भारतीय किसानों के लिए खेती करना हमेशा से जोखिम भरा रहा है. कभी सूखा, कभी बाढ़ तो कभी ओलावृष्टि महीनों की मेहनत पर पानी फेर देती है. इन प्राकृतिक आपदाओं के अलावा एक और बड़ी समस्या है, जिससे देश के लाखों किसान हर साल जूझते हैं- वह है जंगली जानवरों द्वारा फसलों को बर्बाद करना. नीलगाय, जंगली सूअर, हाथी और बंदरों का झुंड रातों-रात लहलहाती फसलों को नष्ट कर देता है.

Continues below advertisement

लंबे समय से देश भर के किसान यह मांग कर रहे थे कि जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को भी फसल बीमा के दायरे में लाया जाए. कृषि मंत्रालय के नए नियमों के तहत किसानों को इस बड़ी समस्या से राहत दे दी गई है. अब सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर जंगली जानवर आपकी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं, तो आपको प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत उचित मुआवजा मिलेगा.

पहले क्या थे नियम और अब क्या हुआ बदलाव?

पहले के नियमों के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में केवल उन्हीं आपदाओं को शामिल किया जाता था, जो इंसानों के नियंत्रण से बाहर थीं. जैसे सूखा, ओलावृष्टि या चक्रवातॉ. जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को रोकथाम के योग्य माना जाता था, इसलिए इसे मुख्य बीमा कवर में जगह नहीं मिलती थी. लेकिन जमीनी हकीकत को देखते हुए सरकार ने इस व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है.

Continues below advertisement

नए दिशा-निर्देशों के तहत राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने राज्यों में जंगली जानवरों से होने वाले नुकसान को एक अतिरिक्त कवर के रूप में शामिल कर सकती हैं. इसका मतलब यह है कि जिन क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष अधिक है, वहां के किसानों को अब अपनी डूबी हुई पूंजी वापस मिल सकेगी.

मुआवजा पाने के लिए क्या है क्लेम की प्रक्रिया?

अगर किसी किसान भाई की फसल को जंगली जानवरों ने नुकसान पहुंचाया है, तो मुआवजा पाने के लिए एक तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है. नए नियमों के मुताबिक, नुकसान होने के ठीक 72 घंटे के भीतर इसकी आधिकारिक सूचना देना जरूरी होता है. किसान सीधे फसल बीमा ऐप पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. शिकायत दर्ज करते समय अपने प्रभावित खेत की लोकेशन के साथ तस्वीर जरूर अपलोड करें.

इसके अलावा किसान सरकार के आधिकारिक टोल-फ्री नंबर 14447 पर भी कॉल करके अपनी समस्या बता सकते हैं. सूचना मिलने के बाद राजस्व और कृषि विभाग की एक संयुक्त टीम मौके पर आकर व्यक्तिगत स्तर पर नुकसान का आकलन करती है और रिपोर्ट के आधार पर क्लेम की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में भेज दी जाती है.

यह भी पढ़ें: खेत में लगी सब्जियों में लग रहे रहे हैं कीड़े? नुकसान से पहले करें ये काम

राज्यों के हिसाब से तय होते हैं नियम

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना का यह हिस्सा स्वैच्छिक है. यानी कौन से जंगली जानवरों को इस लिस्ट में रखना है और इसे किन-किन जिलों में लागू करना है, इसका अंतिम फैसला राज्य सरकारें अपनी जरूरत के हिसाब से करती हैं. उदाहरण के तौर पर, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल जैसे राज्यों में जहां जंगलों के पास वाले इलाकों में हाथियों या जंगली सूअरों का आतंक ज्यादा रहता है, वहां यह नियम किसानों के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित हो रहा है.

हाल ही में केरल सरकार ने तो वन्यजीवों के हमले से फसलों के नुकसान पर दी जाने वाली मुआवजा राशि को सीधे दोगुना कर दिया है, जिससे किसानों को प्रति फल और प्रति किलोग्राम के हिसाब से बड़ी राहत मिल रही है.

यह भी पढ़ें: किसानों को 6 लाख तक लोन, ब्याज सिर्फ 6%! जानें कैसे मिलेगा फायदा