Disaster Affected Crops Compensation: बिहार में कुदरत की मार झेल रहे किसानों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है. सरकार ने उन फसलों के नुकसान की भरपाई करने का फैसला लिया है. जो हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से बर्बाद हो गई थीं. इस सरकारी पहल का मकसद उन अन्नदाताओं के घाव पर मरहम लगाना है जिनकी मेहनत पर पानी फिर गया था.

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इसके लिए कृषि इनपुट अनुदान योजना के तहत आवेदन मांगे गए हैं. जिसकी आखिरी तारीख 5 मई तय की गई है. अगर आपकी फसल को भी नुकसान पहुंचा है. तो बिना देरी किए आपको इसके लिए अप्लाई कर देना चाहिए. यह मुआवजा सीधे आपके बैंक खाते में भेजा जाएगा. जिससे आप अगली फसल की तैयारी बिना किसी आर्थिक तंगी के शुरू कर सकें.

किन किसानों को मिलेगा योजना लाभ?

इस मुआवजे का फायदा उन जिलों के किसानों को मिलेगा जहां मौसम ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है. सरकार ने प्रभावित इलाकों का सर्वे कर उन जगहों की पहचान कर ली है. जहां फसल को 33 परसेंट से ज्यादा नुकसान पहुंचा है. खास बात यह है कि इस योजना का लाभ केवल जमीन के मालिक यानी रैयत किसान ही नहीं. 

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बल्कि दूसरों के खेतों पर खेती करने वाले गैर-रैयत किसान भी उठा सकते हैं. अगर आप बटाई पर खेती करते हैं. तो भी आप इस सहायता राशि के हकदार हैं. बस शर्त यह है कि नुकसान का सही आकलन पोर्टल पर दर्ज होना चाहिए और आपके दस्तावेज पूरी तरह अपडेट होने चाहिए.

  • योजना में असिंचित क्षेत्र के लिए प्रति हेक्टेयर 6800 रुपये की मदद दी जा रही है.
  • सिंचित क्षेत्र के किसानों को प्रति हेक्टेयर 13500 रुपये तक का मुआवजा मिल सकता है.

यह सहायता राशि अधिकतम दो हेक्टेयर तक की खेती के लिए ही मान्य होगी जिससे छोटे किसानों को प्राथमिकता मिले.

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आवेदन की पूरी प्रोसेस 

मुआवजे के लिए आवेदन करने का तरीका बहुत ही आसान रखा गया है. जिससे किसानों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें. आप घर बैठे या पास के किसी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं.

आवेदन करते समय आपके पास अपना किसान पंजीकरण नंबर, आधार कार्ड और बैंक खाते की जानकारी होनी चाहिए. बटाईदार किसानों के लिए एक स्व-घोषणा पत्र की भी जरूरत होगी. जिसे वार्ड सदस्य या कृषि समन्वयक से सत्यापित कराना होगा. ध्यान रहे कि आवेदन में दी गई जानकारी और बैंक अकाउंट के नाम में कोई गलती न हो. वरना पैसा अटक सकता है.

  • किसान अपना 13 अंकों का रजिस्ट्रेशन नंबर संभाल कर रखें क्योंकि इसी से आवेदन प्रोसेस होगा.
  • आवेदन करने के बाद मिलने वाली रसीद को सुरक्षित रखें ताकि भविष्य में स्टेटस चेक किया जा सके.

समय रहते आवेदन करने से जांच की प्रक्रिया जल्दी पूरी होगी और पैसा जल्द ही आपके अकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाएगा.

 5 मई के पहले करें आवेदन

सरकार ने साफ कर दिया है कि 5 मई के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा. इसलिए पोर्टल के बंद होने का इंतजार न करें क्योंकि आखिरी समय में सर्वर पर लोड बढ़ने से दिक्कत हो सकती है. आवेदन जमा होने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर नुकसान की जांच करेंगे.

एक बार वेरिफिकेशन पूरा होते ही फाइल आगे बढ़ा दी जाएगी. यह कदम उन किसानों के लिए एक नई शुरुआत की तरह है जिन्होंने कुदरत के कहर के आगे घुटने टेक दिए थे. इस मुआवजे से किसान अपनी बीज और खाद की जरूरतों को पूरा कर दोबारा खड़े हो सकेंगे.

  • पंचायत स्तर पर कृषि समन्वयक की मदद लेकर आप अपने आवेदन को सही तरीके से भर सकते हैं.
  • किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचने के लिए अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर को चालू रखें जिससे अपडेट्स मिलते रहें.

यह स्कीम मुश्किल वक्त में किसानों को सहारा देने की एक ईमानदार कोशिश है जिसका फायदा हर पात्र व्यक्ति को उठाना चाहिए.

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