Medical Plants Farming Tips: खेती में बढ़ती लागत और पारंपरिक फसलों से घटते मुनाफे के चलते अब देश में बहुत से किसान औषधीय पौधों की खेती की तरफ रुख कर रहे हैं. कम समय में बेहतर आमदनी और बाजार में लगातार बढ़ती मांग. आयुर्वेद, हर्बल प्रोडक्ट्स और फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री के बढ़ने के साथ औषधीय फसलों की जरूरत तेजी से बढ़ी है. यही वजह है कि देश के कई किसान अब ऐसी फसलों को अपना रहे हैं जो कम जगह में भी अच्छी कमाई दे सकें. 

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देशमें। कई अनुभवी किसान एक साथ दर्जनों औषधीय पौधों की खेती कर रहे हैं और नर्सरी के जरिए भी अतिरिक्त आय कमा रहे हैं. खास बात यह है कि इन पौधों की मांग सिर्फ देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक बनी रहती है जिससे किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर दाम दोनों मिल जाते हैं. जान लें कैसे किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रहे हैं औषधीय पौधे.

अश्वगंधा से लेकर स्टीविया की बाजार में खूब मांग

औषधीय पौधों की दुनिया काफी बड़ी है और इसमें कई ऐसी फसलें शामिल हैं जिनकी मांग सालभर बनी रहती है. अश्वगंधा, स्टीविया, कालमेघ, सफेद मूसली, तुलसी और एलोवेरा जैसे पौधे किसानों के बीच तेजी से पाॅपुलर हो रहे हैं. इनका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं, हेल्थ सप्लीमेंट्स और हर्बल उत्पादों में बड़े पैमाने पर होता है. स्टीविया को प्राकृतिक मिठास के लिए जाना जाता है. 

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जबकि अश्वगंधा की मांग हेल्थ सेक्टर में लगातार बढ़ रही है. इन फसलों की खेती में पारंपरिक फसलों की तुलना में कई बार कम पानी और कम देखभाल की जरूरत पड़ती है. यही वजह है कि छोटे स्तर पर खेती करने वाले किसान भी इन्हें आसानी से अपना रहे हैं. सही खरीदार और मार्केट लिंक मिलने पर इन पौधों से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.

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नर्सरी और पौध उत्पादन से भी कमाई 

औषधीय पौधों की खेती का फायदा सिर्फ फसल बेचने तक सीमित नहीं है. कई किसान इन पौधों की नर्सरी तैयार कर पौधों की बिक्री से भी अच्छी कमाई कर रहे हैं. जब किसी औषधीय फसल की मांग बढ़ती है तो उसके पौधों की जरूरत भी बढ़ जाती है. ऐसे में नर्सरी का कारोबार आय का एक अलग सोर्स बन जाता है. 

अच्छी क्वालिटी वाले पौधे तैयार कर किसान दूसरे किसानों और संस्थानों को बेच सकते हैं. इससे सालभर इनकम आती रहती है. औषधीय पौधों की खेती और नर्सरी दोनों ही किसानों के लिए अच्छे बिजनेस साबित हो रहे है. यही वजह है कि औषधीय पौधों की खेती कई किसान अपना रहे हैं.

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