आजकल खेती की दुनिया में ऑर्गेनिक फार्मिंग का ट्रेंड बहुत तेजी से बढ़ रहा है. महंगे केमिकल्स और जहरीले कीटनाशकों से खराब हो रही जमीन को सुधारने के लिए हर किसान अब नेचुरल तरीकों की तरफ शिफ्ट होना चाहता है. जैविक खेती की रीढ़ मानी जाती है ऑर्गेनिक खाद, और इसमें सबसे पहला नाम देसी गोबर की खाद का ही आता है. 

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लेकिन देखा जाता है कि किसान बस पशुओं के बाड़े से ताजा गोबर उठाते हैं ट्रॉली में भरते हैं और सीधे खेत में बिखेर देते हैं. उन्हें लगता है कि गोबर तो खाद ही है सीधा खेत में जाएगा तो फायदा ही करेगा. लेकिन क्या यह तरीका वाकई सही है? तो आपको बता दें बिल्कुल नहीं. बिना ट्रीट किया हुआ कच्चा गोबर खेत के लिए खाद नहीं बल्कि सीधा नुकसान साबित होता है. अगर आपको भी अपनी जमीन में गोबर डालना है. तो सबसे पहले कुछ जरूरी काम जरूर कर लें.

कच्चा गोबर सीधे खेत में डालना क्यों है खतरनाक?

ताजा गोबर देखने में भले ही सादा लगे पर खेत में जाते ही यह कई तरह की मुसीबतें खड़ी कर देता है. कच्चे गोबर में मीथेन और अमोनिया गैसों का भारी दबाव होता है. जिससे जबरदस्त हीट पैदा होती है. यह हीट बीजों के जमाव को रोकती है और पौधों की जड़ों को झुलसा देती है. इसके अलावा दीमक और सफेद लट जैसे खतरनाक कीट कच्चे गोबर में तेजी से अपनी जगह बना लेते हैं.

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जो आगे चलकर आपकी फसल की जड़ों को खा जाते हैं. मवेशी जो चारा खाते हैं उनके खरपतवार वाले बीज बिना पचे गोबर के जरिए खेत में पहुंच जाते हैं और पूरे खेत में अनचाहे घास-फूस का जाल फैला देते हैं. तो इसके साथ ही हानिकारक फंगल बैक्टीरिया एक्टिव होकर पौधों में जड़ गलन और तना सड़न जैसी बीमारियां पैदा कर देते हैं.

खेत में डालने से पहले करें यह जरूरी काम करें

अगर गोबर को खेत में सही से इस्तेमाल करना है. तो उसे डालने से पहले अच्छी तरह सड़ाना यानी डीकंपोज करना जरूरी है. इसके लिए खेत के किसी ऊंचे हिस्से में 3 से 4 फीट गहरा गड्ढा बनाएं. इसमें गोबर, गोमूत्र, सूखे पत्ते और फसलों के कचरे की परतें बिछाएं. हर परत पर थोड़ा पानी और वेस्ट डीकंपोजर या गुड़-बेसन के घोल का छिड़काव करें. 

फंगस से बचाव के लिए इसमें ट्राइकोडर्मा पाउडर जरूर मिलाएं. गड्ढे को ऊपर से मिट्टी या तिरपाल से अच्छे से ढक दें ताकि अंदर हाई टेम्परेचर बने. उच्च तापमान की वजह से सभी हानिकारक कीड़े, लार्वे और खरपतवार के बीज अंदर ही खत्म हो जाते हैं. करीब 60 से 75 दिनों के अंदर गोबर पूरी तरह गलकर गहरे काले-भूरे रंग का और बिना बदबू वाला भुरभुरा खाद बन जाता है.

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खेत में कब डालना चाहिए गोबर खाद

पूरी तरह पकी हुई खाद तैयार होने के बाद उसे खेत में मिलाने का तरीका भी सही होना चाहिए. इसे हमेशा फसल की बुवाई या रोपाई से 15 से 20 दिन पहले आखिरी जुताई के वक्त ही पूरे खेत में एकसार बिखेरें. खाद डालने के तुरंत बाद रोटावेटर या कल्टीवेटर चलाकर मिट्टी में मिला दें. जिससे धूप से इसके पोषक तत्व हवा में न उड़ें. 

जब यह अच्छी तरह सड़ी हुई खाद मिट्टी में मिलती है.तो जमीन का ऑर्गेनिक कार्बन तेजी से बढ़ता है. मिट्टी की नमी सोखने की ताकत सुधरती है और केंचुए एक्टिव हो जाते हैं. पौधों को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश बिना किसी केमिकल के नेचुरल रूप से मिलता है, जिससे फसल हरी-भरी रहती है और पैदावार में एकदम बढ़िया तरह की चमक देखने को मिलती है.

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