<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>कितने की आती है पुंगनूर गाय, जानें एक दिन में कितने लीटर देती है दूध?</title><atom:link href="https://www.abplive.com/agriculture/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Wed, 30 Sep 2026 12:32:20 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[गोभी की फसल के लिए कितनी कारगर है स्पिनोसैड दवा? कैसे करें इस्तेमाल]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/spinosad-insecticide-for-cauliflower-crops-know-how-should-it-be-used-3195710</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/spinosad-insecticide-for-cauliflower-crops-know-how-should-it-be-used-3195710#respond</comments><pubDate>Wed, 30 Sep 2026 11:55:47 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/spinosad-insecticide-for-cauliflower-crops-know-how-should-it-be-used-3195710</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खेती करने वाले किसानों के लिए बहुत जरूरी है कि फसल को कीड़ों से बचाया जाए.&amp;nbsp;अगर आप गोभीकी खेती करते हैं. तो जानते होंगे कि इस पर कीड़ों का काफी अटैक देखने को मिलता है. खासकर डायमंड बैक मॉथयानी हीरक कीट और इल्लियां यह पूरी फसल को चंद दिनों में खराब कर जाते हैं. कीटनाशकों के नाम पर मार्केट में ढेरों दवाइयां भरी पड़ी हैं. लेकिन किसानों के बीच आजकल जिस दवा के सबसे ज्यादा चर्चे हैं वह है स्पिनोसैड.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई यह दवा गोभी के लिए इतनी असरदार है जितनी लोग बात करते हैं? क्या यह सच में फसल को इल्लियों से बचा सकती है? चलिए आपको समझाते हैं स्पिनोसैड कैसी दवा है. यह कैसे काम करती है और इसे खेत में इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या है स्पिनोसैड दवा?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर टेक्निकल टर्म में बात न करें तो स्पिनोसैड एक ऐसी मार्डन और नैचुरल तरीके से डिराइव की गई दवा है जो मिट्टी के एक खास बैक्टीरिया से बनाई जाती है. यानी इसे आप एक तरह का बायो-पेस्टिसाइड या फिर एडवांस कीटनाशक मान सकते हैं. गोभी की फसल में लगने वाली डायमंड बैक मॉथ की इल्लियां, तंबाकू की इल्ली और फल खाने वाले छेदक कीड़े ऐसे होते हैं जो आम दवाओं से दूर नहीं होते हैं. उन पर पुरानी दवाइयां बेअसर साबित होने लगती हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यहीं पर स्पिनोसैड काम करती है. जैसे ही इल्ली इस दवा के संपर्क में आती है या इसे खाती है. उसका नर्वस सिस्टम पूरी तरह ब्लॉक हो जाता है. कीड़ा लकवाग्रस्त हो जाता है, कांपने लगता है और कुछ ही घंटों में उसका खेल खत्म हो जाता है.यह दवा कांटेक्ट और पेट के जहर दोनों तरह से काम करती है. यानी कीड़ा अगर पौधे को छू भी ले या चबा ले तो उसका बचना नामुमकिन है. किसानों के लिए यह&amp;nbsp; इसलिए भी बढ़िया है क्योंकि ये पर्यावरण और खेत ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाती. बशर्ते इसका सही मात्रा में इस्तेमाल किया जाए.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/30/a2da873b7ec03a56b99b940b8eb98c3f1790749356430907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस्तेमाल करने का सही तरीका क्या?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दवा चाहे कितनी भी दमदार क्यों न हो अगर इस्तेमाल करने का तरीका गलत हुआ तो समझो पैसा बर्बाद हो गया. स्पिनोसैड के साथ भी यही बात है. बाजार में यह आमतौर पर स्पिनोसैड 45% एससी फॉर्मूलेशन में मिलती है. इसका इस्तेमाल करते वक्त सबसे पहला नियम यह है कि अंदाजे से काम बिल्कुल न चलाएं.&lt;/p&gt;
&lt;ul style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;
&lt;li&gt;&lt;strong&gt;सही डोज़:&lt;/strong&gt; आमतौर पर गोभी के खेत के लिए 15 लीटर वाले पंप में लगभग 7 से 8 मिलीलीटर स्पिनोसैड 45% एससी दवा मिलाई जाती है. अगर एकड़ के हिसाब से देखें. तो लगभग 70 से 80 मिलीलीटर दवा को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करना एकदम सही रहता है.&lt;/li&gt;
&lt;li&gt;&lt;strong&gt;छिड़काव का सही समय:&lt;/strong&gt; धूप तेज हो तब कभी स्प्रे मत कीजिए. सुबह का वक्त या फिर हल्की ठंडी शाम का वक्त इसके लिए बेस्ट होता है. स्प्रे करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि पौधे के पत्ते, खासकर गोभी के फूल और पत्तों की निचली सतह अच्छे से भीग जानी चाहिए क्योंकि इल्लियां ज्यादातर वहीं छिपकर बैठती हैं.&lt;/li&gt;
&lt;li&gt;&lt;strong&gt;मौसम का ध्यान:&lt;/strong&gt; अगर छिड़काव के तुरंत बाद बारिश आ गई तो दवा धुल जाएगी और मेहनत खराब हो जाएगी. इसलिए &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; देखकर ही कदम उठाएं.&lt;/li&gt;
&lt;/ul&gt;
&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/30/0f25d1a23ce64a725b7f3802128a0b7a1790749539530907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/haryana-farmers-will-get-subsidy-for-gardening-know-how-to-get-help-3195498&quot;&gt;इस राज्य में किसानों को बागवानी के लिए सब्सिडी, जानें कैसे मिलेगी मदद?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सावधानियां और जरूरी बातें&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;स्पिनोसैड एक बहुत ही ताकतवर दवा है. इसलिए इसके इस्तेमाल में थोड़ी सावधानी बरतना बहुत जरूरी है. सबसे पहली बात तो यह है कि लगातार एक ही कीटनाशक का इस्तेमाल खेतों में नहीं करना चाहिए. वरना कीड़े उस दवा के खिलाफ इम्युनिटी बना लेते हैं जिसे रेजिस्टेंस कहते हैं. इसलिए अगर इस बार स्पिनोसैड का इस्तेमाल किया है. तो अगली बार फसल चक्र या दवा बदल-बदल कर स्प्रे करें.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दूसरी सबसे जरूरी बात स्प्रे करते वक्त हाथों में दस्ताने, मुंह पर मास्क र आंखों पर चश्मा जरूर लगाएं. यह कोई साधारण पानी नहीं है. केमिकल है जो शरीर के संपर्क में आने पर नुकसान पहुंचा सकता है. स्प्रे करने के बाद हाथ-पैर अच्छी तरह साबुन से धोएं. इसके अलावा, दवा के डिब्बे पर लिखी एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरिंग कंपनी की गाइडलाइंस को जरूर पढ़ लें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/grow-fresh-tomatoes-home-know-the-process-3195493&quot;&gt;घर के गमले में उगाएं ताजे-लाल टमाटर, बाजार की जरूरत खत्म&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/30/d8b02c72241adec75b94491c4565a7af1790749326517907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[घर के गमले में उगाएं ताजे-लाल टमाटर, बाजार की जरूरत खत्म]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/grow-fresh-tomatoes-home-know-the-process-3195493</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/grow-fresh-tomatoes-home-know-the-process-3195493#respond</comments><pubDate>Wed, 30 Sep 2026 10:17:46 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/grow-fresh-tomatoes-home-know-the-process-3195493</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आज के दौर में एक ओर जहां महंगाई बढ़ रही है. तो वहीं दूसरी ओर सब्जियों की कीमतें भी छू रही है. हर सब्जी में टमाटर का इस्तेमाल होता है. कई बार टमाटर की कीमतें काफी बढ़ जाती है. जिससे मिडिल क्लास लोगों के किचन का बजट बिगड़ जाता है. इसके ऊपर कई बार देखा जाता है कि टमाटरों को केमिकल का इस्तेमाल करके पकाया जाता है. जिससे सेहत पर बुरा असर भी पड़ता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसलिए अब वह समय गया है अपने घर के गमले में ही टमाटर उगा लिए जाएं. इसके लिए आपको खेती का बहुत ज्यादा जानकार होना जरूरी नहीं है. बस थोड़ा सी देखभाल, सही मिट्टी का जुगाड़ और थोड़ी सी धूप इतने में ही आपका पौधा टमाटरों से भर जाएगा. तो चलिए आपको बताते हैं कि कैसे आप घर की में एकदम ताजा टमाटर उगा सकते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इस तरह करें शुरुआत&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;घर पर टमाटर उगाने की शुरुआत के लिए सबसे पहले आपको चाहिए एक सही साइज का गमला या फिर ग्रो बैग. अगर आपके पास बड़े साइज का गमला कम से कम 12 से 15 इंच चौड़ा है. तो और ही बढ़िया है. मिट्टी तैयार करने के लिए सिर्फ नार्मल मिट्टी से काम नहीं चलेगा. आपको चाहिए 50 प्रतिशत नॉर्मल गार्डन सॉइल, 30 प्रतिशत गोबर की पुरानी खाद, और 20 प्रतिशत कोकोपीट जिससे मिट्टी एकदम भुरभुरी रहे और पानी जमा न हो.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब बात आती है बीज की. बाजार से हाइब्रिड या देसी अच्छे क्वालिटी के बीज ले आइए या फिर घर में रखे थोड़े ओवर-राइप यानी ज्यादा पके हुए टमाटर के गूदे को पानी में धोकर भी इस्तेमाल कर सकते हैं. बीजों को सीधे बड़े गमले में फेंकने के बजाय पहले किसी छोटी ट्रे में नर्सरी तैयार करें. जब पौधे 4 से 6 इंच के हो जाएं. तब उन्हें निकालकर अपने मेन बड़े गमले में शिफ्ट कर दीजिए. पानी देते वक्त इस बात का खास ख्याल रखें कि गमले में ड्रेनेज होल अच्छा हो क्योंकि जड़ों में पानी ठहरना पौधे के लिए बहुत नुकसानदेह होता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/f3045898a1b340215551604fa37e2b011790705195110907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;धूप, पानी और खाद का बैलेंस रखें&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पौधा लगा दिया इसका मतलब यह नहीं कि काम खत्म हो गया. असली काम अब शुरू होता है. टमाटर के पौधे को अच्छी धूप चाहिए दिनभर में कम से कम 5 से 6 घंटे की डायरेक्ट सनलाइट इसे मिलनी ही चाहिए. पानी देने का टाइम आपको बता दें जब मिट्टी ऊपर से सूखी लगे तभी पानी दें. रोज-रोज भर-भर के पानी देने से पौधे की ग्रोथ रुक जाती है और फूल झड़ने लगते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खाद की बात करें तो हर 15 से 20 दिन में पौधे को थोड़ी ऑर्गेनिक बूस्ट देनी जरूरी है. इसके लिए आप सड़ी हुई गोबर की खाद, प्याज के छिलके का पानी या चाय की पत्ती की खाद इस्तेमाल कर सकते हैं. जब पौधे पर पीले-पीले फूल आने लगें तो समझ लीजिए कि अब टमाटर बनने का वक्त आ गया है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस स्टेज पर पौधे को हवा का अच्छा झोंका और हल्का सा हिलाना यानी हैंड पॉलिनेशन बहुत फायदेमंद होता है. जैसे-जैसे पौधे की हाइट बढ़ेगी उसे सपोर्ट देने के लिए एक लकड़ी की डंडी या फिर बांस का सहारा जरूर बांध दें. वरना भारी गुच्छों के वजन से पौधा झुककर टूट सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/370089828336107eab4f3ef22edd56161790705314857907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/garlic-cultivation-how-much-money-you-can-earn-after-deducting-the-cost-from-one-acre-3195458&quot;&gt;लहसुन की खेती का पूरा हिसाब-किताब, लागत निकाल कर इतनी होगी बचत&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इतने दिन बाद तोड़ें टमाटर&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;टमाटर पररअक्सर पत्तों पर सफेद मक्खी या इल्लियां हमला बोल देती हैं. इसके लिए केमिकल जहर छिड़कने की कोई जरूरत नहीं है. बस नीम के तेल की कुछ बूंदों को पानी और थोड़ा सा लिक्विड सोप मिलाकर स्प्रे बना लें और हर हफ्ते पौधे पर छिड़काव कर दें. इसके अलावा पीले और सूखे पत्तों को कैंची से समय-समय पर काटते रहें जिससे पौधे की पूरी एनर्जी नए फल उगाने में लगे.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;लगभग 60 से 75 दिन की मेहनत के बाद आपके गमले में वो मैजिक पल आ जाएगा जब हरे टमाटर धीरे-धीरे चमकदार, गहरे लाल रंग में बदलने लगेंगे. जब टमाटर पूरी तरह लाल और थोड़े कड़े हो जाएं. तो उन्हें कैंची या उंगलियों से संभालकर तोड़ लें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/pm-kisan-yojana-next-instalment-cam-be-released-on-this-days-know-the-update-3195276&quot;&gt;किसानों को मालामाल बनाने वाली है सरकार, इस दिन खाते में आएंगे किसान निधि के पैसे&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/73c0db08864a9ebe84e1d7d86ba1ebcf1790704846672907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[इस राज्य में किसानों को बागवानी के लिए सब्सिडी, जानें कैसे मिलेगी मदद?]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/haryana-farmers-will-get-subsidy-for-gardening-know-how-to-get-help-3195498</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/haryana-farmers-will-get-subsidy-for-gardening-know-how-to-get-help-3195498#respond</comments><pubDate>Wed, 30 Sep 2026 06:50:12 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/haryana-farmers-will-get-subsidy-for-gardening-know-how-to-get-help-3195498</guid><description><![CDATA[&lt;p&gt;किसानों के लिए अक्सर सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जाती हैं. इसी कड़ी में हरियाणा सरकार की ओर के अपने राज्य&amp;nbsp;के किसानों के लिए एक बहुत ही शानदार योजना शुरू की गई है. जो उनके लिए बड़ी फायदेमंद साबित हो सकती है. पारंपरिक फसलों में कम मुनाफे से परेशान किसानों को अब सरकार ने बागवानी की तरफ कदम बढ़ाने का एक तगड़ा मौका दिया है. राज्य सरकार ने बागवानी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक बढ़िया योजना शुरू की है. जिसके तहत किसानों को प्रति एकड़ भारी-भरकम आर्थिक मदद दी जा रही है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अगर आपके पास भी खेत खाली है और आप कम लागत में मोटा मुनाफा कमाने की फिराक में हैं. तो यह सरकारी योजना आपके लिए मालामाल बनने का जरिया साबित हो सकती है. इस योजना के तहत फल, सब्जी, फूल, मसाले और खुशबूदार पौधों की खेती पर बंपर सब्सिडी मिल रही है. चलिए आपको बताते हैं कि किस फसल पर कितनी मदद मिलेगी और इसके लिए आपको क्या-क्या तैयारी करनी होगी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;फल और सब्जियों की खेती पर मदद&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;सरकार की इस खास योजना के तहत अगर कोई किसान अपने खेत में नए फलदार बाग लगाता है. तो उसे फसल और प्रावधान के हिसाब से 24500 रुपये से लेकर 140000 रुपये प्रति एकड़ तक की भारी सब्सिडी दी जाती है. इस लाभ को पाने के लिए किसान अधिकतम पांच एकड़ जमीन तक आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा सब्जियों की खेती करने वालों के लिए भी सरकार ने आर्थिक मदद का प्रावधान रखा है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जहां सामान्य वर्ग के किसान अधिकतम पांच एकड़ और अनुसूचित वर्ग के किसान एक एकड़ तक इस योजना का पूरा फायदा उठा सकते हैं. सब्जियों के मामले में यह मदद मल्चिंग, लो टनल, ड्रिप सिंचाई या बांस की स्टेकिंग जैसे आधुनिक और एकीकृत खेती मॉडल अपनाने पर मिलती है. जिससे फसल की पैदावार कई गुना बढ़ जाती है और पानी की बचत भी होती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/d4f32feb6ee309ef75d3a1a2ca92ea491790706197613907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;मसाले, फूल और खुशबूदार पौधों के लिए भी अनुदान&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;सिर्फ फल और सब्जियों तक ही नहीं बल्कि मसाले, फूल और खुशबूदार पौधों की खेती करने वाले किसानों पर भी सरकार पूरी तरह मेहरबान है. अगर आप मसालों की खेती करते हैं. तो आपको अधिकतम पांच एकड़ तक 15000 रुपये से लेकर 30000 रुपये प्रति एकड़ तक की आर्थिक सहायता मिल जाती है. वहीं दूसरी तरफ फूलों की खेती के लिए 8000 रुपये से लेकर 40000 रुपये प्रति एकड़ तक का प्रावधान किया गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;जबकि खुशबूदार पौधों की खेती पर सीधे तौर पर 8000 रुपये प्रति एकड़ की दर से अनुदान दिया जा रहा है. इन सभी कैटेगरी में किसान अधिकतम पांच एकड़ तक की सीमा के भीतर आवेदन करके इस योजना का पूरा लाभ उठा सकते हैं और अपनी खेती से होने वाली कमाई को बढ़ा सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/6d3e3fdd97698652f3111194355d0e021790706490491907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/pm-kisan-yojana-next-instalment-cam-be-released-on-this-days-know-the-update-3195276&quot;&gt;किसानों को मालामाल बनाने वाली है सरकार, इस दिन खाते में आएंगे किसान निधि के पैसे&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;योजना का लाभ लेने के लिए क्या करना होगा?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;योजना का लाभ लेने के लिए किसान का मेरी फसल-मेरा ब्योरा और हॉर्टनेट, यानी हरियाणा के बागवानी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है. आवेदन के समय अपनी जानकारी, परिवार पहचान-पत्र और बैंक खाते की सही जानकारी तैयार रखें. बैंक डिटेल्स में अकाउंट नंबर, बैंक का नाम, शाखा और IFSC कोड देना होगा. अनुसूचित वर्ग के किसान से जरूरत पड़ने पर जाति प्रमाण-पत्र भी मांगा जा सकता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;आवेदन से पहले पोर्टल पर अपनी जमीन और फसल की जानकारी मिलान कर लें. जिससे रिकॉर्ड में गलती से प्रोसेस न अटके. अनुदान मंजूर होने पर राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेजी जाएगी. फसलवार नियम और आवेदन की स्थिति जानने के लिए जिले के उद्यान अधिकारी से संपर्क करें या विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-180-2021 पर पूछें. विभाग की वेबसाइट hortharyana.gov.in पर भी जानकारी मौजूद है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/garlic-cultivation-how-much-money-you-can-earn-after-deducting-the-cost-from-one-acre-3195458&quot;&gt;लहसुन की खेती का पूरा हिसाब-किताब, लागत निकाल कर इतनी होगी बचत&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/30/5496c0ec46586586e33d5db0dad199d71790706710795907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[घर में कैसे उगाएं पान का पत्ता? इन तरीकों से महक जाएगा घर]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/how-to-grow-betel-leaf-at-home-easy-and-effective-tips-take-care-soil-3195505</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/how-to-grow-betel-leaf-at-home-easy-and-effective-tips-take-care-soil-3195505#respond</comments><pubDate>Tue, 29 Sep 2026 21:29:33 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मनस्वी चौहान ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/how-to-grow-betel-leaf-at-home-easy-and-effective-tips-take-care-soil-3195505</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पान का पत्ता भारतीय घरों में सिर्फ खाने और पूजा-पाठ के लिए ही इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि इसका पौधा घर की हरियाली भी बढ़ाने में मदद करता है. पान की बेल देखने में बेहद सुंदर होती है और इसके हरे पत्ते घर के वातावरण को भी ताजगी से भर देते हैं. वहीं इसकी महक भी घर की हवा को महका देती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;ऐसे में अगर आप भी घर में पान का पौधा उगाना चाहते हैं तो कुछ आसान तरीकों को अपनाकर इसे गमले में आसानी से तैयार कर सकते हैं. जानें पान का पत्ता उगाने के लिए सही मिट्टी, सिंचाई, नमी और देखभाल के बारे में.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कटिंग से लगाएं पान का पौधा&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;घर में पान उगाने का सबसे आसान तरीका इसकी स्वस्थ बेल की कटिंग लगाना. इसके लिए ऐसी पान की बेल चुनें जिसमें कम से कम 2-3 गांठें हों. कटिंग को सीधे मिट्टी में लगाने के बजाय पहले थोड़े पानी में रखकर जड़ें विकसित करना बेहतर होता है. जब बेल में छोटी जड़ें दिखाई देने लगें, तब यह गमले में लगाने के लिए तैयार हो जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कैसी होनी चाहिए मिट्टी?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पान की बेल को ऐसी मिट्टी पसंद आती है जिसमें पानी जमा न हो और नमी बनी रहे. इसके लिए सामान्य बगीचे की मिट्टी में वर्मीकम्पोस्ट या अच्छी तरह तैयार जैविक खाद और थोड़ी रेत मिलाने पर बेल के विकास में मदद मिलती है. वहीं ऐसे गमले का चुनाव करना बेहतर होगा जिसमें नीचे जल निकासी के लिए छेद जरूर हो. बहुत ज्यादा पानी जमा रहने से जड़ें खराब हो सकती हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;धूप का रखें ध्यान&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पान का पौधा तेज और सीधी धूप में रखने के बजाय ऐसी जगह रखना बेहतर होता है जहां उसे हल्की रोशनी मिले. सुबह की हल्की धूप इसके लिए उपयोगी होती है, लेकिन दोपहर की तेज धूप से बेल की नाजुक पत्तियां जल सकती हैं. इसे बालकनी, खिड़की के पास या ऐसी जगह रखना उचित होता है जहां कम धूप आती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/radish-farming-sow-in-september-to-get-yield-in-october-know-the-details-3195364&quot;&gt;&lt;strong&gt;कम लागत में अक्टूबर में उगाएं शानदार मूली, जान लें तरीका&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मिट्टी में नमी बनाए रखें&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पान की बेल को नमी पसंद होती है, इसलिए मिट्टी को पूरी तरह सूखने न दें. हालांकि हर दिन जरूरत से ज्यादा पानी देना भी सही नहीं है. जब ऊपर की मिट्टी हल्की सूखी महसूस हो, तभी पानी देना सही होता है. गर्म &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में पौधे की नमी पर थोड़ा अधिक ध्यान देना देने की जरुरत पड़ती है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बेल को दें सहारा&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पान एक बेल वाला पौधा है, इसलिए इसके बढ़ने के लिए सहारे की जरूरत होती है. गमले में लकड़ी की पतली डंडी या जाली लगाने से बेल को सहारा मिल जाता है. बेल को धीरे-धीरे इस सहारे पर चढ़ाने से पौधा सुंदर आकार में विकसित होता है और आसपास की जगह भी हरी-भरी नजर आती है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इन बातों का रखें खास ध्यान&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पान के पौधे को ठंडी हवा, बहुत तेज धूप और पानी के जमाव से बचाना जरूरी है. समय-समय पर सूखे या खराब पत्तों को हटाना से और पत्तियों के नीचे की तरफ कीटों की जांच करने से बेल प्रभावित नहीं होती और उसके विकास में परेशानी नहीं होती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/sunn-hemp-cultivation-tips-its-flowers-are-used-to-make-a-vegetable-dish-and-rope-3195227&quot;&gt;&lt;strong&gt;कैसे होती है सनई की खेती, इसके फूल से बनती है सब्जी और रस्सी&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/f523d1f51877a9f515b5c812022ac51117906887668561473_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[कैसे पाल सकते हैं लैंबोर्गिनी ऑफ चिकन्स, कितने रुपये करने होंगे खर्च?]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/how-to-breed-ayam-cemani-lamborghini-of-chickens-cost-profit-black-chicken-farming-3195345</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/how-to-breed-ayam-cemani-lamborghini-of-chickens-cost-profit-black-chicken-farming-3195345#respond</comments><pubDate>Tue, 29 Sep 2026 19:19:42 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मनस्वी चौहान ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/how-to-breed-ayam-cemani-lamborghini-of-chickens-cost-profit-black-chicken-farming-3195345</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जब बात दुनिया की सबसे महंगी और आलीशान चीजों की होती है, तो हमारे दिमाग में चमचमाती गाड़ियां या लग्जरी घड़ियां आती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पक्षियों की दुनिया में भी एक ऐसी मुर्गी है, जिसे लैंबोर्गिनी ऑफ चिकन्स कहा जाता है? इंडोनेशिया मूल की इस बेहद दुर्लभ और अनोखी मुर्गी का असली नाम अयाम सेमानी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अपनी अद्भुत खूबियों और शाही लुक के कारण यह मुर्गी दुनिया भर के अमीरों और बड़े पोल्ट्री फार्मर्स के बीच स्टेटस सिंबल बन चुकी है. भारत में भी अब लोग पारंपरिक खेती और पोल्ट्री बिजनेस से हटकर अयाम सेमानी के पालन में काफी दिलचस्पी दिखा रहे हैं. अगर आप भी एक नए और जबरदस्त मुनाफे वाले बिजनेस की तलाश में हैं, तो यह आपके लिए एक बड़ा मौका साबित हो सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्यों कहा जाता है इसे लैंबोर्गिनी ऑफ चिकन्स?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अयानी सेमानी कोई आम मुर्गी नहीं है, यह पूरी की पूरी गहरे काले रंग की होती है. फाइब्रोमेलानोसिस नाम की एक दुर्लभ जेनेटिक स्थिति के कारण इस मुर्गी के पंख, चोंच, पैर, जीभ और यहां तक की इसका मांस, हड्डियां और अंदरूनी अंग भी पूरी तरह काले होते हैं. सिर्फ इसका खून ही सामान्य लाल रंग का होता है. अपने इसी चमकीले काले और अनोखे रूप की वजह से इसे मुर्गियों की दुनिया की लैंबोर्गिनी कहा जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कैसे कर सकते हैं अयाम सेमानी का पालन?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अयाम सेमानी मुर्गियों का पालन करने के लिए आपको बहुत ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ता, लेकिन कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सबसे पहले इनके लिए एक सुरक्षित और हवादार बाड़ा तैयार करना होता है, ताकि इन्हें कड़कती ठंड और तेज धूप से बचाया जा सके.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह नस्ल काफी तेजी से बढ़ती है, इसलिए इन्हें आम मुर्गियों के मुकाबले ज्यादा प्रोटिन वाला दाना दिया जाता है. इनके आहार में किड़े-मकोड़े मक्का और विशेष पोल्ट्री फिड शामिल होती है. इसके अलावा, भारतीय &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; के अनुकुल ढालने के लिए शुरूआत में चूजों को सही समय पर टिके लगवाना बेहद जरूरी है ताकि वे बीमारियों की चपेट में न आए.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/bharat-vistaar-scheme-digital-kisan-id-card-helpline-number-155261-agriculture-ai-portal-features-3194800&quot;&gt;क्या है किसानों की मददगार भारत विस्तार योजना? जान लें&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कितना आता है खर्च और क्या है कीमत?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अंतराष्ट्रिय बाजार में शुद्ध नस्ल के एक अयाम सेमानी चिकन की कीमत 2,500 डॉलर से 6000 डॉलर लगभग 2 लाख से 6 लाख रुपये से अधिक तक हो सकती है. वहीं भारत में इसके चूजे और अंडे थोड़े किफायती दामों पर भी मिल जाते हैं. भारत में इस बिजनेस को छोटे स्तर पर शुरू करने के लिए आपको शुरूआती तौर पर चूजे, दाना और बाड़ा तैयार करने में 1 लाख रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक का खर्च आ सकता है. बाजार में इसके एक अंडे की कीमत 3,000 से 7,000 रुपये तक हो सकती है, जो इसे बेहद मुनाफेदार सौदा बनाती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/punganur-cow-price-milk-capacity-special-features-breed-3195164&quot;&gt;&lt;strong&gt;कितने की आती है पुंगनूर गाय, जानें एक दिन में कितने लीटर देती है दूध?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/712c700da750e5ecf44caf2fad29f05817906751411261474_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[लहसुन की खेती का पूरा हिसाब-किताब, लागत निकाल कर इतनी होगी बचत]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/garlic-cultivation-how-much-money-you-can-earn-after-deducting-the-cost-from-one-acre-3195458</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/garlic-cultivation-how-much-money-you-can-earn-after-deducting-the-cost-from-one-acre-3195458#respond</comments><pubDate>Tue, 29 Sep 2026 18:33:17 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/garlic-cultivation-how-much-money-you-can-earn-after-deducting-the-cost-from-one-acre-3195458</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बाजार में मसालों के दाम आसमान छू रहे हैं और ऐसे में अगर मसाले की फसल उगाई जाए तो बढ़िया मुनाफा कमाया जा। सकता है. पिछले कुछ समय से खेती का तरीका पूरी तरह बदल चुका है और किसान उन चीजों पर फोकस कर रहे हैं जो कम दिनों में मोटा पैसा देकर जाएं. मसालों की कैटेगरी में लहसुन एक ऐसा नाम है जिसकी डिमांड हर घर में रोजाना बनी रहती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर आपके पास एक एकड़ जमीन खाली पड़ी है और आप समझ नहीं पा रहे कि उसमें क्या उगाएं तो लहसुन की खेती आपके लिए एक फायदे का सौदा साबित हो सकती है. कैसे करनी चाहिए इसकी खेती और खेती की शुरूआत करने से लेकर फसल कटने तक में कितनी लागत आती है. और पूरी लागत निकालने के बाद कितना मुनाफा बचता है. जान लीजिए इसका पूरा हिसाब-किताब.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;एक एकड़ में लहसुन की खेती का तरीका&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस फसल से बढ़िया पैदावार निकालने के लिए जमीन की तैयारी सबसे पहला और जरूरी काम होता है. एक एकड़ खेत के लिए आपको करीब 50 से 60 किलो अच्छी क्वालिटी के बीज की जरूरत पड़ेगी. इसलिए बीज हमेशा किसी भरोसेमंद जगह से ही लें. खेत में ट्रैक्टर चलाकर मिट्टी को एकदम भुरभुरी बना लें और पुरानी गोबर की खाद मिलाकर जमीन को पूरी तरह उपजाऊ कर दें. इसके बाद हल्की नालियां या क्यारियां बनाकर कतारों में बीजों की बुआई शुरू करें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जहां पौधों के बीच की दूरी सही रखनी जरूरी है. अक्टूबर और नवंबर का समय इसके लिए सबसे सही माना जाता है क्योंकि हल्की ठंड पौधों को तेजी से बढ़ने में मदद करती है. समय-समय पर हल्की नमी बनाए रखना और जरूरत पड़ने पर खरपतवार साफ कर देने चाहिए. जिससे पौधे मजबूत होकर बाहर आते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;एक एकड़ लहसुन की खेती में कितनी लागत?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खेती करने से पहले बहुत से किसान यह जानना चाहते हैं कि खेती में लागत कितनी आ सकती है. जिससे वह अपना बजट बनाकर चल सकें. तो आपको बता दें&amp;nbsp;एक एकड़ में लहसुन लगाने के लिए आपको बीज खरीदने, खेत की जुताई करवाने, खाद डालने और लेबर का खर्चा जोड़कर चलना होगा.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर आज के रेट्स के हिसाब से जोड़ा जाए तो अच्छी क्वालिटी के बीज खरीदने में ही लगभग 15 से 20 हजार रुपए खर्च हो जाते हैं. इसके अलावा जुताई, दवाइयां और बाकी तमाम जरूरतों का खर्च मिलाकर कुल लागत करीब 35 से 45 हजार रुपए के आसपास पहुंच जाती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह बजट थोड़ा बहुत आपके इलाके के हिसाब से ऊपर-नीचे हो सकता है. लेकिन अगर आप खुद थोड़ी मेहनत संभाल लेते हैं और लेबर का खर्चा बचा लेते हैं. तो यह लागत और भी ज्यादा कम हो सकती है. जिससे आपका मुनाफा बढ़ जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/50a01e228bb36ea726d1e1669c51c11c1790687130863907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/radish-farming-sow-in-september-to-get-yield-in-october-know-the-details-3195364&quot;&gt;कम लागत में अक्टूबर में उगाएं शानदार मूली, जान लें तरीका&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;लागत निकालकर कितना होगा मुनाफा?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब लहसुन की खेती करने वाले हर किसान के मन में आने वाले सवाल की बात करते हैं यानी लागत के निकालने के बाद मुनाफा कितना होता है. इस बारे में बात करें तो&amp;nbsp;अगर आपकी फसल की देखभाल सही तरीके से हुई है. तो एक एकड़ खेत से आराम से 40 से 50 क्विंटल तक लहसुन निकल जाता है. मंडी में अगर इसका एवरेज भाव 80 से 100 रुपए किलो भी मिल गया. तो आपकी कुल कमाई सीधे 4 से 5 लाख रुपए तक पहुंच जाएगी.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अब इसमें से अपनी शुरुआती 45 हजार रुपए की लागत को बाहर कर दें तब भी आपके पास करीब 3.5 से 4 लाख रुपए का मुनापा सीधे आपकी जेब में आ जाएगा. इतने कम महीनों में किसी और फसल से इतना भारी रिटर्न मिलना अपने आप में बहुत बड़ी बात है और यही वजह है कि आजकल किसान इसे लहुसन की खेती को अपना रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/47062f2c206bbea621d46d477d6bcf601790686975570907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/pm-kisan-yojana-next-instalment-cam-be-released-on-this-days-know-the-update-3195276&quot;&gt;किसानों को मालामाल बनाने वाली है सरकार, इस दिन खाते में आएंगे किसान निधि के पैसे&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/51559a34d475e28d64fc469b92974eba1790686174871907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[कम लागत में अक्टूबर में उगाएं शानदार मूली, जान लें तरीका]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/radish-farming-sow-in-september-to-get-yield-in-october-know-the-details-3195364</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/radish-farming-sow-in-september-to-get-yield-in-october-know-the-details-3195364#respond</comments><pubDate>Tue, 29 Sep 2026 17:09:20 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/radish-farming-sow-in-september-to-get-yield-in-october-know-the-details-3195364</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खेत में अगर सही समय पर सही फसल लगाई जाए तो कम मेहनत और कम खर्चे में भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. इन दिनों मौसम तेजी से बदल रहा है और गर्माहट कम होते ही सर्दियों वाली सब्जियों की डिमांड मार्केट में तेजी से बढ़ने लगी है. अगर आप भी कम लागत में तगड़ी कमाई का प्लान बना रहे हैं. तो अक्टूबर का महीना आपके लिए फायेदमंद साबित नहीं हो सकता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस दौरान खेतों की सही तैयारी और सही वैरायटी लगाकर आप बंपर पैदावार ले सकते हैं. बाजार में ताजी मूली की मांग हमेशा बनी रहती है और अगर ठंड की शुरुआत में ही आपकी फसल तैयार होकर मंडी पहुंच गई. तो मुनाफा दोगुना हो जाता है. चलिए आपको बताते हैं कि इस सीजन में मूली की खेती कैसे की जाती है और किन बातों का ध्यान रखकर आप अपनी इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अक्टूबर में ही क्यों करनी चाहिए मूली की बुआई?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अक्टूबर का महीना खेती के लिहाज से बहुत ही फायदेमंद माना जाता है. इस समय न तो चिलचिलाती धूप होती है और न ही ज्यादा ठंड, बल्कि हल्की गुलाबी ठंड की शुरुआत होती है. जो मूली की फसल की ग्रोथ के लिए एकदम परफेक्ट होती है. जानकारों के मुताबिक इस दौरान मिट्टी में नमी का सही लेवल बना रहता है जिससे बीजों का जर्मिनेशन यानी अंकुरण बहुत ही शानदार तरीके से होता है. अगर आप इस महीने में बुआई करते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;तो पौधे बहुत तेजी से बढ़ते हैं और उनकी जड़ें भी काफी मजबूत और रसीली बनती हैं. इसके अलावा इस &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में कीड़े और फंगस का अटैक भी बहुत कम देखने को मिलता है. जिससे फसल को बचाने में ज्यादा केमिकल या दवाइयों पर फालतू खर्च नहीं करना पड़ता है. कुल मिलाकर कम लागत में बंपर पैदावार पाने के लिए अक्टूबर का यह समय किसानों के लिए सबसे बढ़िया मौका लेकर आता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/440ffa692e948ab72bb38773c18424c21790681171412907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;खेत की सही तैयारी और उन्नत बीजों का चुनाव&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;किसी भी फसल की सफलता इस बात पर पूरी तरह निर्भर करती है कि उसकी शुरुआत जमीन पर कैसे हुई है. मूली की खेती के लिए सबसे पहले खेत की मिट्टी को ट्रैक्टर और कल्टीवेटर से अच्छी तरह भुरभुरी बनाना बहुत जरूरी है. इसके लिए खेत की दो-तीन बार अच्छी गहरी जुताई करके पाटा लगा लें जिससे मिट्टी बिल्कुल समतल हो जाए और जलभराव की समस्या कभी न आए. मिट्टी में पुरानी गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाना बेहद फायदेमंद होता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्योंकि इससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और मूली की लंबाई व मोटाई बहुत शानदार होती है. बीज हमेशा मार्केट से प्रमाणित और उन्नत किस्म के ही खरीदें जो कम समय में ज्यादा पैदावार दें. बुआई से पहले बीजों का ट्रीटमेंट जरूर कर लें जिससे फंगस जैसी बीमारियां आसपास भी न भटके. कतार से कतार की सही दूरी तय करके बुआई करने से निराई-गुड़ाई और सिंचाई करने में काफी आसानी हो जाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/sunn-hemp-cultivation-tips-its-flowers-are-used-to-make-a-vegetable-dish-and-rope-3195227&quot;&gt;कैसे होती है सनई की खेती, इसके फूल से बनती है सब्जी और रस्सी&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन बातों का रखें ध्यान&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बुआई के बाद मूली की फसल को समय पर पानी देना बहुत ज्यादा जरूरी होता है. हालांकि इस बात का हमेशा खास ख्याल रखें कि खेत में पानी बिल्कुल भी रुकना नहीं चाहिए. वरना जड़ें अंदर ही अंदर सड़ सकती हैं. हल्की और नियमित सिंचाई करने से मूली एकदम सॉफ्ट, सफेद और स्वादिष्ट बनती है. समय-समय पर खेतों से खरपतवारों को बाहर निकालते रहें जिससे पौधों को मिट्टी से पूरा पोषण मिल सके.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;बुआई के महज 45 से 50 दिनों के भीतर ही मूली की फसल जमीन से खुदाई के लिए बिल्कुल तैयार हो जाती है. मंडी में इसकी बंपर डिमांड होने के चलते किसानों को इसके दाम भी बहुत शानदार मिल जाते हैं. कम लागत, कम समय और बेहतरीन रिटर्न के चलते यह फसल छोटे किसानों के लिए मालामाल बनने का एक बहुत ही शानदार जरिया साबित हो रही है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;br /&gt;&lt;img src=&quot;https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/582b4c67a6b2e98e2099de3e4ee16d511790681936014907_original.jpg&quot; /&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/pm-kisan-yojana-next-instalment-cam-be-released-on-this-days-know-the-update-3195276&quot;&gt;किसानों को मालामाल बनाने वाली है सरकार, इस दिन खाते में आएंगे किसान निधि के पैसे&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/00396e310b400c1b68c5d0a7c34742141790681021414907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[गन्ने में लाल सड़न रोग, जानें कैसे बचाएं अपनी फसल]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/red-rot-disease-in-sugercane-symptomps-treatment-prevention-from-fungal-infection-3195195</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/red-rot-disease-in-sugercane-symptomps-treatment-prevention-from-fungal-infection-3195195#respond</comments><pubDate>Tue, 29 Sep 2026 15:18:38 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मनस्वी चौहान ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/red-rot-disease-in-sugercane-symptomps-treatment-prevention-from-fungal-infection-3195195</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;गन्ने की खेती भारत में विशेष रुप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में होती है. बारिश के दिनों में गन्ने की फसल में लाल सड़न रोग मुख्य रुप से देखा जाता है. यह गन्ने में होने वाली एक बेहद खतरनाक फंगल बीमारी है. जिसे गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है. यह कोलेलेटोट्रैचिम फाल्केटम नामक फफूंद के कारण होता है. यह रोग गन्नों में तेजी से फैलता है. सही समय पर उपचार न मिलने से यह पूरी फसल को बर्बाद कर सकता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यदि अगर यह रोग पड़ोस के खेत में है, तो यह पानी के बहाव से आपके खेत में आकर आपकी फसल को भी खराब कर सकता है. ऐसे में आइए जानतें है लाल सड़न रोग बीमारी की सही पहचान, लक्षण और उपचार के बारे में जरुरी जानकारी.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;क्या होता है लाल सड़न रोग?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;लाल सड़न रोग गन्ने में फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो पूरी फसल को बर्बाद कर सकती है. यह रोग इतनी तेजी से फसल में फैलता है कि सही समय पर पहचान न करने से पूरी फसल इससे प्रभावित हो जाती है. यह गन्नों में होने वाला एक प्रकार का फंगल इन्फेक्शन है, जो कोलेलेटोट्रैचिम फाल्केटम की वजह से होता है. इसमें गन्ने के अंदर का गुदा लाल होने लगता है और उसमें से बदबू आने लगती है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कैसे पहचाने इस रोग को?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;लाल सड़न रोग को शुरुआत में पहचान ने से गन्ने की फसल को बचाया जा सकता है. गन्नों में लाल सड़न रोग लगने से गन्ने की तीसरी-चौथी पत्तियां पीली पड़ने लगती है और पूरा गन्ना सूखने लगता है. रोग से प्रभावित होने पर गन्ने में लाल फफूंद दिखाई देती है, जिसमें बीच-बीच में सफेद धब्बे नजर आते है. वहीं गन्नों में से शराब जैसी बदबू आने लगती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/bihar-mukhya-mantri-godhan-vikas-loan-yojana-interest-free-loans-to-farmers-know-how-to-avail-the-benefits-3194330&quot;&gt;&lt;strong&gt;किसानों को बिना ब्याज के लोन देगी बिहार सरकार, जानें कैसे उठाएं लाभ&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कैसे रोकें इस रोग को?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह बीमारी एक फंगल इन्फेक्शन है, जिसका कोई इलाज नहीं है. हालांकि सही समय पर कुछ सावधानी और बचाव कर के आप इस रोग को फैलने से रोक सकते हैं. अपनी फसल के गन्नों को इस बीमारी से बचाने के लिए गन्ने की बुवाई के समय ही स्वस्थ गन्ने के तने का चयन करें. वहीं आप गन्नों की बुवाई से पहले ही उन पर फंगल इन्फेक्शन की दवा का उपयोग कर सकते हैं. यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि किसी संक्रमित खेत का पानी आपके खेत में न आएं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मिट्टी की करें जुताई&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;लाल सड़न रोग से बचने के लिए गन्ने की बुवाई करने से पहले खेत की मिट्टी की अच्छी तरह जुताई करें. खासकर गर्मी के &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में ऐसा करना बेहद फायदेमंद होती है. इसकी यह वजह है कि मिट्टी की जुताई करने से उसमें पल रहे जीवाणु ऊपर आ जाते हैं और तेज धूप की वजह से नष्ट हो जाते हैं. &amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;फसल चक्र को अपनाएं&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक ही खेत में बार-बार गन्ने की फसल उगाने की बजाय दूसरी फसल को भी उगाएं. ऐसा करने से मिट्टी में रहने वाले जीवाणु को पौषक तत्व नहीं मिल पाते और वे जल्दी मर जाते हैं. वहीं दूसरे फसल की तैयारी करने वाले खाद के उपयोग से वे जीवित नहीं रह पाते है. जिससे फसल प्रभावित होने का खतरा कम हो जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/pm-kusum-solar-pump-subsidy-farmer-share-rules-3194428&quot;&gt;&lt;strong&gt;सोलर पंप लगाने पर सरकार से कितनी मदद मिलती है? जानें योजना के नियम&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/08b4de454e9b7500ed2ddb7a7bb2b15a17906616740041473_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[किसानों को मालामाल बनाने वाली है सरकार, इस दिन खाते में आएंगे किसान निधि के पैसे]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/pm-kisan-yojana-next-instalment-cam-be-released-on-this-days-know-the-update-3195276</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/pm-kisan-yojana-next-instalment-cam-be-released-on-this-days-know-the-update-3195276#respond</comments><pubDate>Tue, 29 Sep 2026 14:50:52 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/pm-kisan-yojana-next-instalment-cam-be-released-on-this-days-know-the-update-3195276</guid><description><![CDATA[किसानों को मालामाल बनाने वाली है सरकार, इस दिन खाते में आएंगे किसान निधि के पैसे]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/300fd147bb41795a16bd98ae8906de391790673561389907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[कितने की आती है पुंगनूर गाय, जानें एक दिन में कितने लीटर देती है दूध?]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/punganur-cow-price-milk-capacity-special-features-breed-3195164</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/punganur-cow-price-milk-capacity-special-features-breed-3195164#respond</comments><pubDate>Tue, 29 Sep 2026 13:10:12 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मनस्वी चौहान ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/punganur-cow-price-milk-capacity-special-features-breed-3195164</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;भारत में गायों की कई देसी नस्लें हैं, लेकिन पुंगनूर गाय अपनी खास पहचान के कारण काफी जानी जाती है. आंध्र प्रदेश के चित्तूर क्षेत्र के पुंगनूर इलाके से जुड़ी यह नस्ल छोटे कद वाली मवेशी नस्लों में शामिल है. कम शरीर आकार के बावजूद पुंगनूर गाय अधिक फैट वाला दूध देने वाली नस्ल मानी जाती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके संरक्षण को लेकर भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. वर्ष 2026 में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के पशु नस्ल संरक्षण पुरस्कारों में पुंगनूर मवेशी के संरक्षण के लिए भी सम्मान दिया गया. ऐसे में आइए जानते हैं पुंगनूर गाय की खासियत, दूध देने की क्षमता और कुछ दिलचस्प बातें&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पुंगनूर गाय की क्या खासियत है?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पुंगनूर गाय का शरीर छोटा और कॉम्पैक्ट होता है. इसका रंग सफेद, ग्रे, हल्का भूरा से लेकर गहरे भूरे या लाल रंग तक होता है. कई पशुओं के शरीर पर दूसरे रंग के धब्बे भी देखने को मिलते हैं. पुंगनूर गाय के पैर छोटे, सींग छोटे और माथा चौड़ा होता है. इस नस्ल की एक खासियत यह भी बताई जाती है कि यह कम संसाधनों में भी पाली जा सकती है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;एक दिन में कितना दूध देती है?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आंध्र प्रदेश सरकार के पशुपालन विभाग के अनुसार, यह गाय एक लैक्टेशन में करीब 1,100 किलो दूध तक दे सकती है और इसका औसत दैनिक उत्पादन लगभग 3.5 लीटर बताया गया है. इसमें दूध की फैट मात्रा करीब 5.4 परसेंट बताई गई है. ऐसे में सामान्य तौर पर पुंगनूर गाय से करीब 3 लीटर या उससे कुछ अधिक दूध प्रतिदिन मिलने की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन हर गाय का उत्पादन एक सा नहीं होता.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/dairy-farming-gir-cow-is-the-best-for-it-even-better-than-some-foreign-breeds-3194456&quot;&gt;&lt;strong&gt;डेयरी फार्मिंग के लिए बेस्ट है यह देसी गाय, विदेशी नस्ल भी इसके आगे फेल&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दूध में कितना फैट होता है?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पुंगनूर गाय के दूध में फैट की मात्रा सामान्य तौर पर अच्छी मानी जाती है. नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के अनुसार पुंगनूर दूध का औसत फैट करीब 5 परसेंट दर्ज किया गया है. यही वजह है कि यह नस्ल दूध की गुणवत्ता के लिहाज से पशुपालकों के लिए आय का एक अच्छा स्त्रोत मानी जाती है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;कितने कीमत है पुंगनूर गाय की?&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;पुंगनूर गाय की कोई एक तय बाजार कीमत नहीं है. इसकी कीमत पशु की उम्र, दूध उत्पादन, स्वास्थ्य, नस्ल की शुद्धता, गर्भावस्था और वंश जैसी कई बातों पर निर्भर करती है. सितंबर 2026 में आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी क्षेत्र की ऑनलाइन पशु बिक्री लिस्टिंग में 5 साल की पुंगनूर गाय की कीमत 98,000 रुपये और 6 साल की गाय की कीमत 1 लाख रुपये बताई गई.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/grow-fresh-green-chemical-free-gourd-on-the-roof-of-your-house-3194514&quot;&gt;&lt;strong&gt;घर की छत पर उगा सकते हैं ताजी हरी लौकी, केमिकल का नहीं रहेगा डर&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/09/29/ddb3f71ac6574662888f77f90fd60a7e17906585108811473_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>