फूल तैयार हो जाते हैं तो यह बेहद खूबसूरत बैंगनी रंग के दिखाई देते हैं जिसके अंदर लाल या केसरिया रंग के पतले-पतले रेशे होते हैं. उन्हीं रेशों के चुनकर सूखाया जाता है और वे केसर के रूप में तैयार हो जाते हैं. हर एक फूल से केवल तीन केसर के रेशे ही निकलते हैं. यहीं वजह है कि केसर का उत्पादन कम होता है और यह इतना महंगा होता है. कहा जाता है कि 1 ग्राम केसर के लिए 150 से 200 फूलों की आवश्यकता होती है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कितनी चुनौतीपूर्ण होती है केसर की खेती?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;केसर की खेती मुश्किल होने का कारण उसकी जलवायू और मिट्टी है. केसर के फूलों के लिए ठंडा मौसम और उपयुक्त वातावरण चाहिए होता है. इसके लिए ऐसी जमीन की आवश्यकता होती है जिसकी जल निकासी बेहतर हो. ज्यादा नमी होने से इसके कंद सड़ सकते है. जिससे पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. वहीं केसर की कटाई आम फसल जैसे नहीं की जा सकती. इसे आमतौर पर सुबह-सुबह हाथों से तोड़ा जाता है और बड़ी ही सावधानी से सूखाया जाता है. इसमें अधिक समय और श्रम लगता है. इसके अलावा मौसम में बदलाव होने से भी फसल खराब होने का डर रहता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/dragon-fruit-cultivation-tips-what-is-the-right-season-for-it-know-when-you-will-get-bumper-yield-3174508&quot;&gt;&lt;strong&gt;ड्रैगन फ्रूट खेती का सही मौसम, जानें कब मिलेगी बंपर पैदावार&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/14/fee8e68939d72ebbb5db762272569ae717866934975801473_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[घर में उगाएं देसी टिंडे, बाजार जाने की जरूरत नहीं]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/grow-desi-apple-gourd-at-home-no-need-to-go-to-the-market-3175153</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/grow-desi-apple-gourd-at-home-no-need-to-go-to-the-market-3175153#respond</comments><pubDate>Sat, 15 Aug 2026 10:03:38 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/grow-desi-apple-gourd-at-home-no-need-to-go-to-the-market-3175153</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Apple Gourd Growing Tips:&lt;/strong&gt; खाने में टिंडे बहुत से लोगों को पसंद होते हैं. लेकिन बाजार में केमिकल का इस्तेमाल करके आए गए टिंडो की वजह से अक्सर लोग टिंडे नहीं खा पाते. लेकिन क्या हो जब आपको अपने घर पर ही बढ़िया देसी टिंडे मिल जाए वह भी बिना केमिकल वाले. इसके लिए आपको बहुत ज्यादा जगह नहीं चाहिए. अगर आपके घर की छत खाली पड़ी है तो वहां भी ताजे टिंडे उगाए जा सकते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;टिंडे की बेल को बड़े गमले में आसानी से तैयार किया जा सकता है. सही मिट्टी, भरपूर धूप और समय पर खाद पानी मिले तो घर पर ही ताजे टिंडे मिलने लगते हैं. टिंडा गर्म मौसम में तेजी से बढ़ने वाली बेल वाली सब्जी है और इसे घर के किचन गार्डन में उगाना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है. चलिए आपको बताते हैं कैसे आप अपने घर में उगा सकते हैं देसी टिंडे.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;बड़े गमले में लगाएं टिंडे के बीज&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;घर पर टिंडे उगाने के लिए सबसे पहले सही गमला चुनना जरूरी है. इसकी जड़ें मिट्टी में अच्छी तरह फैलती हैं. इसलिए छोटा गमला लेने के बजाय बड़ा गमला बेहतर रहेगा. करीब 12&amp;times;12 इंच के गमले का इस्तेमाल किया जा सकता है. एक गमले में 3 से 4 बीज लगाए जा सकते हैं. इससे अगर कुछ बीज नहीं उगते हैं तो भी अच्छे पौधे मिल सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मिट्टी तैयार करते समय 50 फीसदी सामान्य मिट्टी, 40 फीसदी पुरानी गोबर की खाद या कंपोस्ट और 10 फीसदी बालू का मिक्स तैयार किया जा सकता है. इससे मिट्टी हल्की रहती है और पानी आसानी से बाहर निकल जाता है. बीज को उसकी लंबाई से करीब दोगुनी गहराई में लगाएं और ऊपर से थोड़ी मिट्टी या कोकोपीट डाल दें. इसके बाद हल्का पानी दें. शुरुआत में गमले को हल्की छाया वाली जगह पर रखें. बीज से पौधा निकलने के बाद इसे ऐसी जगह रखें जहां सीधी धूप मिलती हो.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/14/682721e246e87b54038f7bb77c1de2d61786715403837907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;धूप और पानी का रखें खास ध्यान&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;टिंडे की बेल को अच्छी ग्रोथ के लिए रोज करीब 6 से 8 घंटे की सीधी धूप चाहिए. गर्म &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में इसकी ग्रोथ अच्छी रहती है. बीज आमतौर पर 21 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में तेजी से पौधे में बदल सकते हैं और 7 से 15 दिन में पौधा बाहर आ सकता है. इसलिए गमले को ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां दिनभर अच्छी रोशनी मिलती रहे.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पानी देते समय एक बात का खास ध्यान रखें. मिट्टी में पानी अच्छी तरह पहुंचे लेकिन गमले में पानी जमा न हो. टिंडे की पत्तियों पर बार-बार पानी डालने के बजाय मिट्टी में पानी देना बेहतर रहता है. गर्मी में मिट्टी जल्दी सूख सकती है इसलिए हाथ से मिट्टी चेक करके पानी दें. बारिश के दिनों में पानी कम दें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जब बेल तेजी से बढ़ने लगे तो उसे जमीन या गमले के आसपास फैलने देने के बजाय ऊपर चढ़ने के लिए सहारा दें. रस्सी या डंडे की मदद से बेल को ऊपर बढ़ाया जा सकता है. इससे पौधे को फैलने के लिए जगह मिलती है और टिंडे भी जमीन से ऊपर रहेंगे. हर 15 से 20 दिन में पुरानी गोबर की खाद देने से पौधे की ग्रोथ अच्छी हो सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/farmers-news-before-buying-a-tractor-farmers-should-know-these-important-things-3175102&quot;&gt;ट्रैक्टर खरीदने से पहले, किसान भाई जानें ये जरूरी बातें&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;करीब दो महीने बाद आने लगेंगे टिंडे&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;टिंडे के पौधे की ग्रोथ सही रही तो बीज लगाने के करीब 40 से 45 दिन बाद बेल पर फूल आने शुरू हो सकते हैं. इसके बाद करीब दो महीने में टिंडे दिखाई देने लग सकते हैं. अच्छी देखभाल मिलने पर एक ही बेल से करीब तीन महीने तक टिंडे मिल सकते हैं. इसलिए शुरुआत से ही पौधे की ग्रोथ, पानी और खाद पर ध्यान देना जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;घर पर टिंडा उगाने के लिए अर्का टिंडा, टिंडा एस 48 और टिंडा लुधियाना जैसी वैरायटी का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि बीज खरीदते समय अच्छी क्वालिटी के लिए भरोसेमंद नर्सरी से बीज लेना बेहतर रहेगा. बेल पर टिंडे आने के बाद उन्हें बहुत ज्यादा बड़ा होने का इंतजार न करें. छोटे और नरम टिंडे सब्जी के लिए ज्यादा अच्छे रहते हैं. समय पर टिंडे तोड़ने से पौधे पर आगे भी नए फल आने का मौका मिलता रहता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पौधे की पत्तियों पर सफेद धब्बे, पीलापन या छोटे-छोटे कीड़े दिखाई दें तो तुरंत ध्यान दें. इस तरह थोड़ी सी देखभाल के साथ घर के छोटे गार्डन में ताजे देसी टिंडे उगाए जा सकते हैं और सब्जी खरीदने के लिए हर बार बाजार जाने की जरूरत भी नहीं होगी.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/14/d89b1debfb2930880ce960f3e2a46b391786716266694907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/fenugreek-cultivation-tips-farmers-will-reap-huge-profits-from-cultivating-this-green-vegetable-3175020&quot;&gt;इस हरी सब्जी से किसानों को होगा मोटा मुनाफा&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/14/6840dffebaa527523dfb8445fece003f1786716932380907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Palm Oil Cultivation: ऑयल पाम की खेती के लिए सरकार देगी मुफ्त पौधे, सब्सिडी की भी व्यवस्था]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/palm-oil-cultivation-government-schemes-for-palm-oil-cultivation-palm-oil-cultivation-tips-3175057</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/palm-oil-cultivation-government-schemes-for-palm-oil-cultivation-palm-oil-cultivation-tips-3175057#respond</comments><pubDate>Sat, 15 Aug 2026 08:47:03 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/palm-oil-cultivation-government-schemes-for-palm-oil-cultivation-palm-oil-cultivation-tips-3175057</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Palm Oil Cultivation:&lt;/strong&gt; भारत में खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा दे रही है. ऑयल पाम एक ऐसी खेती है जिससे प्रति हेक्टेयर अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में खाद्य तेल प्राप्त किया जा सकता है. किसानों के इस खेती से जोड़ने के लिए सरकार की ओर से मुफ्त पौधें उपलब्घ कराना, वित्तिय सहायता देना और खेती से जुड़ी अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं. यह सुविधाएं राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन- ऑयल पाम (NMEO- OP) &amp;nbsp;के तहत किसानों को दी जा रही हैं. इसका उदेश्य किसानों की आय बढ़ाना और देश में घरेलू खाद्य तेल का उत्पादन बढ़ाना है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्या होता है ऑयल पाम?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ऑयल पाम का मतलब है ताड़ के पेड़ की खेती करना और उससे पाम ऑयल यानी कि ताड़ का तेल प्राप्त करना. यह तेल खाद्य सामग्री में उपयोग होने के साथ-साथ कई ब्युटी प्रोडक्ट्स में भी इस्तेमाल होता है. पिछले कुछ सालों में पाम ऑयल की मांग विदेशों में भी काफी बड़ी है. जिसकी वजह से भारत सरकार भी अब इसकी खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रही है. सबसे अच्छी बात यह है कि किसान को इस खेती में केवल एक बार मेहनत करनी होती है और अगले 20 से 25 साल तक वो इससे अच्छी आमदनी कमा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/cardamom-growing-tips-stick-it-in-a-banana-and-plant-it-in-a-pot-see-the-result-in-few-days-3174879&quot;&gt;&lt;strong&gt;केले में फंसाएं इलायची और गमले में लगा दें, कुछ ही दिनों में होगी तगड़ी कमाई&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गर्म और नम जलवायु की होती है आवश्यकता&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ऑयल पाम को हर क्षेत्र में नहीं उगाया जा सकता. इसके लिए गर्म और नम जलवायु तथा पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है. ऑयल पाम लगाने के बाद तुरंत आय शुरू नहीं होती. पौधों को उत्पादन देने में समय लगता है लेकिन कुछ वर्षों बाद इससे लंबे समय तक कमाई की जा सकती है. इसकी एक खासियत यह भी है कि इसके फलों से अधिक मात्रा में तेल प्राप्त किया जा सकता है. हांलाकि इसके लिए किसानें को पौधे की सही देखभाल और समय-समय पर फलों की कटाई करना जरूरी होता है. पौधें रोपण के अगले 3-4 साल बाद फल देना शुरू करते हैं. ऐसे में किसान इसे लंबे निवेश के रूप में देख सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;किसानों को मिलेगा लाभ&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सरकार की तरफ से मिले मुफ्त पौधें और अन्य सुविधा से किसान पर ऑयल पाम की खेती करने के लिए आर्थिक दबाव नहीं आइगा. इससे किसान का शुरूआती आर्थिक बोझ कम हो जाएगा और गुणवत्तापूर्ण पौधें मिलने पर फसल के सफल होने की संभावना भी बनी रहेगी. वहीं किसान सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण के साथ अपनी आय बढ़ा सकते हैं. &amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/sugarcane-farmers-will-get-80-percent-subsidy-on-these-machines-know-the-details-3173608&quot;&gt;&lt;strong&gt;गन्ना किसानों को इन मशीनों पर मिलेगी 80% सब्सिडी&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/14/ffa059455988a7d57d30b302dd8ac3bb17867023840811473_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[क्या घर के चारों भाइयों को मिल सकता है किसान योजना में लाभ?]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/pm-kisan-yojana-yojana-can-four-brothers-of-a-family-take-benefits-in-the-scheme-know-the-rules-3175192</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/pm-kisan-yojana-yojana-can-four-brothers-of-a-family-take-benefits-in-the-scheme-know-the-rules-3175192#respond</comments><pubDate>Sat, 15 Aug 2026 06:47:31 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/pm-kisan-yojana-yojana-can-four-brothers-of-a-family-take-benefits-in-the-scheme-know-the-rules-3175192</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;PM Kisan Yojana:&lt;/strong&gt; देश में किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. जिनमें पीएम किसान योजना सबसे महत्वपूर्ण योजना है&amp;nbsp; इसके तहत पात्र किसान परिवार को सालाना 6000 रुपये मिलते हैं. यह रकम 2000 रुपये की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है. पीएम किसान योजना के तहत अब तक 23 किस्तें जारी हो चुकी हैं और देश के करोड़ों किसान परिवार इसका फायदा उठा चुके हैं. 23वीं किस्त 20 जून 2026 को जारी की गई थी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब किसानों को 24वीं किस्त का इंतजार है. जिसके अक्टूबर 2026 के आसपास आने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि सरकार ने अभी इसकी कोई तारीख घोषित नहीं की है. अक्सर एक ही घर में कई भाई खेती करते हैं और उनके मन में सवाल रहता है कि क्या सभी को अलग-अलग 6000 रुपये मिल सकते हैं. चलिए आपको बताते हैं अगर किसी परिवार में चार भाई हैं तो क्या चारों को 6000 रुपये मिलेंगे या नहीं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;परिवार को लेकर योजना में नियम&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पीएम किसान योजना के नियमों के मुताबिक किसान परिवार में पति, पत्नी और नाबालिग बच्चे शामिल माने जाते हैं. यानी योजना में परिवार की पहचान जमीन के रिकॉर्ड और परिवार की स्थिति के आधार पर होती है. सिर्फ एक घर में रहने या एक ही सरनेम होने से सभी लोग एक ही किसान परिवार नहीं बन जाते.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब सवाल आता है कि अगर एक ही घर में चार भाई रहते हैं तो क्या चारों को योजना का पैसा मिलेगा? इसका जवाब सीधा हां या ना नहीं है. अगर चारों भाई अलग-अलग परिवार बन चुके हैं. उनके नाम पर अलग खेती योग्य जमीन है और वह योजना की बाकी शर्तें पूरी करते हैं. तो उनकी पात्रता अलग-अलग देखी जा सकती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;लेकिन अगर रिकॉर्ड और परिवार की स्थिति ऐसी है कि सभी एक ही पात्र किसान परिवार के हिस्से हैं. तो हर भाई को अलग 6000 रुपये नहीं मिलेंगे.&amp;nbsp;योजना का फायदा जमीन के मालिकाना हक से भी जुड़ा है. इसलिए केवल यह कहना कि चारों भाई खेती करते हैं अपने आप में अलग-अलग लाभ पाने के लिए काफी नहीं है. जमीन का रिकॉर्ड, परिवार की स्थिति चेक की जाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/14/ccc5304f1ce6f050f073c33201a176091786729531916907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;चारों भाइयों को कब मिल सकता है फायदा?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मान लीजिए चार भाइयों के परिवार अलग हो चुके हैं. सभी के नाम पर खेती योग्य जमीन का अलग रिकॉर्ड है और वह अपने-अपने परिवार के साथ अलग किसान परिवार के रूप में पात्रता पूरी करते हैं. ऐसे में सभी चारों भाइयों के परिवार को पीएम किसान का लाभ मिल सकता है. आपको बता दें कि पैसा हर व्यक्ति के हिसाब से नहीं बल्कि पात्र किसान परिवार के हिसाब से मिलता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके उलट अगर एक ही किसान परिवार के नाम पर जमीन है और परिवार के कई सदस्य अलग-अलग आवेदन करके पीएम किसान का फायदा लेने लगते हैं. तो यह योजना के नियमों के मुताबिक सही नहीं है. पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर भी ऐसे मामलों का जिक्र है. जहां एक ही परिवार के एक से ज्यादा सदस्य लाभ ले रहे हैं. ऐसे मामलों में भुगतान को फिजिकल वेरिफिकेशन पूरा होने तक रोका जा सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/14/22a71cdf617e8345155daba82e52355c1786729546533907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/cardamom-growing-tips-stick-it-in-a-banana-and-plant-it-in-a-pot-see-the-result-in-few-days-3174879&quot;&gt;केले में फंसाएं इलायची और गमले में लगा दें, कुछ ही दिनों में होगी तगड़ी कमाई&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;गलत तरीके से लाभ लेने पर एक्शन&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;नियमों की अनदेखी करके अगर एक ही परिवार के भीतर कई लोग फर्जी तरीके से गलत जानकारी देकर किस्तें ले रहे हैं. तो सरकार का सिस्टम अब बेहद सख्त हो चुका है. गलत तरीके से उठाई गई किस्तों पर सरकार नोटिस भेजकर पूरी रकम की रिकवरी कर रही है और गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है. अगर किसी घर में अनजाने में या गलती से एक से अधिक सदस्यों के खाते में पैसा आ रहा है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;तो पोर्टल पर जाकर वॉलंटरी सरेंडर ऑप्शन का इस्तेमाल करके खुद ही योजना का लाभ छोड़ा जा सकता है. ऐसा करने से किसान किसी भी कानूनी जुर्माने या रिकवरी की कार्रवाई से पूरी तरह सुरक्षित बच जाते हैं. योजना में लाभ के लिए नियमों का ध्यान रखना जरूरी है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/goat-rearing-tips-which-breed-is-best-for-it-know-how-much-milk-it-gives-3174942&quot;&gt;बकरी पालन में कौन-सी नस्ल सबसे अच्छी, जानें कितना देती है दूध?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/14/74f4c4d0cc742e60b934eba1851011501786729730444907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Areca Nut Farming : भारत में सबसे ज्यादा कहां होती है सुपारी की खेती, इससे कितनी कमाई?]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/areca-nut-farming-know-where-is-most-areca-nut-cultivation-in-india-and-how-much-income-from-it-3175204</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/areca-nut-farming-know-where-is-most-areca-nut-cultivation-in-india-and-how-much-income-from-it-3175204#respond</comments><pubDate>Fri, 14 Aug 2026 23:17:45 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मानसी उपाध्याय ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/areca-nut-farming-know-where-is-most-areca-nut-cultivation-in-india-and-how-much-income-from-it-3175204</guid><description><![CDATA[Areca Nut Farming : भारत में सबसे ज्यादा कहां होती है सुपारी की खेती, इससे कितनी कमाई?]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/14/e2a14f64a3d13aec44fde20f402c230417867245785601120_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[ट्रैक्टर खरीदने से पहले, किसान भाई जानें ये जरूरी बातें]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/farmers-news-before-buying-a-tractor-farmers-should-know-these-important-things-3175102</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/farmers-news-before-buying-a-tractor-farmers-should-know-these-important-things-3175102#respond</comments><pubDate>Fri, 14 Aug 2026 17:55:41 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/farmers-news-before-buying-a-tractor-farmers-should-know-these-important-things-3175102</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Farmers Tractor Buying Tips: &lt;/strong&gt;खेती में किसानों के लिए अच्छे बीज,खाद और कीटनाशकों की ही जरूरी नहीं होते. बल्कि कई और चीजें खेती के लिए पहले जरूरी होती है. किसी फसल की बुवाई से पहले खेत की जुताई और फसल तैयार होने पर उसकी कटाई में इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी जरूरी होती है. किसानों को लिए खेत में इस्तेमाल होने वाला ट्रेक्टर भी बहुत अहम होता है.&amp;nbsp;जुताई से लेकर बुवाई, ढुलाई और दूसरे कामों तक इसकी जरूरत पड़ती है. और यही वजह है कि किसानों के लिए नया ट्रैक्टर खरीदना एक बड़ा इन्वेस्टमेंट माना जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसलिए ट्रेक्टर खरीदने से पहले उसके बारे में कई बातें जान लेना बेहतर होता है. ट्रेक्टर की बुकिंग से पहले डीलर से कुछ सवाल पूछने भी जरूरी हैं.&amp;nbsp;ट्रैक्टर की ऑन रोड कीमत, फीचर्स, वारंटी, सर्विस, स्पेयर पार्ट्स और फाइनेंस से जुड़ी जानकारी पहले ही पता करना सही रहता है. चलिए आपको बताते हैं किन चीजों के बारे में पहले ही पता कर लेना है सही.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सबसे पहले कीमत और फीचर्स पता करें&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर आपको कोई ट्रैक्टर पसंद आ गया है तो&amp;nbsp; सबसे पहले डीलर से उसकी पूरी ऑन रोड कीमत पूछें. एक्स शोरूम कीमत के बाद बीमा, रजिस्ट्रेशन, टैक्स, डिलीवरी और दूसरे चार्ज जुड़ने के बाद फाइनल कीमत बदल सकती है. इसलिए डीलर से लिखित कोटेशन जरूर लें. इसके बाद मॉडल के फीचर्स को अच्छी तरह समझें. इंजन पावर, गियरबॉक्स, हाइड्रोलिक क्षमता, पीटीओ और लिफ्टिंग कैपेसिटी जैसी चीजों के बारे में सवाल करें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके साथ यह भी देख लें कि जिस मॉडल की बुकिंग कर रहे हैं. उसमें वही फीचर्स मौजूद हैं जो डीलर ने बताए हैं. अलग-अलग वेरिएंट में थोड़े बदलाव हो सकते हैं. अगर ट्रैक्टर लोन पर लेना है तो इंटरेस्ट रेट, डाउन पेमेंट, लोन का टेन्योर, प्रोसेसिंग फीस और टोटल पेमेंट की जानकारी भी पहले लें. सिर्फ कम ईएमआई देखकर फैसला करना सही नहीं है. क्योंकि लंबे टेन्योर में टोटल पेमेंट ज्यादा हो सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/14/2918d05485295d3efed10a6fea7b8f0a1786710159271907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें:&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/fenugreek-cultivation-tips-farmers-will-reap-huge-profits-from-cultivating-this-green-vegetable-3175020&quot;&gt; इस हरी सब्जी से किसानों को होगा मोटा मुनाफा&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;वारंटी और सर्विस का खर्च पहले ही समझ लें&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ट्रैक्टर खरीदने से पहले वारंटी की जानकारी लेना भी जरूरी है. डीलर से पूछें कि वारंटी कितने साल या कितने घंटे की है. इंजन, गियरबॉक्स और दूसरे बड़े पार्ट्स पर अलग नियम हैं या नहीं यह भी समझ लें. वारंटी में क्या शामिल है और किन चीजों की जिम्मेदारी कंपनी नहीं लेती. इसकी जानकारी लिखित दस्तावेज में देखना बेहतर रहेगा.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सिर्फ वारंटी जानना काफी नहीं है. पहली सर्विस कब होगी और उसके बाद कितने समय या कितने घंटे के अंतर पर सर्विस करानी होगी यह भी पूछें. नार्मल सर्विस में इंजन ऑयल, फिल्टर और दूसरे जरूरी सामान पर कितना खर्च आ सकता है इसका अंदाजा भी लें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इससे ट्रैक्टर खरीदने के बाद आने वाला रेगुलर रखरखाव खर्च पहले से समझ में आ जाएगा. इसके साथ ही अपने इलाके में कंपनी का अधिकृत सर्विस सेंटर कहां है और खराबी आने पर मदद कितनी जल्दी मिल सकती है. यह भी पता कर लें.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन बातों को भी जान लें&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हमेशा गाड़ी खरीदने से पहले उसकी टेस्ट ड्राइव लेना बेहतर होता है. ट्रैक्टर लेने से पहले उसकी भी टेस्ट ड्राइव जरूर लें.अगर आप उसे&amp;nbsp;खेत में चलाकर नहीं देखेंगे तो गियर, क्लच, ब्रेक, स्टीयरिंग और हाइड्रोलिक सिस्टम की सही जानकारी नहीं पता चलेगी. इसलिए टेस्ट ड्राइव जरूर लेनी चाहिए.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक और जरूरी चीज है आपके पास जो कृषि उपकरण जिनें रोटावेटर, कल्टीवेटर, हल, सीड ड्रिल और ट्रॉली हैं. उनके साथ ट्रैक्टर सही तरीके से काम करेगा या नहीं. पीटीओ और हाइड्रोलिक लिफ्टिंग कैपेसिटी की जानकारी जरूर लें. इसके अलावा स्पेयर पार्ट्स की अवेलिबिलिटी और उनकी कीमत भी पूछें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके अलावा कितना डिस्काउंट मिल रहा है यह भी पता करें कई डीलरशिप ट्रैक्टर पर डिस्काउंट ऑफर करते हैं. 2-3 डीलर्स के पास जाकर सारी बातें कंपेयर करें इसके बाद आपको जो डील सही लगे वहीं से ट्रैक्टर खरीदें ऐसे मामलों में जल्दबाजी बिल्कुल न करें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/cardamom-growing-tips-stick-it-in-a-banana-and-plant-it-in-a-pot-see-the-result-in-few-days-3174879&quot;&gt;केले में फंसाएं इलायची और गमले में लगा दें, कुछ ही दिनों में होगी तगड़ी कमाई&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/08/14/354164242b26a58612b7b2401fe795661786709814964907_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>