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गांव में खुद शुरू कर सकते हैं डेयरी फार्मिंग, सरकार देती है लोन

Dairy Farming: गांव में अपना बिजनेस शुरू करने वालों के लिए डेयरी फार्मिंग एक बेहतरीन मौका है. सरकार इसके लिए लोन और सब्सिडी की बड़ी सुविधाएं दे रही है. जान लीजिए इसे शुरू करने की पूरी प्रक्रिया.

Dairy Farming:  गांव में रहकर अपना खुद का बिजनेस शुरू करने का सपना अब बस सपना नहीं रह गया है. डेयरी फार्मिंग एक ऐसा एवरग्रीन सेक्टर है जिसमें कभी मंदी नहीं आती क्योंकि दूध और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स की डिमांड हर घर में सुबह-शाम रहती है. अच्छी बात यह है कि अब इसके लिए आपको अपनी पूरी जमा-पूंजी दांव पर लगाने की जरूरत नहीं है. सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए बहुत ही शानदार स्कीम्स और लोन की सुविधा दे रही है.

अगर आपके पास थोड़ी जमीन और मेहनत करने का जज्बा है. तो आप अपने ही गांव में रहकर एक मुनाफे वाला स्टार्टअप खड़ा कर सकते हैं. यह डेयरी फार्मिंग न केवल आपको आत्मनिर्भर बनाएगी बल्कि गांव के दूसरे लोगों को भी रोजगार देने का मौका देगी. किसान भाई जान लें अपने फायदे की बात.

डेयरी शुरू करने के लिए सरकार देगी मदद

डेयरी फार्मिंग शुरू करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें पशुपालन अवसंरचना विकास निधि जैसी कई योजनाओं के जरिए आर्थिक मदद पहुंचा रही हैं. इसमें सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको बैंक से लोन मिलने में आसानी होती है और इसके साथ ही ब्याज में भारी छूट भी मिलती है. कई राज्यों में तो दुधारू पशु खरीदने के लिए 25% से लेकर 50% तक की सब्सिडी का प्रावधान है जिससे आपकी शुरुआती लागत काफी कम हो जाती है.

  • नाबार्ड की डेयरी एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट स्कीम के तहत पशुपालक सीधे वित्तीय सहायता ले सकते हैं.
  • महिला उद्यमियों और एससी-एसटी वर्ग के लिए सब्सिडी की दरें और भी आकर्षक रखी गई हैं.

इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए बस आपको एक अच्छी प्रोजेक्ट रिपोर्ट और बेसिक दस्तावेजों की जरूरत होती है.

यह भी पढ़ें: किचन गार्डन में ऐसे करें धनिया-मिर्चा की खेती, सब्जी वाले से मांगने की नहीं पड़ेगी जरूरत

पशुओं का चुनाव और चारे के मैनेजमेंट पर दें ध्यान

डेयरी का बिजनेस सफल होगा या नहीं यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आपने गाय या भैंस की कौन सी नस्ल चुनी है. गिर, साहिवाल जैसी गायें और मुर्रा नस्ल की भैंसें दूध उत्पादन के मामले में सबसे बेस्ट मानी जाती हैं. इसके साथ ही पशुओं के रहने की जगह हवादार और साफ-सुथरी होनी चाहिए ताकि वे बीमार न पड़ें. मॉडर्न तरीके से खेती करके आप घर पर ही हरा चारा उगा सकते हैं जिससे बाहर का खर्चा कम होगा.

  • साइलेज यानी अचार चारा बनाकर आप गर्मियों के सीजन के लिए भी बेहतरीन फीड बैकअप तैयार कर सकते हैं.
  • पशुओं का समय पर टीकाकरण और हेल्थ चेकअप उनके दूध देने की क्षमता को बनाए रखता है.

सही नस्ल और अच्छे खान-पान का मेल आपके डेयरी फार्म को बहुत जल्दी मुनाफे की पटरी पर ले आता है.

इन तरीकों से बढ़ाएं कमाई

आज के वक्त में डेयरी फार्मिंग में सिर्फ दूध बेचकर कमाई नहीं होती है. बल्कि आज के समय में दूध से दही, पनीर, घी या खोया बनाकर आसपास के शहरों में सप्लाई करते हैं. तो आपकी कमाई दोगुनी हो सकती है. आजकल लोग गांव के शुद्ध घी और बिना मिलावट वाले दूध के लिए ऊंची कीमत देने को तैयार रहते हैं. सोशल मीडिया और लोकल नेटवर्क के जरिए आप अपना खुद का ब्रांड भी शुरू कर सकते हैं.

  • दूध को सीधे डेयरियों में बेचने के बजाय अपने खुद के कस्टमर बेस पर फोकस करना ज्यादा फायदेमंद है.
  • गोबर से खाद बनाकर या बायोगैस प्लांट लगाकर आप फार्म का एक्स्ट्रा खर्चा आसानी से निकाल सकते हैं.

डेयरी फार्मिंग अब सिर्फ खेती का हिस्सा नहीं बल्कि एक हाई-टेक बिजनेस बन चुका है जो गांव की तस्वीर बदल रहा है.

यह भी पढ़ें: कहीं आपकी गाय-भैंस बीमार तो नहीं? ऐसे करें पहचान, नहीं तो होगा तगड़ा नुकसान

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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