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बारिश और जलभराव से नुकसान पर दिल्ली सरकार ने 50% बढ़ाया मुआवजा, किसान कैसे उठा सकते हैं इसका लाभ?

Delhi Government Farmers Compensation: दिल्ली में भारी बारिश और जलभराव से हुए फसल नुकसान के बाद सरकार ने मुआवजे की राशि में भारी बढ़ोतरी की है. इस राहत का फायदा उठाने इन स्टेप्स को करना होगा फॉलो.

Delhi Government Farmers Compensation: दिल्ली में भारी बारिश और जगह-जगह हुए जलभराव ने जहां आम लोगों की रफ्तार रोकी है. वहीं खेतों में खड़ी फसलों को भी तगड़ा नुकसान पहुंचाया है. किसानों की इसी मजबूरी और बर्बादी को देखते हुए दिल्ली सरकार ने एक बहुत बड़ा राहत पैकेज अनाउंस किया है. सरकार ने फसल नुकसान पर मिलने वाले मुआवजे की रकम को सीधे 50 परसेंट तक बढ़ा दिया है. जिससे अब किसानों को प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 75000 रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी. 

यह फैसला उन अन्नदाताओं के लिए किसी बड़ी संजीवनी से कम नहीं है जिनकी महीनों की मेहनत पानी में डूब गई थी. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसान भाई इस बढ़ी हुई रकम का फायदा कैसे उठा सकते हैं और उन्हें क्लेम पाने के लिए क्या करना होगा. चलिए आपको इसका पूरा प्रोसेस समझाते हैं.

मुआवजे के लिए इन स्टेप्स को करना होगा फॉलो

इस बढ़ी हुई राहत राशि को अपने बैंक अकाउंट तक पहुंचाने के लिए किसानों को एक तय प्रोसेस से गुजरना होगा. सबसे पहले सरकार की तरफ से रेवेन्यू डिपार्टमेंट की टीमें प्रभावित इलाकों का दौरा करेंगी और जमीनी स्तर पर हुए नुकसान का पूरा सर्वे यानी गिरदावरी करेंगी. किसानों को अपने स्थानीय पटवारी या जिला प्रशासन के दफ्तर में जाकर फसल खराबे की लिखित जानकारी देनी होगी.

इसके साथ ही अपनी जमीन के जरूरी दस्तावेज जैसे खसरा-खतौनी सबमिट करने होंगे. इसके बाद सरकारी टीमें मौके पर आकर फोटो और वीडियोग्राफी के जरिए नुकसान का असेसमेंट करेंगी. एक बार जब आपकी रिपोर्ट वेरीफाई होकर अप्रूव हो जाएगी तो मुआवजे की रकम सीधे आपके आधार से लिंक्ड बैंक अकाउंट में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए ट्रांसफर कर दी जाएगी.

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इन बातों का रखें ध्यान वरना अटक सकता है पैसा

सरकारी मदद का लाभ उठाने के लिए कुछ बेहद जरूरी गाइडलाइंस को फॉलो करना जरूरी है. वरना आपका क्लेम रिजेक्ट भी हो सकता है. सबसे पहली बात यह है कि मुआवजा सिर्फ उन्हीं खेतों के लिए मिलेगा जहां वास्तव में एक्टिव रूप से खेती की जा रही थी और बारिश या जलभराव की वजह से फसल को नुकसान पहुंचा है. जिन लोगों ने अपनी जमीन का लैंड यूज बदल लिया है या जो जमीनें विवादित हैं. 

उन्हें इस स्कीम का कोई फायदा नहीं मिलने वाला है. इसके अलाव किसानों को सलाह दी जाती है कि वे नुकसान होते ही तुरंत अपने स्तर पर भी फोटो या वीडियो बनाकर रख लें और बिना किसी देरी के लोकल एडमिनिस्ट्रेशन को सूचित करें क्योंकि देरी होने पर नुकसान का सही आकलन करना मुश्किल हो जाता है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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