Cold Storage At Farmhouse: खेती-किसानी में बंपर पैदावार के बाद अगर फसलों को सही समय पर सही बाजार न मिले तो वे खेत में ही सड़ने लगती हैं और किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ता है. इसी समस्या का परमानेंट इलाज करने के लिए अब आप अपने फार्म हाउस या खेत पर ही खुद का छोटा कोल्ड स्टोरेज बना सकते हैं. यह आधुनिक तरीका आपकी जेब को सालों साल मोटी कमाई से भरा रखेगा.

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क्योंकि इसके बाद आपको अपनी सब्जियों, फलों और अनाज को औने-पौने दामों में बेचने की मजबूरी नहीं होगी. आप अपनी फसल को लंबे समय तक पूरी तरह फ्रेश रख सकेंगे और जब बाजार में कीमतें सबसे ज्यादा होंगी तब उसे बेचकर तगड़ा मुनाफा कमा सकेंगे. सबसे अच्छी बात यह है कि आजकल ऐसे पोर्टेबल और मिनी कोल्ड स्टोरेज आ गए हैं जिन्हें लगाने का खर्च बहुत कम है और सरकार भी इसके लिए शानदार सब्सिडी दे रही है.

छोटे कोल्ड स्टोरेज को बनाने की तकनीक

अपने फार्म हाउस पर मिनी कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए आजकल पफ पैनल तकनीक का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है. यह एक तरह का रेडीमेड इंसुलेटेड केबिन होता है जिसे खेत के किसी भी कोने में बहुत आसानी से असेंबल किया जा सकता है. अगर खर्चे की बात करें तो 5 से 10 मीट्रिक टन की क्षमता वाला एक छोटा और आधुनिक कोल्ड स्टोरेज तैयार करने में लगभग 3 लाख से 5 लाख रुपये तक का शुरुआती निवेश आता है.

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इस खर्च में इंसुलेशन पैनल, कूलिंग मशीनरी, डिजिटल कंट्रोलर और स्टेबलाइजर जैसी सभी जरूरी चीजें शामिल होती हैं. इसके अलावा आजकल कम बिजली खपत वाले फाइव-स्टार रेटिंग वाले कंप्रेसर आते हैं जिससे हर महीने बिजली का बिल भी बेहद कम आता है और आपकी रनिंग कॉस्ट बजट में रहती है.

सालों साल बंपर कमाई का फॉर्मूला

यह छोटा कोल्ड स्टोरेज आपके बिजनेस मॉडल को पूरी तरह बदल देता है और हर सीजन में आपकी कमाई को पक्का करता है. उदाहरण के लिए आलू, टमाटर, मटर या हरी मिर्च जैसी जल्दी खराब होने वाली सब्जियों को आप इसमें हफ्तों तक सुरक्षित रखकर बाजार के उतार-चढ़ाव से बच सकते हैं. इसके अलावा आप आस-पास के दूसरे छोटे किसानों की फसल को भी किराए पर रखने की सुविधा देकर हर महीने एक्स्ट्रा रेगुलर इनकम जेनरेट कर सकते हैं. 

सरकार से मिलती है मदद

इस काम को बढ़ावा देने के लिए सरकार की राष्ट्रीय बागवानी मिशन जैसी योजनाओं के तहत किसानों को 35% से लेकर 50% तक की भारी सब्सिडी भी मिलती है. यानी आधा खर्च सरकार उठा लेती है. जिससे यह सौदा किसानों के लिए बेहद सस्ता और लाइफ-चेंजिंग साबित होता है.

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