सर्दियों का मौसम आने वाला है और इस मौसम में फूलगोभी की सब्जी खूब खाई जाती है. कई लोग इसके परांठे बनाकर खाते है. इसलिए किसानों को भी इसकी खेती से अच्छा मुनाफा होता है. लेकिन इसकी खेती में अच्छी पैदावार चाहिए तो आपको नर्सरी से ही इसकी खास तैयारी करनी होगी. बता दें कि फूलगोभी के बीज बोने के बाद के शुरुआती 15 दिन काफी अहम माने जाते हैं. 

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इस दौरान हुई छोटी सी लापरवाही पौध को कमजोर कर सकती है और इसका असर बाद में पूरी फसल पर देखने को मिल सकता है. इसलिए किसान को शुरुआत से ही पानी, नमी, तापमान और पौधों की सेहत पर नजर रखनी चाहिए. दरअसल फूलगोभी की छोटी पौध काफी नाजुक होती है. नर्सरी में जरूरत से ज्यादा पानी भर जाए मिट्टी लंबे समय तक गीली रहे या पौधे बहुत घने निकल आएं तो परेशानी बढ़ सकती है. जान लें किन बातों का रखना है ध्यान.

पहले 15 दिन काफी अहम

फूलगोभी की खेती में पहले 15 दिन काफी अहम माने जाते हैं. बीज बोने के बाद किसान का ध्यान नर्सरी में सही नमी बनाए रखने पर होना चाहिए. इसका मतलब यह नहीं कि क्यारी को हर समय पानी से भरा रखा जाए. मिट्टी में इतनी नमी रहे कि बीज आसानी से अंकुरित हो सकें और नई जड़ों को पानी मिलता रहे. जरूरत पड़ने पर हल्की सिंचाई करें. तेज धार से पानी डालने से छोटे पौधे और मिट्टी दोनों प्रभावित हो सकते हैं.

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नर्सरी के लिए उठी हुई क्यारियां तैयार करना फायदेमंद रहता है. क्योंकि इससे एक्सट्रा पानी बाहर निकलने में आसानी होती है. बारिश होने पर में पानी क्यारी में रुकना नहीं चाहिए. शुरुआती दिनों में पौधों को सही रोशनी भी मिलनी चाहिए. लेकिन मौसम बहुत गर्म हो तो तेज धूप से बचाने के लिए जरूरत के मुताबिक हल्की छाया दी जा सकती है. 

पौध गिरने लगे तो तुरंत समझें गड़बड़ है

फूलगोभी की नर्सरी में डैम्पिंग ऑफ यानी पौध गलकर गिरने की समस्या किसानों को नुकसान पहुंचा सकती है. इसमें कई बार बीज अंकुरित होने के आसपास ही खराब हो जाता है. वहीं बाहर निकल चुकी छोटी पौध का तना मिट्टी की सतह के पास कमजोर होकर गिर सकता है. नर्सरी में ज्यादा नमी, खराब जल निकासी और बहुत घनी बुवाई जैसी स्थितियां इस तरह की परेशानी को बढ़ा सकती हैं.

इसीलिए नर्सरी तैयार करते समय साफ और अच्छी जल निकासी वाली जगह चुनना जरूरी है. बीज को बहुत पास-पास डालने के बजाय लाइन में सही दूरी रखते हुए बोना बेहतर रहता है. इससे पौधों के बीच हवा का मूवमेंट बना रहता है और उनकी देखभाल भी आसानी से की जा सकती है. किसी हिस्से में पौधे खराब या रोगग्रस्त दिखाई दें तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. रोग या कीट के लक्षण दिखने पर अपने इलाके के कृषि विशेषज्ञ या कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेकर ही सही ट्रीटमेंट चुनें.

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मजबूत पौध ही खेत के लिए बहुत जरूरी

नर्सरी में पौध तैयार होने के बाद खेत में रोपाई के लिए हर पौधा उठा लेना सही तरीका नहीं है. किसान को स्वस्थ, सीधी और अच्छी तरह विकसित पौध चुननी चाहिए. कमजोर या असामान्य पौध को अलग रखना चाहिए. पौध उखाड़ते समय जड़ों को कम से कम नुकसान पहुंचे इसका भी ध्यान रखें. रोपाई के लिए पौध की सही उम्र किस्म और मौसम के हिसाब से अलग हो सकती है.

रोपाई से पहले मुख्य खेत भी अच्छी तरह तैयार होना चाहिए. खेत में पानी निकलने की व्यवस्था सही रखें और पौधों के बीच किस्म के मुताबिक पर्याप्त दूरी छोड़ें. इससे आगे चलकर पौधों को फैलने की जगह मिलती है और फसल की देखभाल आसान रहती है.  फूलगोभी की खेती में नर्सरी के शुरुआती 15 दिनों को हल्के में लेना महंगा पड़ सकता है. इस दौरान मजबूत पौध तैयार हो गई तो आगे की खेती संभालना काफी आसान हो जाता है.

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