Monsoon Impact On Farming: दिल्ली और आसपास के इलाकों में इस बार मानसून तय समय से करीब 5 दिन की देरी से पहुंचा. बारिश का खेती-किसानी पर बहुत प्रभाव पड़ता है. खरीफ सीजन की कई फसलें समय पर बारिश पर काफी हद तक निर्भर रहती हैं.  ऐसे में किसानों के मन में सवाल आ रहा है मानसून के लेट होने से इसका खेती पर कितना प्रभाव पड़ेगा. तो आपको बता दें कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ कुछ दिनों की देरी से हर फसल को बड़ा नुकसान नहीं होता. 

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फर्क इस बात से पड़ता है कि मानसून आने के बाद बारिश कितनी होती है और पूरे सीजन में कैसी रहती है. अगर शुरुआती देरी के बाद लगातार अच्छी बारिश मिल जाए तो धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन और दालों जैसी फसलों की बढ़वार सामान्य बनी रह सकती है. लेकिन अगर बारिश रुक-रुक कर हो या लंबे समय तक सूखे जैसी स्थिति बनी रहे. तब फसल की क्वालिटी और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. इ

किन फसलों पर पड़ सकता है ज्यादा असर?

मानसून में कुछ दिनों की देरी का सबसे ज्यादा असर उन किसानों पर पड़ता है जिन्होंने अभी तक खरीफ फसलों की बुवाई शुरू नहीं की है. समय पर नमी नहीं मिलने से धान की नर्सरी तैयार करने, मक्का और सोयाबीन की बुवाई करने या दूसरी फसलों के अंकुरण में देरी हो सकती है. 

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इससे पौधों की शुरुआती ग्रोथ कमजोर रहने का खतरा बढ़ जाता है. वहीं जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है. वे इस स्थिति को काफी हद तक संभाल सकते हैं. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसान जल्दबाजी में सूखी जमीन में बीज न डालें, बल्कि पर्याप्त नमी मिलने के बाद ही बुवाई करें. 

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अच्छी बारिश जारी रही तो नहीं पड़ेगा बड़ा असर

कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक सिर्फ 5 दिन की देरी को फसल के लिए बड़ा खतरा नहीं माना जा सकता. अगर मानसून आने के बाद बारिश सामान्य या उससे बेहतर रहती है तो पौधों की बढ़वार तेजी से पूरी हो सकती है और उत्पादन पर भी असर पड़ता है. 

हालांकि लगातार भारी बारिश या लंबे अंतराल के बाद होने वाली तेज बारिश भी फसलों के लिए चुनौती बन सकती है. इसलिए किसानों को मौसम की जानकारी के आधार पर खाद, सिंचाई और कीटनाशक का इस्तेमाल करना चाहिए. खेत में जल निकासी की व्यवस्था भी मजबूत रखना जरूरी है जिससे ज्यादा पानी जमा होने से जड़ें खराब न हों. 

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