Farming Tips: खेती-किसानी में कभी-कभी मौसम ऐसा खेल खेलता है कि हरी-भरी फसल पल भर में तालाब में बदल जाती है. भारी बारिश या बाढ़ की वजह से खेत में पानी भरना आज के किसानों के लिए एक बड़ा सिरदर्द है. ऐसे में अगर सही समय पर सही कदम न उठाए जाएं तो पूरी मेहनत और लागत पर पानी फिर जाता है. 

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पानी भरने से पौधों की जड़ों को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है जिससे फसलें सड़ने लगती हैं और मिट्टी की सेहत भी खराब होती है. इसलिए किसान को हमेशा इसके लिए तैयार रहना चाहिए जिससे नुकसान को कम से कम किया जा सके. चलिए आपको बताते हैं कि खेत में पानी भरने पर आपको सबसे पहले क्या करना चाहिए.

पानी निकासी का तुरंत इंतजाम

खेत में पानी जमा होते ही आपका सबसे पहला और सबसे जरूरी काम होना चाहिए पानी को बाहर निकालना. इसके लिए खेत के सबसे निचले हिस्से की तरफ एक ड्रेनेज चैनल यानी निकास नाली बनाएं जिससे रुका हुआ पानी तेजी से बाहर निकल सके. अगर पानी का वॉल्यूम बहुत ज्यादा है और नेचुरल तरीके से रास्ता नहीं बन पा रहा है.

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तो बिना देर किए वाटर पंप या भारी मोटरों का इस्तेमाल करके पानी को खेत से बाहर फ्लश करें. कोशिश करें कि फसल के आसपास 24 से 48 घंटों से ज्यादा पानी जमा न रहे क्योंकि यही वो टाइम होता है जब पौधे दम तोड़ने लगते हैं. इस दौरान खेत की मेड़ों को भी चेक करें जिससे बाहर का और पानी अंदर न आ सके.

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फसल का ऐसे रखें ध्यान 

एक बार जब पानी का लेवल कम हो जाए तो अगला स्टेप फसल को दोबारा जिंदगी देना है. पानी के साथ मिट्टी के जरूरी पोषक तत्व भी बह जाते हैं. इसलिए जैसे ही खेत की मिट्टी थोड़ी सूखने लगे उसमें हल्की खाद या लिक्विड फर्टिलाइजर्स का स्प्रे करें. इस समय फसलों में फंगस और बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा होता है. इसलिए एक्सपर्ट की सलाह पर एंटी-फंगल स्प्रे का छिड़काव जरूर करें. 

इसके साथ ही अगर फसल के ऊपर कीचड़ या सिल्ट जम गई है. तो उसे साफ करने की कोशिश करें जिससे पौधे धूप और हवा को अच्छे से एब्जॉर्ब कर सकें. यह क्विक हीलिंग प्रोसेस आपकी डूबती हुई फसल को वापस ट्रैक पर ला सकती है.

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