Fertilizers Using Tips: खेत में अच्छी पैदावार पाने के लिए मिट्टी की सेहत अच्छी होना सबसे जरूरी है. आज के वक्त में जब जमीन का उपजाऊपन लगातार कम हो रहा है तब सही खाद चुनना किसानों के लिए बहुत जरूरी गया है. बहुत से किसान इसी बात को समझ नहीं पाते हैं कि खर्च को कम रखते हुए किस खाद का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा पैदावार कैसे ली जाए. 

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अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी फसल को सही से पोषण मिले तो यह जानना बहुत जरूरी है कि कौन सी खाद आपके खेतों के लिए सबसे बढिया है. चलिए आपको बताते हैं  जानते हैं इन सभी खादों के बारे में विस्तार से पूरी जानकारी. 

गोबर की खाद

जब बात लंबे समय तक जमीन का उपजाऊपन बनाए रखने की आती है. तो पारंपरिक गोबर की खाद का कोई मुकाबला नहीं माना जाता है. यह नेचुरल खाद ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए बेस्ट है और यह मिट्टी की बनावट को सुधारने में बड़ा रोल निभाती है.

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  • फायदे: गोबर की खाद मिट्टी की पानी रोकने की क्षमता यानी वाॅटर रिटेंशन कैपेसिटी को काफी हद तक बढ़ा देती है तो इसके साथ ही यह जमीन को भुरभुरा बना देती है. जिससे पौधों की जड़ें गहराई तक आसानी से फैल पाती हैं.
  • इस्तेमाल का तरीका: इस्तेमाल में कुछ चीजों का ध्यान जरूर रखें कम से कम छह महीने से एक साल पुरानी, अच्छी तरह डीकंपोज हुई गोबर की खाद का ही इस्तेमाल खेतों में करना चाहिए. कच्ची खाद डालने से दीमक लगने का रिस्क बढ़ जाता है. इसे खेत की जुताई के वक्त मिट्टी में अच्छी तरह मिक्स करना बहुत फायदेमंद होता है.

यूरिया और डीएपी

जब फसल की बुआई हो जाए तो फिर उसके समय में अच्छी ग्रोथ के लिए केमिकल फर्टिलाइजर्स में डीएपी (DAP) और यूरिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. खेती की दुनिया में इन्हें सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. 

डीएपी का इस्तेमाल: बुआई के वक्त  डीएपी देने से पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और फसल का फुटाव शानदार होता है. इसमें मौजूद फास्फोरस जड़ों के सही विकास के लिए बहुत जरूरी है.

यूरिया का इस्तेमाल: यूरिया में नाइट्रोजन भरपूर मात्रा होकी है. यह पौधों को हरा-भरा रखने और उनकी ग्रोथ में मदद करती है. हालांकि इसका इस्तेमाल हमेशा सही क्वांटिटी में ही किया जाना चाहिए. क्योंकि जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल मिट्टी की सेहत को खराब कर सकता है.

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वर्मीकम्पोस्ट

आजकल की खेती में केंचुआ खाद यानी वर्मीकम्पोस्ट किसान काफी इस्तेमाल करते हैं. यह खाद बिना किसी साइड इफेक्ट के पौधों को सभी जरूरी न्यूट्रिएंट्स एक साथ दे देती है.

खासियत: इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ-साथ कई माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स होते हैं. जो मिट्टी के अंदर गुड बैक्टीरिया और मित्र जीवों की संख्या को बढ़ाने में मदद करते हैं.

इन चीजों में इस्तेमाल: इसका इस्तेमाल सब्जी वाली फसलों, अनाज और गार्डनिंग में बेझिझक किया जा सकता है. यह पौधों की बीमारियों से लड़ने की ताकत को मजबूत करती है और फसल की क्वालिटी सुधारती है.

एनपीके और पोटाश

जब फसल पर फूल आने और फल या दाने बनने का टाइम आता है. तब पौधों को खास पोषण की जरूरत होती है. इस स्टेज पर एनपीके (NPK) और पोटाश का सही कॉम्बिनेशन किसानों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होता है.

पोटाश के फायदे: पोटाश डालने से फसलों के दाने और फल साइज में बड़े, वजनदार और चमकदार बनते हैं. यह पौधों को खराब मौसम और कीड़ों के अटैक से बचाने में भी हेल्प करता है.

इस बात पर ध्यान दें 

हमेशा मिट्टी की टेस्टिंग रिपोर्ट और फसल की जरूरत के हिसाब से ही एनपीके या दूसरे फर्टिलाइजर्स का चुनाव करना चाहिए. सही टाइम पर सही मात्रा में खाद देने से ही लगाई गई लागत का पूरा रिटर्न मिलता है और बंपर पैदावार होती है.

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