Mango Farming: अप्रैल का महीना आते ही गर्मी की शुरुआत हो जाती है और इसी के साथ फलों के राजा यानी आम की मांग भी तेजी से बढ़ने लगती है. बाजार से लेकर घर तक हर जगह आम की चर्चा शुरू हो जाती है. जहां एक तरफ मांग बढ़ती है, वहीं दूसरी तरफ किसानों के सामने एक बड़ी चुनौती भी खड़ी हो जाती है. आम के पेड़ों पर फूल यानी (बौर) और छोटे फल आने के बाद वे बहुत ज्यादा झड़ जाते हैं, जिसकी वजह से पैदावार कम हो जाती है.

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यह समस्या दो तरह की होती है एक तो प्राकृतिक, जिसमें पेड़ अपनी क्षमता के हिसाब से फल गिराता है और दूसरी हार्मोन की कमी. ऐसे में अगर सही समय पर सही उपाय किया जाए तो पेड़ों को फलों से भरना मुश्किल नहीं है. आइए जानते हैं इसके बारे में.

फल गिरने के पीछे का मुख्य कारण

कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार, आम के फलों के गिरने के पीछे कई कारण होते हैं, जैसे पेड़ अपनी टहनियों को टूटने से बचाने के लिए कुछ फलों को खुद ही गिरा देता है, क्योंकि वह उनका बोझ नहीं उठा पाता, ऐसे में कुछ फल प्राकृतिक रूप से गिर जाते हैं. इसके अलावा अगर फल बहुत ज्यादा संख्या में गिर रहे हैं तो इसका मतलब है कि पेड़ में पोषक तत्वों और हार्मोन की कमी हो गई है. साथ ही जब तापमान अधिक बढ़ जाता है, तो पेड़ के अंदर एथिलीन नाम का हार्मोन सक्रिय हो जाता है. यह हार्मोन पेड़ को संकेत देता है कि परिस्थितियां कठिन हैं, इसलिए वह अपनी ऊर्जा बचाने के लिए छोटे फलों को गिरा देता है. इसी वजह से बौर आने के बाद भी बड़ी संख्या में फल जमीन पर गिर जाते हैं.

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इस खास स्प्रे से मिलेगा समाधान

अगर आपके बाग में आम के टूटने की समस्या तेजी से बढ़ रही है तो इसे हार्मोनल इलाज से कंट्रोल किया जा सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि आम के फलों को गिरने से रोकने के लिए प्लैनोफिक्स जैसे हार्मोन स्प्रे का उपयोग किया जाता है. यह स्प्रे पेड़ के अंदर हार्मोन का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है और फलों को डंठल से मजबूती से जोड़ कर रखता है. सही मात्रा और सही समय पर इसका छिड़काव करने से फल गिरने की समस्या काफी कम हो जाती है और पेड़ पर ज्यादा फल टिके रहते हैं. इससे उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ फलों का आकार भी बेहतर होता है.

स्प्रे करने का सही तरीका और समय

जानकारों के अनुसार, स्प्रे का असर तभी अच्छा होता है जब इसे सही समय पर किया जाए. आमतौर पर जब पेड़ पर छोटे फल बनने लगते हैं, उसी समय पहला छिड़काव करना चाहिए. इसके बाद जरूरत के अनुसार दोबारा स्प्रे किया जा सकता है. ध्यान रखने वाली बात यह है कि दवा की मात्रा संतुलित हो और मौसम बहुत ज्यादा गर्म या बारिश वाला न हो. साथ ही सही तकनीक अपनाने से कुछ ही दिनों में सकारात्मक असर देखने को मिलता है.

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