Farming Tips: खेती-किसानी में बंपर पैदावार चाहिए तो सिर्फ मेहनत से काम नहीं चलता बल्कि सही खाद का सही गणित पता होना बहुत जरूरी है. अक्सर किसान भाई अंदाजे से या देखा-देखी अपने खेतों में बोरी की बोरी यूरिया, डीएपी और पोटाश डाल देते हैं. नतीजा यह होता है कि लागत आसमान छूने लगती है और मिट्टी की सेहत अंदर से बिल्कुल खोखली हो जाती है. 

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पौधों को भी इंसानों की तरह बैलेंस्ड डाइट चाहिए होती है, न कम न ज्यादा. अगर आप एक एकड़ जमीन पर खेती करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपको नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम का एकदम सटीक रेशियो समझना होगा. आज के इस मॉडर्न दौर में स्मार्ट किसान वही है जो सही नाप-तौल कर खाद डाले, ताकि जेब पर बोझ भी न पड़े और फसल भी लहलहा उठे.

एक एकड़ में यूरिया, पोटाश और DAP का हिसाब 

ज्यादातर सामान्य फसलों जैसे गेहूं, धान या मक्के के लिए एक एकड़ का एक तय नियम काम करता है. फसल की बुवाई के समय आपको करीब 50 किलो यानी एक पूरी बोरी डीएपी की जरूरत होती है. जो पौधों की जड़ों को मजबूत बनाती है. इसके साथ ही फसल को रोगों से बचाने और दानों में चमक लाने के लिए लगभग 25 से 30 किलो पोटाश मिलाना चाहिए. 

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अब बात आती है यूरिया की जो पौधों को एकदम हरा-भरा रखती है. यूरिया का हिसाब थोड़ा अलग है. इसे एक बार में पूरा नहीं डाला जाता. एक एकड़ के लिए लगभग 40 से 50 किलो यूरिया को दो या तीन बार में फसल की अलग-अलग ग्रोथ स्टेज पर छिड़काव करके दिया जाता है. जिससे नाइट्रोजन का पूरा फायदा मिलता है.

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अंधाधुंध खाद डालने के नुकसान

कई बार किसानों को लगता है कि जितनी ज्यादा खाद, उतनी ज्यादा उपज, लेकिन यह बहुत बड़ी गलतफहमी है. जरूरत से ज्यादा यूरिया डालने से पौधा सिर्फ लंबाई में भागता है. उसकी टहनियां कमजोर हो जाती हैं और कीड़े-मकोड़ों का हमला बढ़ जाता है. पोटाश और डीएपी का असंतुलन मिट्टी को कड़क बना देता है जिससे पौधे न्यूट्रिएंट्स सोख नहीं पाते. 

सबसे बेस्ट तरीका यह है कि खाद खरीदने से पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच जरूर करवा लें जिससे पता चल जाए कि जमीन में पहले से क्या मौजूद है. खाद हमेशा शाम के वक्त या हल्की सिंचाई के बाद डालें जिससे वह सीधे जड़ों तक पहुंचे और हवा में उड़कर या पानी के साथ बहकर बर्बाद न हो.

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