Diesel Price Hike Impact On Farming: डीजल के दामों में 3 रुपये की बढ़ोतरी ने सिर्फ गाड़ियों की टंकी पर ही बोझ नहीं बढ़ाया है बल्कि इसका सीधा और गहरा असर हमारे खेतों और रसोई के बजट पर भी होने वाला है. आज के दौर की मॉडर्न खेती पूरी तरह से मशीनों और भारी ट्रांसपोर्टेशन पर टिकी हुई है जहां खेत तैयार करने से लेकर फसल को बड़ी मंडियों तक पहुंचाने में डीजल ही सबसे बड़ा फ्यूल है. 

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हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में जो यह बड़ी बढ़ोतरी हुई हैउसने सीधे तौर पर जरूरी सामानों की इनपुट कॉस्ट को बढ़ा दिया है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या हमारी थाली अब और महंगी होने वाली है. एक्सपर्ट्स की मानें तो इस 3 रुपये की बढ़ोतरी के कारण आने वाले दिनों में हर घर के बजट जरूर बढ़ जाएगा. चलिए आपको बताते हैं क्या-क्या हो जाएगा महंगा.

खेती की लागत बढ़ेगी तो अनाज होगा महंगा

डीजल महंगा होने का सबसे पहला और सीधा झटका किसान की जेब पर लगता है. आज के समय में ट्रैक्टर से खेत की जुताई करना, पंपिंग सेट से फसलों की सिंचाई करना और कंबाइन हार्वेस्टर से कटाई करना इन सभी कामों के लिए डीजल पहली जरूरत बन चुका है. जब डीजल के रेट बढ़ते हैं तो प्रति एकड़ खेती का खर्च काफी ज्यादा बढ़ जाती है. 

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इसके अलावा खेती में इस्तेमाल होने वाले फर्टिलाइजर्स और अन्य एग्रो-प्रोडक्ट्स की मैन्युफैक्चरिंग लागत भी फ्यूल प्राइस बढ़ने से ऊपर चली जाती है. किसान के लिए इस बढ़ी हुई लागत को खुद बर्दाश्त करना मुमकिन नहीं होता, जिससे अनाज, दालों और एडिबल ऑयल यानी खाने के तेल का बेस प्राइस बढ़ना बिल्कुल तय माना जा रहा है. 

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सब्जियों-दूध के दाम भी बढ़ेंगे

बढ़ती कीमतों का असर लॉजिस्टिक्स यानी ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ता है. जो हमारी रसोई से सीधा जुड़ा है. खेत से हरी सब्जियों, फलों और दूध जैसी रोजमर्रा की जरूरी चीजों को ट्रकों और कमर्शियल गाड़ियों में लादकर शहरों की मंडियों तक लाया जाता है. जब भारी वाहनों का फ्यूल महंगा होता है तो ट्रांसपोर्टर्स अपना माल भाड़ा बढ़ा देते हैं.

सब्जियां और दूध जैसी चीजें जल्दी खराब होने वाली होती हैं, इसलिए इन्हें तुरंत कोल्ड स्टोरेज या मार्केट पहुंचाना जरूरी होता. इस बढ़े हुए किराए का पूरा बोझ घूम-फिरकर एंड कंज्यूमर यानी हम और आप जैसे आम लोगों की जेब पर ही आता है जिससे मार्केट में सब्जियां और दूध के पैकेट महंगे हो जाते हैं.

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