आज के दौर में खेती का तरीका तेजी से बदल रहा है और जो किसान लीक से हटकर कुछ नया कर रहे हैं. वे पारंपरिक फसलों के मुकाबले कई गुना ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं. खेती-किसानी में अगर सबसे तगड़े मुनाफे की बात की जाए तो इन दिनों खजूर की खेती बढ़िया मुनाफा दे रही है. आम तौर पर लोगों को लगता है कि खजूर के पेड़ सिर्फ रेगिस्तान में ही हो सकते हैं. लेकिन कृषि तकनीकों ने अब इस दिक्कत को भी काफी हद तक दूर कर दिया है. 

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कम पानी और रेतीली या बंजर जमीन पर भी आसानी से उगने वाली यह फसल किसानों की किस्मत किसानों की किस्मत पलट सकती है. अगर सही प्लानिंग और आधुनिक तरीकों से इसकी खेती की जाए. तो एक एकड़ जमीन से साल भर में लाखों रुपयों की कमाई की जा सकती है. बाजार में खजूर की मांग पूरे साल बनी रहती है. फिर चाहे बात ताजे फलों की हो या फिर सर्दियों और त्योहारों में बिकने वाले ड्राई फ्रूट रूपी छुआारों की. जानें इसमें आने वाली लागत और कमाई का कुल हिसाब. 

इन बातों का रखें ध्यान

खजूर की खेती से अच्छी कमाई हासिल करने के लिए सबसे पहला और सबसे जरूरी काम है सही वैरायटी का चुनाव करना. आजकल कृषि विशेषज्ञ किसानों को पारंपरिक बीजों के बजाय टिशू कल्चर से तैयार किए गए पौधे लगाने की सलाह देते हैं. क्योंकि ये पौधे पूरी तरह रोग-मुक्त होते हैं और सामान्य पौधों के मुकाबले बहुत तेजी से बढ़ते हैं. बाजार में बरही और मेडजूल जैसी प्रीमियम किस्में सबसे ज्यादा डिमांड में हैं. 

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जिनकी मार्केट वैल्यू बहुत तगड़ी मिलती है. टिशू कल्चर वाले पौधों की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि इनमें समय से पहले फल आने लगते हैं और किसान कम समय में ही अपनी लागत निकालकर मुनाफे में आ जाते हैं. एक अच्छे और स्वस्थ पेड़ से साल भर में 70 से 100 किलो तक की शानदार पैदावार आसानी से मिल जाती है. 

खेती में कुल कितना खर्च आता है?

एक एकड़ में खजूर की बागवानी शुरू करने पर आने वाले शुरुआती खर्च के आंकड़ों की बात की जाए तो एक एकड़ में लगभग 60 से 70 पौधे लगाए जाते हैं. जहां अच्छी क्वालिटी का एक टिशू कल्चर पौधा 2500 से 3500 रुपये तक आता है जिससे पौधों पर कुल 1.75 लाख रुपये से 2.20 लाख रुपये खर्च होते हैं. इसके बाद खेत की जुताई, 3x3 फीट के गड्ढे खोदना और मिट्टी उपचार पर 20000 रुपये से 30000 रुपये लगते हैं. 

पौधों तक नमी बनाए रखने के लिए ड्रिप इरिगेशन या टपक सिंचाई प्रणाली लगवाने में 35000 रुपये से 50000 रुपये का खर्च आता है. जिस पर सरकार सब्सिडी भी देती है. शुरुआती एक साल में जैविक खाद, माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स और लेबर पर 25000 रुपये से 35000 रुपये का खर्च और जुड़ जाता है. इस तरह एक एकड़ में बाग तैयार करने का कुल शुरुआती खर्च लगभग 2.5 लाख रुपये से 3.3 रुपये लाख के आसपास बैठता है.

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कितना होता है एक एकड़ में मुनाफा?

खजूर की खेती से सिर्फ कच्चा फल बेचने से ही मुनाफा नहीं मिलता बल्कि इसकी सही समय पर प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन भी किसानों को अच्छे पैसे दिलाती है. एक एकड़ में लगे 60 से 70 पेड़ों से कुल मिलाकर साल भर में लगभग 4500 से 6000 किलोग्राम तक खजूर की पैदावार मिल जाती है. जब किसान ताजे खजूर को सीधे थोक बाजार में बेचते हैं. तो 60 रुपये से 100 रुपये प्रति किलो के भाव से आसानी से 3 से 5 लाख रुपये मिल सकते हैं.

वहीं अगर किसान इन फलों को सुखाकर अच्छी क्वालिटी के छुआरे तैयार कर लेते हैं. जिनका बाजार भाव 150 रुपये से 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक होता है. तो उनकी कुल कमाई बढ़कर 6 लाख से 12 लाख रुपये सालाना तक पहुंच सकती है. 

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