Buffalo Health Tips: डेयरी फार्मिंग या पशुपालन से जुड़े लोगों के लिए सबसे बड़ा झटका तब लगता है. जब अच्छा खासा दूध देने वाली भैंस अचानक दूध देना कम कर देती है. कई बार किसान समझ नहीं पाते कि रातों-रात ऐसा क्या हो गया कि बाल्टी आधी रह गई. आमतौर पर लोग चारा बदलने या कोई घरेलू नुस्खा अपनाने लगते हैं. लेकिन यह तरीका हर बार काम नहीं करता.
दूध कम होने के पीछे सिर्फ भूख या थकान नहीं. बल्कि कोई छुपी हुई बीमारी या उनके शरीर में दिक्कतें भी हो सकती है. अगर आपकी भैंस के साथ भी ऐसा हुआ है. तो परेशान होने के बजाय आपको तुरंत अलर्ट हो जाना चाहिए. चलिए आपको बताते हैं ऐसे में सबसे पहले किस चीज की जांच करानी जरूरी है.
मस्टाइटिस यानी थनैला बीमारी की तुरंत कराएं जांच
भैंस का दूध अचानक कम होने पर सबसे पहला और बड़ा शक थनैला बीमारी पर जाना चाहिए. यह एक खतरनाक बैक्टीरियल इंफेक्शन है जो थनों में होता है. कई बार शुरुआती स्टेज में थनों में कोई सूजन या लाली बाहर से नहीं दिखती. जिसे सब-क्लीनिकल मस्टाइटिस कहते हैं. लेकिन अंदर ही अंदर दूध का प्रोडक्शन गिर जाता है.
इसलिए बिना देर किए सबसे पहले पशु डॉक्टर से दूध की जांच कराएं. अगर थन से आ रहा दूध फटा हुआ, पानी जैसा या उसमें खून के अंश दिखें. तो समझ जाएं कि गड़बड़ यही है. वक्त पर जांच और इलाज न होने पर भैंस के थन हमेशा के लिए खराब हो सकते हैं.
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पेट के कीड़े और पेट की खराबी का टेस्ट
दूसरी सबसे आम वजह है भैंस के पेट में कीड़े होना या उसका हाजमा बिगड़ जाना. अगर थनैला की रिपोर्ट नॉर्मल आती है. तो तुरंत भैंस के गोबर की जांच कराएं. पेट में कीड़े होने पर भैंस जो भी पौष्टिक चारा खाती है. उसका न्यूट्रिशन कीड़े सोख लेते हैं और भैंस अंदर से कमजोर हो जाती है. जिससे दूध एकदम से कम हो जाता है.
इसके अलावा अचानक चारा बदलने से भी पेट का एसिडिक बैलेंस बिगड़ जाता है. डॉक्टर की सलाह पर कीड़े मारने की दवा दें और अच्छे क्वालिटी का पाचक लीवर टॉनिक शुरू करें जिससे उसका हाजमा दुरुस्त हो औरदूध देने की कैपेसिटी फिर से नॉर्मल हो सके.
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