<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/"><channel><title>अपने किचन गार्डन में कैसे उगाएं इमली का पौधा? जान लें तरीका</title><atom:link href="https://www.abplive.com/agriculture/feed" rel="self" type="application/rss+xml"/><link>https://www.abplive.com/</link><description/><lastBuildDate>Fri, 19 Jun 2026 15:33:53 +0530</lastBuildDate><language>en-US</language><sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod><sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency><generator>https://www.abplive.com</generator><item><title><![CDATA[कम लागत में लाखों का तगड़ा मुनाफा, सीजन से हटकर करें इस जादुई चीज की खेती]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/tomato-farming-earn-huge-profits-of-lakhs-at-low-cost-in-this-season-know-the-details-3147663</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/tomato-farming-earn-huge-profits-of-lakhs-at-low-cost-in-this-season-know-the-details-3147663#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:26:53 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/tomato-farming-earn-huge-profits-of-lakhs-at-low-cost-in-this-season-know-the-details-3147663</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Tomato Farming Tips:&lt;/strong&gt; खेती-किसानी में इस वक्त वही किसान सबसे ज्यादा पैसा कमा रहा है जो हटकर कुछ नया करने की सोच रखता है. पारंपरिक खेती में जब हर कोई एक ही सीजन में एक जैसी फसल उगाता है. तो मार्केट में सप्लाई बढ़ने से दाम अचानक गिर जाते हैं. ऐसे में किसान ऑफ-सीजन फार्मिंग यानी बिना मौसम की खेती का सहारा ले रहे हैं. इस समय बाजार में ऑफ-सीजन टमाटर की खेती खूब की जा रही है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;वैज्ञानिकों की तरफ से तैयार की गई टमाटर की खास वैरायटी आजकल किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं साबित हो रही है. इस वैरायटी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके फल लगभग बीज रहित यानी सीडलेस होते हैं और बिना मौसम के भी इसकी बंपर पैदावार होती है. अगर आप भी कम लागत में लाखों का मुनाफा कमाना चाहते हैं तो यह तरीका आपके लिए बेस्ट है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ऑफ-सीजन टमाटर की खेती क्यों बन रही है किसानों की पसंद?&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आम दिनों में जब टमाटर का सीजन होता है. तो किसानों को कई बार लागत निकालना भी मुश्किल हो जाता है. लेकिन जब आप सीजन से हटकर खासकर बरसात या तेज गर्मी के महीनों में टमाटर बाजार में लाते हैं. तो इसके दाम आसमान छू रहे होते हैं. इस नई तकनीक और वैरायटी की मदद से किसान भाई विपरीत &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में भी टमाटर की शानदार फसल ले पा रहे हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस ऑफ-सीजन टमाटर की मार्केट में डिमांड इतनी ज्यादा होती है कि व्यापारी सीधे खेत पर आकर मनमाने दामों में इसे खरीद लेते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि इस फसल को तैयार करने में साधारण खेती के मुकाबले बहुत ही कम लागत आती है जिससे किसानों का प्रॉफिट मार्जिन कई गुना बढ़ जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/farming-tips-sow-moringa-on-the-field-boundary-if-you-know-the-reason-you-too-will-adopt-this-method-3147484&quot;&gt;खेत की मेड़ पर मोरिंगा क्यों बो देते हैं किसान, कारण जान लेंगे तो आप भी अपनाएंगे ये तरीका&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कम पानी और कम देखरेख में बंपर पैदावार&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इस ऑफ-सीजन टमाटर की क्वालिटी बहुत अच्छी है तो इसमें मेंटेनेंस बहुत कम है. इस वैरायटी के पौधों में रोग-प्रतिरोधक क्षमता बहुत ज्यादा होती है. जिसकी वजह से इसमें कीड़े और बीमारियां लगने का खतरा न के बराबर रहता है. इससे किसानों का महंगे पेस्टिसाइड्स पर होने वाला एक्स्ट्रा खर्च पूरी तरह बच जाता है. इसके अलावा इसके फल काफी ठोस और कम बीज वाले होते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जिससे यह ट्रांसपोर्टेशन के दौरान जल्दी खराब या पिचकते नहीं हैं और लंबे समय तक एकदम फ्रेश बने रहते हैं. कम खाद-पानी के साथ भी यह फसल किसानों को इतनी भारी पैदावार देती है कि कम जमीन वाले छोटे किसान भी इससे लाखों रुपये का मुनाफा आसानी से कमा रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/farming-tips-why-do-elders-say-to-irrigate-only-on-moonlit-nights-know-what-effect-does-it-have-on-the-crop-3147576&quot;&gt;चांदनी रात में ही सिंचाई करने को क्यों कहते हैं बुजुर्ग, इसका फसल पर क्या पड़ता है असर?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/19/f375f60a9a30fb7787e445ed041e78fc1781862667291907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[चांदनी रात में ही सिंचाई करने को क्यों कहते हैं बुजुर्ग, इसका फसल पर क्या पड़ता है असर?]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/farming-tips-why-do-elders-say-to-irrigate-only-on-moonlit-nights-know-what-effect-does-it-have-on-the-crop-3147576</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/farming-tips-why-do-elders-say-to-irrigate-only-on-moonlit-nights-know-what-effect-does-it-have-on-the-crop-3147576#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 13:48:33 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/farming-tips-why-do-elders-say-to-irrigate-only-on-moonlit-nights-know-what-effect-does-it-have-on-the-crop-3147576</guid><description><![CDATA[चांदनी रात में ही सिंचाई करने को क्यों कहते हैं बुजुर्ग, इसका फसल पर क्या पड़ता है असर?]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/19/c4275c39f619478c86c9bd614d3a93e11781857078238907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[खेत में अचानक दिखें ये संकेत, समझ लेना लगने वाले हैं दीमक]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/farming-news-if-you-suddenly-see-these-signs-in-your-field-it-means-termites-are-about-to-start-know-the-details-3147558</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/farming-news-if-you-suddenly-see-these-signs-in-your-field-it-means-termites-are-about-to-start-know-the-details-3147558#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:48:33 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/farming-news-if-you-suddenly-see-these-signs-in-your-field-it-means-termites-are-about-to-start-know-the-details-3147558</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Termites In Farm: &lt;/strong&gt;खेती-किसानी में मेहनत जितनी ज्यादा होती है उतनी ही नजरें भी चौकन्नी रखनी पड़ती हैं. कई बार हरी-भरी फसल में कोई बीमारी या कीड़ा धीरे घुस जाता है और हमें भनक तक नहीं लगती. ऐसा ही एक खतरनाक दुश्मन है दीमक जिसे साइलेंट किलर कहा जाए तो गलत नहीं होगा. यह जमीन के अंदर ही अंदर पौधों की जड़ों को खोखला करना शुरू कर देती है. जब तक किसान भाई को ऊपर से नुकसान दिखाई देता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और फसल पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर पहुंच जाती है. लेकिन प्रकृति का नियम है कि मुसीबत आने से पहले कुछ न कुछ इशारे जरूर मिलते हैं. अगर आप भी अपने खेत में लगातार चक्कर काट रहे हैं और आपको कुछ अजीब बदलाव नजर आने लगें तो अलर्ट हो जाइए. चलिए आपको बताते हैं उन खास संकेतों के बारे में जो सीधे इशारा करते हैं कि आपके खेत में दीमक का हमला शुरू हो चुका है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मिट्टी का सूखापन और पौधों का अचानक पीला पड़ना&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दीमक लगने का सबसे पहला और बड़ा संकेत खेत की मिट्टी और पौधों की रंगत में देखने को मिलता है. अगर आपको किसी हिस्से के पौधे बिना किसी वजह के अचानक पीले पड़ने लगें या उनकी ग्रोथ एकदम रुक जाए तो समझ लें कि नीचे कुछ गड़बड़ है. दीमक सीधे पौधों की जड़ों पर वार करती है. जिससे पौधों को जमीन से मिलने वाला पानी और जरूरी पोषक तत्व बंद हो जाते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;इसके अलावा अगर बात की जाए तो खेत की मिट्टी में जरूरत से ज्यादा सूखापन दिखने लगे, दरारें पड़ने लगें या किसी खास जगह पर पौधे अचानक मुरझाकर झुकने लगें. तो यह दीमक के एक्टिव होने का पक्का सबूत है. ऐसे में प्रभावित पौधे को उखाड़कर देखने पर उसकी जड़ें कटी हुई या खोखली मिलती हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/farming-tips-sow-moringa-on-the-field-boundary-if-you-know-the-reason-you-too-will-adopt-this-method-3147484&quot;&gt;खेत की मेड़ पर मोरिंगा क्यों बो देते हैं किसान, कारण जान लेंगे तो आप भी अपनाएंगे ये तरीका&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;खेत में मिट्टी की छोटी ढेरियां और सुरंगें नजर आना&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दूसरा संकेत है खेत की मेड़ या पौधों के आसपास मिट्टी के अजीबोगरीब स्ट्रक्चर दिखाई देना. दीमक अंधेरे और नमी में रहना पसंद करती है, इसलिए वे जमीन के ऊपर चलने के लिए मिट्टी की बारीक सुरंगे या छोटी-छोटी ढेरिया बना लेती हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;अगर आपको पेड़ों के तनों पर,सूखी लकड़ियों पर या फसलों के बीच में मिट्टी की बारीक लाइनें या नालियां बनी हुई दिखें तो तुरंत समझ जाइए कि दीमक ने खेल कर दिया है. इसके साथ ही खेत में पड़े पुराने गोबर, सूखी घास या फसलों के बचे टुकड़ों के नीचे अगर सफेद रंग के छोटे-छोटे कीड़े रेंगते हुए मिलें तो समझ लें कि अब इलाज शुरू करने का समय आ गया है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/how-to-grow-tea-plant-at-home-kitchen-garden-3147354&quot;&gt;Tea Farming At Home: अपने किचन गार्डन में कैसे कर सकते हैं चाय की खेती, जानें इसके लिए क्या-क्या जरूरी?&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/19/2179c7a7960b3511253c9d62ebc7584e1781853272780907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[उल्लू को क्यों कहा जाता है किसानों का दोस्त, कैसे करते हैं ये फसल की सिक्योरिटी?]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/farming-news-owl-called-the-friend-of-farmers-know-how-does-it-protect-the-crops-3147506</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/farming-news-owl-called-the-friend-of-farmers-know-how-does-it-protect-the-crops-3147506#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 12:04:58 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/farming-news-owl-called-the-friend-of-farmers-know-how-does-it-protect-the-crops-3147506</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Owl Use In Farming:&lt;/strong&gt;भारतीय गांवों और खेतों में अक्सर रात के सन्नाटे में उल्लू की आवाज सुनाई दे जाती है. भले ही पुराने जमाने के लोग इसे अशुभ मानते रहे हों. लेकिन आज किसान इसे अपना सबसे बड़ा मददगार मानता है. असल में उल्लू को किसानों का वफादार दोस्त कहा जाए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. यह रात के अंधेरे में खेत की पहरेदारी करता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चूहे, टिड्डियां और छोटे-मोटे कीट-पतंगे जो किसानों की महीनों की मेहनत को पल भर में बर्बाद कर देते हैं. उल्लू उनसे खेत का बचाता है आजकल इको-फ्रेंडली खेती और बिना केमिकल वाले अनाज उगाने का ट्रेंड बढ़ रहा है. ऐसे में उल्लू जैसे पक्षी खेतों की सुरक्षा के लिए काफी कारगर साबित हो रहे हैं.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;चूहों और हानिकारक कीटों का सफाया करता है&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खेतों में फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान चूहों से होता है. जो अनाज की जड़ों और बोरियों को कुतरकर किसानों को भारी चपत लगाते हैं. उल्लू इन्हें निपटाता है, उल्लू की आंखें रात के घने अंधेरे में भी बिल्कुल साफ देख सकती हैं और इसके सुनने की क्षमता इतनी गजब की होती है कि यह सूखी पत्तियों के नीचे रेंगने वाले कीड़ों की आहट भी आसानी से पकड़ लेता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/farming-news-who-was-the-first-farmer-in-the-world-what-crops-did-he-sow-know-the-country-he-belong-to-3147004&quot;&gt;दुनिया का पहला किसान कौन था? उसने कौनसी फसल बोई थी, किस देश से था उसका ताल्लुक&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;उल्लू के पंखों की बनावट ऐसी होती है कि जब यह उड़ता है. तो बिल्कुल भी आवाज नहीं होती. जिस वजह से चूहों को संभलने का मौका ही नहीं मिलता. एक उल्लू सालभर में हजारों चूहों और फसलों को चट कर जाने वाले खतरनाक कीड़ों का शिकार करके खेत को पूरी तरह साफ रखता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;बिना खर्च के फसलों की सिक्योरिटी&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;आजकल किसान फसलों को बचाने के लिए महंगे और जहरीले पेस्टिसाइड्स पर अंधाधुंध पैसा खर्च करते हैं. जिससे मिट्टी की क्वालिटी भी खराब होती है. लेकिन उल्लू की मौजूदगी से किसानों को बिना एक भी पैसा खर्च किए एक ऐसा सिक्योरिटी गार्ड मिल जाता है जो पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;रात में करता है निगरानी&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;यह रात के समय एक्टिव होकर खेत के कोने-कोने की निगरानी करता है और गिलहरियों, चूहों और दूसरे छोटे जीवों की आबादी को कंट्रोल में रखता है. कृषि वैज्ञानिक भी अब किसानों को सलाह देते हैं कि वे अपने खेतों के आसपास ऊंचे पेड़ या लकड़ी के स्टैंड लगाएं जिससे उल्लू वहां बैठकर आराम से शिकार कर सकें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/farming-tips-sow-moringa-on-the-field-boundary-if-you-know-the-reason-you-too-will-adopt-this-method-3147484&quot;&gt;खेत की मेड़ पर मोरिंगा क्यों बो देते हैं किसान, कारण जान लेंगे तो आप भी अपनाएंगे ये तरीका&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/19/3544cac79c76c4436cc693a963b70be71781850868747907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[खेत की मेड़ पर मोरिंगा क्यों बो देते हैं किसान, कारण जान लेंगे तो आप भी अपनाएंगे ये तरीका]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/farming-tips-sow-moringa-on-the-field-boundary-if-you-know-the-reason-you-too-will-adopt-this-method-3147484</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/farming-tips-sow-moringa-on-the-field-boundary-if-you-know-the-reason-you-too-will-adopt-this-method-3147484#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 11:06:28 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/farming-tips-sow-moringa-on-the-field-boundary-if-you-know-the-reason-you-too-will-adopt-this-method-3147484</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Moringa Farming Tips:&lt;/strong&gt; किसानों के आज के वक्त में खेती के जरिए अगर सही मुनाफा कमाना है. तो उन्हें नए-नए प्रयोग करने आने चाहिए. खेत में मुख्य फसल के अलावा किसान अब मेड़ पर फसल लगाकर भी एक्स्ट्रा कमाई कर सकते हैं. आप अपनी अपनी मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाए बिना खेत की मेड़ पर मोरिंगा यानी सहजन के पौधे लगा सकते हैं. दरअसल मेड़ की खाली पड़ी जगह का इससे बेहतर इस्तेमाल हो ही नहीं सकता.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मोरिंगा एक ऐसा पौधा है जिसके फल, फूल और पत्तियां सब कुछ बाजार में हाथों-हाथ बिक जाते हैं. स्वास्थय के प्रति जागरुक लोगों के बीच मोरिंगा की पत्तियों के पाउडर की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ी है. बाजार में मोरिंगा की सूखी पत्तियों का पाउडर 1500 रुपये प्रति किलो तक के ऊंचे दामों पर बिक रहा है. ऐसे में खेती के इस तरीके को अपनाकर एक्स्ट्रा कमाई का यह बेहतरीन जरिया है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;खेत की मेड़ पर लगाएं मोरिंगा&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खेत की मेड़ पर मोरिंगा लगाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके लिए किसानों को अलग से कोई जमीन नहीं छोड़नी पड़ती और न ही मुख्य फसल के लिए जो पैसे थे उसमें कोई इजाफा कमी करनी पड़ती है. मेड़ पर लगे ये पौधे बहुत ही कम पानी और बिना किसी खास रेख-देख के आसानी से बड़े हो जाते हैं. एक बार पौधा लगाने के बाद कुछ ही महीनों में इसकी पत्तियां और फलियां तैयार होने लगती हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/farming-news-you-can-earn-lakhs-every-year-by-planting-a-sapling-worth-11-rupees-this-farmer-wrote-his-own-destiny-3147028&quot;&gt;11 रुपये का पौधा लगाकर हर साल लाखों कमा सकते हैं आप, इस किसान ने खुद लिखी अपनी किस्मत&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;ऐसे होती है कमाई&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;किसान इसकी हरी पत्तियों को तोड़कर उन्हें छांव में सुखाते हैं और फिर उसका बारीक पाउडर तैयार कर लेते हैं. आज के वक्त में मोरिंगा पाउडर को कंपनियां और सीधे ग्राहक बहुत महंगे रेट पर खरीदते हैं. इस तरह मेड़ की बेकार पड़ी जगह से किसानों को बिना किसी एक्सट्रा लागत के लाखों रुपये का मुनाफा मिल जाता है.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मोरिंगा के किसानों के लिए यह फायदे&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मेड़ पर मोरिंगा के पेड़ लगाने से सिर्फ पैसा ही नहीं आते है. बल्कि यह खेत के लिए एक नेचुरल गार्ड की तरह भी काम करता है. मोरिंगा के घने पौधे तेज हवाओं को रोककर मुख्य फसल को सहारा देते हैं और खेत की मिट्टी को कटने से बचाते हैं. इसके साथ ही मोरिंगा की जड़ें मिट्टी को बांधकर रखती हैं और इसकी गिरी हुई पत्तियां खेत में ही सड़कर बेहतरीन ऑर्गेनिक खाद का काम करती हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;जिससे जमीन की उपजाऊ शक्ति अपने आप बढ़ जाती है.आयुर्वेद में मोरिंगा को 300 से ज्यादा बीमारियों की काट माना गया है इसलिए इसके फूलों और पत्तियों के आसपास हानिकारक कीट-पतंगे नहीं फटकते. जिससे मुख्य फसल भी सुरक्षित रहती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/farming-news-who-was-the-first-farmer-in-the-world-what-crops-did-he-sow-know-the-country-he-belong-to-3147004&quot;&gt;दुनिया का पहला किसान कौन था? उसने कौनसी फसल बोई थी, किस देश से था उसका ताल्लुक&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/19/c0645894b9e88532cca12da6b8270b0d1781847129597907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Tea Farming At Home: अपने किचन गार्डन में कैसे कर सकते हैं चाय की खेती, जानें इसके लिए क्या-क्या जरूरी?]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/how-to-grow-tea-plant-at-home-kitchen-garden-3147354</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/how-to-grow-tea-plant-at-home-kitchen-garden-3147354#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:27:36 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/how-to-grow-tea-plant-at-home-kitchen-garden-3147354</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Tea Farming At Home:&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;सुबह उठते ही एक कड़क चाय यह तो हर भारतीय की जरूरत है. लेकिन क्या हो अगर वो चाय आपके अपने घर में उगाई हुई हो? सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन यह बिल्कुल मुमकिन है. चाय का पौधा यानी Camellia sinensis एक ऐसा पौधा है जिसे आप अपने घर की छत पर, बालकनी में या किचन गार्डन में उगा सकते हैं. इसके लिए बस जरूरत है तो थोड़ी सी जानकारी और थोड़ा सा धैर्य. आइए जानते हैं कि घर पर चाय की खेती करने के लिए क्या-क्या जरूरी है और कैसे शुरुआत करें?&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सही पौधा और मिट्टी का चयन सबसे जरूरी&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चाय की खेती के लिए सबसे पहले आपको चाय का पौधा यानी Camellia sinensis चाहिए. यह पौधा आपको किसी अच्छी नर्सरी में आसानी से मिल जाएगा. साथ ही ये बीज से भी उगाया जा सकता है, लेकिन उसमें वक्त ज्यादा लगता है इसलिए नर्सरी से छोटा पौधा लाना सबसे आसान और सही तरीका है. अब बात करते हैं मिट्टी की चाय की तो यह पौधा थोड़ी अम्लीय यानी acidic मिट्टी में सबसे अच्छा उगता है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मिट्टी का pH 5.5 से 6.5 के बीच होना चाहिए. आप बगीचे की मिट्टी में थोड़ा कोकोपीट और थोड़ी रेत मिलाएं यह मिश्रण चाय के पौधे के लिए एकदम सही रहता है. वीके चीज का ध्यान रखना चाहिए की गमले में नीचे छेद जरूर होना चाहिए ताकि पानी रुके नहीं क्योंकि रुका हुआ पानी पौधे को बर्बाद कर देता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/guava-farming-tips-how-to-make-guava-orchard-in-plot-profit-of-guava-garden-3147092&quot;&gt;&lt;strong&gt;Guava Farming Tips: अपने प्लॉट को कैसे बनाएं अमरूद का बगीचा, 2 बीघा में कितनी लागत से हो जाएगा काम?&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;धूप, पानी और तापमान इन तीनों का रखें पूरा ख्याल&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चाय का पौधा न तो बहुत तेज धूप पसंद करता है और न ही बिल्कुल छाव. इसे हर दिन 4 से 6 घंटे की हल्की धूप चाहिए. सुबह की धूप इस पौधे के लिए सबसे अच्छी होती है. दोपहर की तेज धूप से इसे बचाएं वरना पत्तिया जल सकती हैं. साथ ही तापमान की बात करें तो चाय का पौधा 15&amp;deg;C से 30&amp;deg;C के बीच के मौसम में सबसे अच्छा बढ़ता है. इस पौधे को &amp;nbsp;रोज पानी देने की जरूरत नहीं है. बारिश का &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; इस पौधे के लिए वरदान जैसा होता है, लेकिन गमले में पानी जमा न होने दें.&lt;/p&gt;
&lt;h3 style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;खाद और देखभाल का रखें पूरा ध्यान&amp;nbsp;&lt;/h3&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;चाय के पौधे को नियमित खाद देना बहुत जरूरी है. हर महीने गमले में थोड़ी वर्मीकम्पोस्ट या गोबर की खाद मिलाएं. अगर पत्तिया पीली पड़ने लगें तो यह संकेत है कि पौधे को पोषण की जरूरत है. आप बाजार से नीम की खली भी ला सकते हैं और उसे मिट्टी में मिला सकते हैं यह पौधे को पोषण भी देती है और कीड़ों से भी बचाती है.साथ ही पौधे की छंटाई यानी pruning भी जरूरी है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ेंः &lt;/strong&gt;&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/mango-farming-grafting-technique-multiple-varieties-of-mangoes-can-be-grown-on-a-single-tree-by-this-know-the-details-3146974&quot;&gt;&lt;strong&gt;क्या होती है Grafting Technique? एक ही पेड़ पर उगाए जा सकते हैं कई तरह के आम&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/19/6843a48fb03a5cedd0fbf3ab1871b81317818079852341381_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Paddy Mandi Rates 2026: किस मंडी में है धान की सबसे ज्यादा डिमांड? जाते ही हाथों हाथ बिक जाता है माल]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/paddy-mandi-rates-2026-which-mandi-has-the-highest-demand-for-paddy-and-where-farmers-get-best-prices-3147192</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/paddy-mandi-rates-2026-which-mandi-has-the-highest-demand-for-paddy-and-where-farmers-get-best-prices-3147192#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:22:25 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मानसी उपाध्याय ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/paddy-mandi-rates-2026-which-mandi-has-the-highest-demand-for-paddy-and-where-farmers-get-best-prices-3147192</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Paddy Mandi Rates 2026 : &lt;/strong&gt;धान देश की सबसे जरूरी फसलों में से एक है और हर सीजन में किसान इस बात का इंतजार करते हैं कि उनकी उपज किस मंडी में सबसे अच्छे रेट पर बिकेगी. कई बार ऐसा देखा जाता है कि कुछ मंडियों में धान की मांग इतनी ज्यादा होती है कि किसानों का माल पहुंचते ही खरीद लिया जाता है. अच्छी क्वालिटी, निर्यात मांग और खरीदारों की संख्या किसी भी मंडी के रेट तय करने में जरूरी होती है. ऐसे में अगर आप भी धान बेचने की तैयारी कर रहे हैं, तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि धान की सबसे ज्यादा डिमांड देश की किस मंडी में है और कहां जाते ही हाथों हाथ माल बिक जाता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;धान की सबसे ज्यादा डिमांड देश की किस मंडी में है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;1. अलीगढ़ (अतरौली), उत्तर प्रदेश - धान की अलग-अलग किस्मों के आधार पर देश की कई मंडियां किसानों को अच्छे रेट दे रही हैं. &amp;nbsp;खासतौर पर बासमती धान की मांग वाले क्षेत्रों में रेट काफी मजबूत बने हुए हैं. बासमती धान के लिए अलीगढ़ की अतरौली मंडी सबसे चर्चित मंडियों में शामिल है. अगस्त 2025 के दौरान यहां बासमती का रेट लगभग 3,600 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;2. बुलंदशहर (स्याना), उत्तर प्रदेश - बासमती किस्म के लिए स्याना मंडी प्रमुख केंद्र मानी जाती है. यहां इस किस्म का रेट करीब 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा. बेहतर क्वालिटी और ज्यादा खरीदारों की मौजूदगी के कारण यहां कॉम्पिटिशन बना रहता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;3. सिरसा, हरियाणा - हरियाणा की सिरसा मंडी बासमती के लिए जानी जाती है. यहां इस किस्म का रेट लगभग 3,200 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. निर्यात मांग और क्वालिटी की वजह से यहां धान की खरीद लगातार मजबूत बनी रहती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;4. उन्नाव (पुरवा), उत्तर प्रदेश - पुरवा मंडी में बासमती धान का रेट करीब 3,350 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंचा. लंबे दाने वाले चावल की मांग के कारण यह मंडी किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;5. बुलंदशहर (जहांगीराबाद), उत्तर प्रदेश - जहांगीराबाद मंडी में बासमती का रेट लगभग 3,100 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. सुगंध और बेहतर क्वालिटी वाली फसल के लिए यहां खरीदारों की अच्छी संख्या रहती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;इन मंडियों में भी मिल रहे हैं धान के सबसे अच्छे रेट&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;सहारनपुर मंडी में बासमती का रेट करीब 2,960 रुपये प्रति क्विंटल रहा. इसके अलावा खैर मंडी में बासमती का रेट लगभग 2,850 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किया गया. यहां मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बना रहने से किसानों को स्थिर कीमतें मिलती हैं. वहीं मथुरा मंडी में बासमती का रेट करीब 2,860 रुपये प्रति क्विंटल रहा. प्रीमियम किस्मों के लिए यहां खरीदारों का &amp;nbsp;कॉम्पिटिशन &amp;nbsp;बना रहता है. अलीगढ़ मंडी में बासमती का रेट लगभग 2,860 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. दनकौर मंडी में बासमती का रेट करीब 2,855 रुपये प्रति क्विंटल रहा. यहां मिलर्स और व्यापारियों की सक्रिय खरीद किसानों को अच्छे अवसर देती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&lt;/strong&gt; &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/chilli-farming-tips-with-just-2-acres-of-land-farmers-can-change-their-fortunes-know-the-details-3147143&quot;&gt;सिर्फ 2 एकड़ ज़मीन से किसान बदल सकते हैं अपनी किस्मत, जानें कैसे मिर्च मॉडल बना कमाई का ताबड़तोड जरिया&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;मध्य भारत में कहां मिला सबसे ज्यादा रेट?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;मध्य भारत में मध्य प्रदेश की बरेली मंडी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है. यहां धान का अधिकतम रेट 4,550 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जबकि मंडी में लगभग 16.50 टन धान पहुंचा था. ऐसे में बेहतर क्वालिटी वाले धान को यहां मजबूत कीमत मिल रही है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;सामान्य धान के लिए कौन सी मंडी रही सबसे आगे?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हाल ही में सामान्य धान के लिए रायसेन APMC मंडी, मध्य प्रदेश देश की प्रमुख मंडियों में सबसे आगे रही. यहां अधिकतम रेट 4,281 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. मंडी का औसत रेट 2,347 रुपये प्रति क्विंटल रहा और इस फसल के लिए देशभर में 107 सक्रिय मंडियों में यह सबसे ऊंचे स्तर पर रही.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;दूसरी फसलों और अनाज के बाजार का क्या है हाल?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;1. मक्का के रेट में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव बना हुआ है फिलहाल इसकी कीमत करीब 1,500 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही है. हालांकि पशु आहार और एथेनॉल उद्योग में बढ़ती मांग के चलते आगे रेट बढ़ने की उम्मीद है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;2. सोयाबीन का बाजार काफी हद तक विदेशों की मांग और उत्पादन पर निर्भर है. 2025-26 में वैश्विक उत्पादन घटने और मांग बढ़ने का अनुमान है, जिससे सोयाबीन के रेट को सहारा मिल सकता है. हालांकि अभी घरेलू बाजार में दबाव बना हुआ है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;3.धनिया के रेट में हाल के दिनों में थोड़ी गिरावट देखने को मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार ने मजबूत आधार बना लिया है और आगे कीमतों में तेजी आ सकती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;4. जीरा के बाजार में अच्छी मजबूती देखने को मिल रही है. किसानों के स्टॉक रोककर रखने और निर्यात मांग बढ़ने से इसके रेट में तेजी बनी हुई है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;5. चावल के बाजार पर अंतरराष्ट्रीय हालात का असर पड़ रहा है. खासकर मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण व्यापार प्ररेटित हुआ है, लेकिन भारत में उत्पादन अच्छा रहने से बाजार संतुलित बना हुआ है. वहीं बासमती चावल की मांग देश और विदेश दोनों बाजारों में मजबूत बनी हुई है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&lt;/strong&gt; &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/multi-layer-farming-farmers-can-earn-3-to-5-times-the-profit-in-a-single-cycle-know-what-it-is-3146448&quot;&gt;क्या है दो तल्ला खेती? एक ही बार 3 से 5 गुना मुनाफा कमा सकते हैं किसान भाई&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/18/d707a00de10f4c6261d03f6ed2ed508517817786973911120_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[Turmeric Cultivation at Home : अपने कमरे में भी उगा सकते हैं हल्दी का पौधा, बस इन बातों का रखना होता है ध्यान]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/turmeric-cultivation-at-home-know-how-to-grow-turmeric-plant-in-room-and-what-are-care-tips-3147120</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/turmeric-cultivation-at-home-know-how-to-grow-turmeric-plant-in-room-and-what-are-care-tips-3147120#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 09:28:47 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ मानसी उपाध्याय ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/turmeric-cultivation-at-home-know-how-to-grow-turmeric-plant-in-room-and-what-are-care-tips-3147120</guid><description><![CDATA[&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;Turmeric Cultivation at Home : &lt;/strong&gt;हल्दी हर घर की रसोई का सबसे खास मसाला है, जो टेस्ट बढ़ाने के साथ-साथ अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. हल्दी में पाया जाने वाला करक्यूमिन तत्व एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है. आमतौर पर लोग सोचते हैं कि हल्दी की खेती सिर्फ खेतों या बड़े बगीचों में ही की जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं है. अगर आपके पास थोड़ी सी जगह है, तो आप अपने कमरे या घर के अंदर गमले में भी हल्दी का पौधा आसानी से उगा सकते हैं. हल्दी गर्म &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; में उगने वाला पौधा है और इसे उगाने के लिए ज्यादा मेहनत या किसी खास व्यवस्था की जरूरत नहीं पड़ती है, हालांकि इसकी फसल तैयार होने में लगभग 7 से 10 महीने का समय लग सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि अपने कमरे में हल्दी का पौधा कैसे उगा सकते हैं और उसकी देखभाल के लिए किन बातों का ध्यान रखना होता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;कमरे में उगाने के लिए कौन-सी हल्दी बेहतर होती है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;दुनियाभर में हल्दी की 130 से ज्यादा किस्में पाई जाती हैं. इनमें पीली, काली, लाल और सफेद हल्दी प्रमुख हैं. इनमें सबसे ज्यादा यूज पीली हल्दी का किया जाता है. इसकी पैदावार अच्छी होती है और यह दूसर हल्दी से ज्यादा मजबूत मानी जाती है. वहीं काली हल्दी काफी खास होती है और इसकी उपज कम होने के कारण यह महंगी भी मानी जाती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हल्दी लगाने का सही समय क्या है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;विशेषज्ञों के अनुसार हल्दी को घर के अंदर लगाने के लिए सर्दियों के लास्ट का समय सबसे सही माना जाता है. फरवरी का महीना इसकी शुरुआत के लिए अच्छा माना जाता है. हल्दी को पूरी तरह तैयार होने में लंबा समय लगता है. ऐसे में समय पर रोपाई करने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;अपने कमरे में हल्दी का पौधा कैसे उगा सकते हैं?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;घर के अंदर या कमरे में हल्दी का पौधा उगाना काफी आसान है. &amp;nbsp;इसके लिए सबसे पहले अच्छी क्वालिटी वाली हल्दी की गांठ यानी कंद लें, जिसमें छोटी-छोटी कोंपल निकलने वाली आंखें मौजूद हों. इसके बाद एक गमले में उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी भरें. हल्दी के टुकड़ों को 2 से 4 इंच गहराई में लगाकर हल्का पानी दें. पौधों के बीच लगभग 6 इंच की दूरी रखें और आंखों वाला हिस्सा ऊपर की तरफ रखें. गमले को ऐसी जगह रखें जहां रोजाना पूरी रोशनी या कम से कम 6 घंटे धूप मिल सके. पौधे की बढ़वार के दौरान मिट्टी में नमी बनाए रखें, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी न दें. इससे जड़ें सड़ सकती हैं. इसके बाद सही देखभाल और गर्म वातावरण मिलने पर कुछ समय बाद हल्दी में अंकुर निकलने लगते हैं और लगभग 7 से 10 महीने में इसकी फसल तैयार हो जाती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&lt;/strong&gt; &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/kachalu-growing-tips-in-your-kitchen-garden-know-what-do-you-need-3147078&quot;&gt;अपने किचन गार्डन में कैसे उगा सकते हैं कचालु? किन चीजों की पड़ती है जरूरत&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;पौधे की देखभाल के लिए किन बातों का ध्यान रखना होता है?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;1. धूप का ध्यान रखें - हल्दी के पौधे को अच्छी ग्रोथ के लिए रोजाना कम से कम 6 घंटे धूप की जरूरत होती है. हालांकि बहुत तेज धूप में पत्तियां थोड़ी प्रभावित दिख सकती हैं, लेकिन कंदों के ग्रोथ के लिए रोशनी जरूरी होती है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;2. सही मिट्टी का चुनाव करें - हल्दी के लिए ऐसी मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है जिसका पीएच स्तर 6.0 से 7.0 के बीच हो. दोमट मिट्टी में जैविक खाद, गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाकर पौधा लगाया जाए तो इसकी बढ़वार बेहतर होती है.&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;3. सिंचाई का रखें ध्यान - हल्दी के पौधे को बढ़वार के दौरान नियमित पानी की जरूरत होती है, लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी देना नुकसानदायक हो सकता है. लगातार गीली मिट्टी रहने से जड़ें सड़ने का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए मिट्टी में नमी बनाए रखें, लेकिन जलभराव न होने दें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;हल्दी की कटाई कब करें?&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;हल्दी की फसल आमतौर पर रोपाई के 10 महीने बाद तैयार होती है. जब पौधे की पत्तियां और तना भूरे रंग के होकर सूखने लगें, तो हल्दी कटाई के लिए तैयार हो जाती है. कटाई के समय पूरे पौधे को सावधानी से बाहर निकालें और मिट्टी साफ कर लें. हल्दी के कंद खाने और यूज करने के लिए तैयार हो जाते हैं.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p style=&quot;text-align: justify;&quot;&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें -&lt;/strong&gt; &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/mango-farming-grafting-technique-multiple-varieties-of-mangoes-can-be-grown-on-a-single-tree-by-this-know-the-details-3146974&quot;&gt;क्या होती है Grafting Technique? एक ही पेड़ पर उगाए जा सकते हैं कई तरह के आम&lt;/a&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/18/7011ef7aa11c342213d54013d7d1b15917817726707591120_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[अरहर की फसल से पाना है दोगुना उत्पादन? इन आसान बातों का बुवाई के समय रखें खास ध्यान]]></title><link>https://www.abplive.com/agriculture/pigeon-pea-farming-tips-pay-special-attention-to-these-simple-things-at-the-time-of-sowing-know-the-details-3147235</link><comments>https://www.abplive.com/agriculture/pigeon-pea-farming-tips-pay-special-attention-to-these-simple-things-at-the-time-of-sowing-know-the-details-3147235#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 09:06:36 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ नीलेश ओझा ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/agriculture/pigeon-pea-farming-tips-pay-special-attention-to-these-simple-things-at-the-time-of-sowing-know-the-details-3147235</guid><description><![CDATA[&lt;p&gt;&lt;strong&gt;Pigeon Pea Farming Tips:&lt;/strong&gt; भारत में खाने को लेकर अरहर की दाल का एक अलग ही मुकाम है. इसलिए मार्केट में इसकी डिमांड हमेशा बहुत हाई रहती है. लेकिन कई बार किसान पूरी मेहनत करने के बाद भी अरहर की उतनी पैदावार नहीं ले पाते जितनी उम्मीद होती है. कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अरहर की खेती में सबसे बड़ा हाश बुवाई के सही समय और सही तरीकों का होता है.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;अगर आप भी इस खरीफ सीजन में अरहर से बंपर और सीधे दोगुनी पैदावार लेना चाहते हैं. तो 15 जुलाई से पहले इसकी बुवाई का काम हर हाल में पूरा कर लें. सही समय पर की गई शुरुआत फसल को &lt;a title=&quot;मौसम&quot; href=&quot;https://www.abplive.com/weather&quot; data-type=&quot;interlinkingkeywords&quot;&gt;मौसम&lt;/a&gt; की मार और कीटों के हमले से बचाती है. चलिए जानते हैं कि इस बार बुवाई के समय आपको किन खास बातों का ध्यान रखना है&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;सही वैरायटी चुनना जरूरी&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;अरहर से अच्छी पैदावार लेने का के लिए अच्छे बीजों को चुनना सबसे जरूरी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक आपको अपने क्षेत्र की जलवायु के हिसाब से उन्नत और हाइब्रिड किस्मों के बीजों का ही इस्तेमाल करना चाहिए. बुवाई से पहले बीज शोधन यानी सीड ट्रीटमेंट करना बिल्कुल न भूलें. बीजों को सड़ने और शुरुआती बीमारियों से बचाने के लिए बोने से पहले थिरम या कार्बेन्डाजिम जैसी दवाएं मिलाकर साफ कर लें.&amp;nbsp;&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;इसके बाद दाल वाली फसलों के लिए सबसे जरूरी राइजोबियम कल्चर से बीजों को मिक्स करें. यह तरीका पौधों की जड़ों में नाइट्रोजन फिक्स करने में मदद करता है. जिससे पौधे बहुत तेजी से ग्रो करते हैं और उनमें शाखाएं भी ज्यादा निकलती हैं.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें: &lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/farming-news-you-can-earn-lakhs-every-year-by-planting-a-sapling-worth-11-rupees-this-farmer-wrote-his-own-destiny-3147028&quot;&gt;11 रुपये का पौधा लगाकर हर साल लाखों कमा सकते हैं आप, इस किसान ने खुद लिखी अपनी किस्मत&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;बुवाई का सही तरीका&amp;nbsp;&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;अक्सर किसान भाई पारंपरिक छिटकवां विधि से अरहर बो देते हैं, जिससे पैदावार घट जाती है. वैज्ञानिक तरीका यह है कि अरहर की बुवाई हमेशा कतारों में और मेड़ बनाकर करनी चाहिए. लाइन से लाइन की दूरी और पौधे से पौधे का गैप सही बनाए रखें ताकि हर पौधे को पूरी धूप और हवा मिल सके. चूंकि अरहर की फसल को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती.&lt;/p&gt;
&lt;h3&gt;&lt;strong&gt;खेत में नमी का इंतजाम होना चाहिए&lt;/strong&gt;&lt;/h3&gt;
&lt;p&gt;इसलिए खेत में जलभराव रोकने का अच्छा इंतजाम होना चाहिए. मेड़ पर बुवाई करने से भारी बारिश के समय एक्स्ट्रा पानी नालियों से बाहर निकल जाता है और फसल सड़ने से बच जाती है. साथ ही, बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करें ताकि बीजों का अंकुरण एकदम परफेक्ट और एक समान हो.&lt;/p&gt;
&lt;p&gt;&lt;strong&gt;यह भी पढ़ें:&lt;a href=&quot;https://www.abplive.com/agriculture/farming-news-who-was-the-first-farmer-in-the-world-what-crops-did-he-sow-know-the-country-he-belong-to-3147004&quot;&gt; दुनिया का पहला किसान कौन था? उसने कौनसी फसल बोई थी, किस देश से था उसका ताल्लुक&lt;/a&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/18/db2eb1fa733e983039df1813d60e9c4d1781784385324907_original.jpg" width="220"/></item><item><title><![CDATA[अपने किचन गार्डन में कैसे उगाएं इमली का पौधा? जान लें तरीका]]></title><link>https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/how-to-grow-imli-plant-at-home-kitchen-garden-3147353</link><comments>https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/how-to-grow-imli-plant-at-home-kitchen-garden-3147353#respond</comments><pubDate>Fri, 19 Jun 2026 07:40:57 +0530 </pubDate><dc:creator><![CDATA[ एबीपी लाइव ]]></dc:creator><category><![CDATA[ एग्रीकल्चर ]]></category><guid isPermaLink="true">https://www.abplive.com/photo-gallery/agriculture/how-to-grow-imli-plant-at-home-kitchen-garden-3147353</guid><description><![CDATA[अपने किचन गार्डन में कैसे उगाएं इमली का पौधा? जान लें तरीका]]></description><slash:comments>0</slash:comments><media:thumbnail url="https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2026/06/18/68ad948a78eeceb542d208c0e41a94c817818010491311381_original.jpg" width="220"/></item></channel></rss>