Delayed Monsoon In India: इस साल की गर्मी ने पूरे देश को झुलसा कर रख दिया है. खेत सूखे पड़े हैं, मिट्टी में दरारें हैं और किसान आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं कि आखिर मानसून कब आएगा. हर साल जून के पहले हफ्ते तक मानसून दस्तक दे देता था, लेकिन इस बार मानसून की रफ्तार काफी धीमी है. साथ ही मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ ने दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार को धीमा कर दिया है, जिसकी वजह से मध्य और उत्तरी भारत में अगले कुछ हफ्तों तक सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है. ऐसे में किसानों के मन में एक ही सवाल है अगर मानसून देर से आया तो बुवाई कब और कैसे करें? आइए जानते हैं इस पर विशेषज्ञो का क्या कहना हैं. 

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विशेषज्ञों की चेतावनी  इस बार कम बारिश की संभावना

इस साल मुख्य कृषि क्षेत्रों में मानसून के धीमे आगे बढ़ने और सामान्य से कम बारिश होने की वजह से बुवाई के काम पर असर पड़ सकता है. कृषि विशेषज्ञ साफ कह रहे हैं कि जो किसान जल्दबाजी में बुवाई कर देंगे, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. वहीं महाराष्ट्र सरकार के कृषि एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने किसानों को साफ चेतावनी दी है कि समय से पहले बुवाई करने पर फसल को नुकसान हो सकता है, क्योंकि मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं बन पाएगी जो सफल बुवाई के लिए जरूरी है. इसलिए इस बार सबसे जरूरी है कि किसान धैर्य रखें और बिना बारिश के बुवाई की गलती न करें. 

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कृषि विभाग की सलाह कब और कैसे करें बुवाई

कृषि अधिकारियों ने किसानों को बुवाई का काम जल्दबाजी में शुरू न करने की सलाह दी है और कहा है कि 15 जून से पहले मानसून की अच्छी और व्यापक बारिश होने की संभावना बहुत कम है. वहीं कृषि विभाग के अनुसार बुवाई तभी शुरू करें जब खेत में कम से कम 4 इंच यानी करीब 100 मिलीमीटर बारिश हो चुकी हो और मिट्टी की ऊपरी परत अच्छी तरह गीली हो जाए. साथ ही रागी, सोयाबीन, मक्का और मूंगफली जैसी फसलों की बुवाई देरी से करने की सलाह दी गई है.

इसके अलावा उन्होंने ये भी बताया कि अगर मानसून जुलाई की शुरुआत तक भी न आए तो कम पानी में तैयार होने वाली फसलें जैसे बाजरा, मूंग और उड़द की बुवाई करें, ये कम बारिश में भी अच्छी पैदावार देगी. वहीं खेत की जुताई, मिट्टी परीक्षण और बीजों का इंतजाम पहले से कर लें. मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी रखें और कृषि विभाग की सलाह का पालन करें ताकि सही समय पर और सही तरीके से बुवाई हो सके.  

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