Bio CNG For Vehicles: देश में इन दिनों में E20 पेट्रोल को लेकर खूब चर्चा हो रही है. E20 पेट्रोल में 80% पूरे पेट्रोल होता है तो वही 20% इथेनॉल की मिलावट होती है.  E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों के माइलेज पर असर पड़ा है तो वही उनकी परफॉर्मेंस में भी गिरावट देखने को मिली है. अब इसी बीच सरकार सीएनजी में भी ऐसी ही मिलावट करने जा रही है. गाय-भैंस का जो गोबर बेकार समझा जाता है उसके इस्तेमाल से अब सड़कों पर गाड़ियां दौड़ती नजर आएंगी.

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केंद्र ने 23,731 करोड़ रुपये की GOBARdhan नेशनल सर्कुलर बायोएनर्जी स्कीम को मंजूरी दी है. इससे गोबर और फसल के बचे हिस्से, फूड वेस्ट और दूसरे  कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG बनाने पर है. इस गैस को मौजूदा CNG और PNG सप्लाई में मिलाया जाएगा. यानी गांवों और खेतों से निकलने वाला कचरा अब सिर्फ कचरा नहीं रहेगा बल्कि गाड़ियां दौड़ती नजर आएगी. जानें पूरी

गोबर और खेती के कचरे से कैसे बनेगी बायो-CNG?

सरकार की GOBARdhan योजना में ऑर्गेनिक वेस्ट को कच्चे माल की तरह इस्तेमाल किया जाएगा. इसमें पशुओं का गोबर, फसल कटने के बाद बचा कचरा, नगरों से निकलने वाला ऑर्गेनिक कचरा, फूड वेस्ट और शुगर मिल से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल शामिल हैं. इन चीजों से पहले बायोगैस तैयार होगी और फिर उसकी सफाई करके CBG बनाई जाएगी. प्यूरिफिकेशन के बाद यह गैस केमिकल तौर पर नैचुरल गैस के काफी करीब होती है. यही वजह है कि इसे मौजूदा CNG और PNG नेटवर्क के जरिए सप्लाई करने की तैयारी है.

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इस पूरी प्रोसेस का फायदा सिर्फ एनर्जी सेक्टर को ही नहीं मिलेगा. बल्कि गांवों में गोबर और फसल के वेस्ट को इकट्ठा करने से नया लोकल बिजनेस मॉडल बन सकता है. किसान और गांव उद्यमी कच्चे माल की सप्लाई से कमाई कर सकते हैं. वहीं फसल के बचे हिस्से को उपयोगी बनाने से वेस्ट मैनेजमेंट की समस्या भी कम हो सकती है. यानी खेत और पशुपालन से निकलने वाली चीजों का इस्तेमाल करके गैस, जैविक खाद और कमाई के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं.

CNG में कितनी बायोगैस मिलाई जाएगी?

सरकार ने बायो-CNG की ब्लेंडिंग के लिए धीरे धीरे बढ़ने वाला टार्गेट रखा है. वित्त वर्ष 2026-27 में CNG और PNG सप्लाई में 3 प्रतिशत CBG ब्लेंडिंग का टारगेट है. इसके बाद वित्त वर्ष 2027-28 में इसे बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया जाएगा. वित्त वर्ष 2028-29 से यह हिस्सा 5 प्रतिशत किया जाएगा. इसके लिए सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों को तय मात्रा में CBG खरीदनी होगी. इससे बायो-CNG बनाने वाली कंपनियों को बाजार और खरीदार मिलने की ज्यादा निश्चितता रहेगी.

सरकार का बड़ा मकसद देश की गैस जरूरत के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करना भी है. भारत अपनी जरूरत की प्राकृतिक गैस का एक हिस्सा इंपोर्ट करता है. ऐसे में घरेलू स्तर पर CBG का प्रोडक्शन बढ़ने से इंपोर्टेड गैस पर दबाव कम हो सकता है. GOBARdhan स्कीम को वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू किया जाएगा. इसके तहत प्रोडक्शन बढ़ाने के साथ पाइपलाइन कनेक्टिविटी, फाइनेंस और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर को भी सपोर्ट देने की योजना है.

इस स्कीम में CBG प्रोड्यूसर्स के लिए सिर्फ ब्लेंडिंग का रास्ता नहीं बनाया गया है बल्कि प्रोजेक्ट को आर्थिक मदद देने की भी व्यवस्था है. नए CBG प्रोजेक्ट्स को प्रोडक्शन कैपेसिटी के हिसाब से आर्थिक मदद मिल सकती है. इसके अलावा पाइपलाइन कनेक्शन, MSME प्रोजेक्ट्स के लिए क्रेडिट गारंटी और फीडस्टॉक कलेक्शन से जुड़े कामों को भी सपोर्ट दिया जाएगा है. इससे नए प्लांट लगाने और पुराने प्लांट की कैपेसिटी बढ़ाने में मदद दी जाएगी. 

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ग्रामीण किसानों को होगा फायदा

अगर आपके पास CNG कार है तो इस बदलाव को लेकर ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. बायो-CNG की केमिकल स्ट्रक्चर नैचुरल गैस से काफी मिलती है. इसलिए इसे CNG के साथ मिलाने के लिए मौजूदा CNG कारों में किसी खास हार्डवेयर बदलाव की जरूरत नहीं बताई गई है. यानी जिस तरह E20 पेट्रोल के मामले में इंजन की कंपैटिबिलिटी चर्चा में आती है बायो-CNG ब्लेंडिंग में वैसी समस्या नहीं होगी. मौजूदा CNG गाड़ियां ब्लेंडेड गैस पर चल सकती हैं.

इसका फायदा आने वाले समय में सिर्फ कार मालिकों को नहीं बल्कि किसानों और ग्रामीण इलाकों को भी मिल सकता है. सरकार का मकसद अगले दशक में घरेलू CBG उत्पादन को कई गुना बढ़ाना है जिससे गैसे के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता बिल्कुल कम हो जाए.

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