आलू की खेती करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही किस्म चुनने की रहती है. कई बार उपज अच्छी होने के बाद भी मंडी में रेट गिर जाता है. जिससे पूरे सीजन की मेहनत का हिसाब बिगड़ जाता है. ऐसे में किसान अब उन वैरायटी पर फोकस कर रहे हैं जिनकी डिमांड आम बाजार के साथ प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में भी बनी रहती है. चिप्सोना आलू ऐसी ही खास वैरायटी है. 

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इसका इस्तेमाल खासतौर पर चिप्स बनाने में किया जाता है. देश में बहुत से किसान इसकी खेती कर रहे हैं. यह फसल करीब 90 दिनों में तैयार हो सकती है. हालांकि मौसम के साथ मिट्टी और देखभाल के हिसाब से समय में थोड़ा अंतर हो सकता है. चलिए आपको बताते हैं  कैसे आप चिप्सोना आलू की खेती से कर सकते हैं अच्छी कमाई. 

खेत तैयार करते समय इन बातों का रखें ध्यान

चिप्सोना आलू की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी बेहतर मानी जाती है. खेत में पानी की निकासी अच्छी होनी चाहिए. ज्यादा देर तक पानी भरा रहने से आलू के कंद सड़ सकते हैं. बुवाई से पहले खेत की दो से तीन बार जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाएं. 

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आखिरी जुताई के समय अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद डाल सकते हैं. इससे मिट्टी में ऑर्गेनिक मैटर बढ़ता है और पौधों की शुरुआती ग्रोथ को सपोर्ट मिलता है.उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में इसकी बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच की जा सकती है. बीज खरीदते समय सर्टिफाइड और रोगमुक्त आलू ही चुनें. 

बीज के लिए मीडियम साइज के कंद सही रहते हैं. बुवाई से पहले कंदों का ट्रीटमेंट कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें. खेत में लाइन बनाकर बीज लगाने से सिंचाई, मिट्टी चढ़ाने और खुदाई का काम आसान रहता है. पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखने से कंदों को फैलने की जगह मिलती है और आलू का साइज बेहतर हो सकता है.

सिंचाई और खाद का सही बैलेंस जरूरी

बुवाई के बाद खेत में नमी का बैलेंस बनाए रखना बेहद जरूरी है. मिट्टी बहुत सूखी रहने से अंकुरण और कंद बनने की प्रोसेस प्रभावित हो सकती है. वहीं ज्यादा सिंचाई करने पर जड़ों में सड़न का खतरा बढ़ जाता है. पहली सिंचाई मिट्टी में मौजूद नमी देखकर करनी चाहिए. इसके बाद मौसम और जमीन की स्थिति के अनुसार हल्की सिंचाई करते रहें. खेत में किसी भी हिस्से में पानी जमा न होने दें. बूंद बूंद सिंचाई की सुविधा होने पर पानी का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है.

पौधों की ग्रोथ शुरू होने के बाद खरपतवार हटाना भी जरूरी है. करीब 20 से 25 दिनों में हल्की निराई गुड़ाई करके पौधों की जड़ों के पास मिट्टी चढ़ाएं. खाद कितना देना इसके लिए मिट्टी की जांच करना सही रहता है. नाइट्रोजन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने पर पौधे की पत्तियां तो बढ़ सकती हैं मगर कंदों की क्वालिटी प्रभावित हो सकती है. सही पोषण मिलने पर आलू का साइज, वजन और प्रोसेसिंग क्वालिटी बेहतर रहती है.

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फसल को रोग से बचाएं

चिप्सोना आलू की फसल में झुलसा रोग समेत कई फंगल बीमारियों का खतरा रहता है. पत्तियों पर भूरे धब्बे दिखें तो तुरंत निगरानी बढ़ाएं. संक्रमित हिस्सों को खेत से हटाएं और कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर उचित दवा का इस्तेमाल करें. माहू समेत दूसरे कीट दिखाई देने पर भी समय रहते कंट्रोल करना जरूरी है. बिना जरूरत के केमिकल स्प्रे करने से लागत बढ़ सकती है. इसलिए रोग और कीट की पहचान के बाद ही ट्रीटमेंट चुनें.

90 दिनों में शुरू हो सकती है खुदाई

फसल करीब 90 दिनों में खुदाई के लायक हो सकती है. पौधों की पत्तियां पीली पड़ने लगें और ऊपरी हिस्सा सूख जाए तो समझ लीजिए आलू तैयार हो गया. खुदाई से कुछ दिन पहले सिंचाई रोक देनी चाहिए. इससे आलू का छिलका मजबूत होता है और खुदाई के दौरान नुकसान कम होता है. आलू निकालने के बाद उन्हें कुछ समय छायादार जगह पर सुखाएं. चिप्स बनाने वाली यूनिट से पहले संपर्क होने पर बिक्री का बेहतर रेट मिल सकता है. किसान स्थानीय बाजार और प्रोसेसिंग कंपनियों के रेट कंपेयर करके ही फसल बेचें.

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