भारत ने 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी की. इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत दुनिया के कई बड़े नेता शामिल हुए. दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, तकनीक, जलवायु परिवर्तन समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई. इनमें खेती और किसानों से जुड़े मुद्दे भी अहम रहे. सदस्य देशों ने नई दिल्ली घोषणा पत्र में कृषि क्षेत्र में मिलकर काम करने की दिशा तय की. किसानों से जुड़ी चार पहलों को भी आगे बढ़ाने पर सहमति बनी.

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भारत जैसे देश के लिए यह चर्चा खास मायने रखती है. जहां करोड़ों परिवार खेती से अपना घर चलाते हैं. बदलता मौसम, बढ़ता खर्च और फसल बेचने की परेशानी किसानों की कमाई पर असर डालती है. ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच बीज, तकनीक और खेती के बेहतर तरीकों को लेकर सहयोग उपयोगी हो सकता है. इस सम्मेलन के बाद किसानों को क्या फायदे हो सकते हैं चलिए आपको बताते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

किसानों के लिए चार पहलों पर होगा काम

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में कृषि और किसानों के विकास के लिए चार प्रमुख और नई पहलों को हरी झंडी दिखाई गई है. ब्रिक्स देश अब आपस में मिलकर खेती-किसानी के अपने अनुभव, नई तकनीक और आधुनिक ज्ञान एक-दूसरे के साथ शेयर करेंगे. आज के समय में किसानों के सामने जो तमाम परेशानियां आ रही हैं. उनका मिलकर मुकाबला करने और ग्लोबल लेवल पर फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए प्लान तैयार किया गया है. 

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इस समझौते के जरिए कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए कई व्यावहारिक कदम उठाने की सहमति बनी है. जिससे आने वाले समय में किसानों के लिए तरक्की के नए रास्ते खुल सकें और वे आधुनिक तरीकों को अपनाकर अपनी आय को भी बढ़ा सकें, साथ ही मार्केट में नए और बेहतर अवसर पा सकें.

ब्रिक्स एग्रीन से होगा किसानों को फायदा

इस घोषणा-पत्र में ब्रिक्स एग्रीन नाम से एक किसान-केंद्रित साझा मंच बनाने का बड़ा ऐलान किया गया है. जो बीजों, खाद और खेती से जुड़ी जरूरी जानकारियों का एक बहुत बड़ा नेटवर्क बनेगा. इसके अलावा खेती को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क बनाने पर भी जोर दिया गया है, जिसके दायरे में सिर्फ पारंपरिक फसलें ही नहीं बल्कि मछली पालन, आधुनिक एक्वाकल्चर और पेड़-पौधों की कमर्शियल खेती को भी शामिल किया गया है. 

मौसम की परेशानी में तकनीक कैसे आएगी काम?

कभी बुवाई के समय बारिश नहीं होती. कभी तैयार फसल पर पानी बरस जाता है. मौसम की ऐसी मार किसान का पूरा हिसाब बिगाड़ सकती है. घोषणा पत्र में जलवायु परिवर्तन से निपटने पर जोर दिया गया है. खेती के लिए इसका मतलब पानी के बेहतर इस्तेमाल और बदलते मौसम में फसल संभालने वाले तरीकों पर सहयोग बढ़ने की संभावना है.

डिजिटल तकनीक इसमें मददगार हो सकती है. मसलन मौसम की जानकारी समय पर मिले तो किसान सिंचाई और कटाई की बेहतर तैयारी कर सकता है. फसल की निगरानी से बीमारी के शुरुआती संकेत समझने में मदद मिल सकती है. सैटेलाइट की जानकारी खेतों की स्थिति समझने में काम आ सकती है. देशों के बीच तकनीक साझा होने पर ऐसी सुविधाएं बेहतर बनाने के मौके बढ़ सकते हैं.

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किसानों को किस तरह मिल सकता है फायदा?

इन पहलों से किसानों को बेहतर तकनीक, खेती की जानकारी और रिसर्च का फायदा मिलने की उम्मीद है. हालांकि घोषणा पत्र के जरिए किसानों के खाते में सीधे पैसे भेजने की कोई नई योजना शुरू नहीं हुई है. यह देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की पहल है. 

खेती के व्यापार को भी जगह मिली है. सदस्य देशों ने कृषि व्यापार की व्यवस्था ज्यादा निष्पक्ष बनाने और विश्व व्यापार संगठन में खेती से जुड़ी बातचीत आगे बढ़ाने पर जोर दिया है. बेहतर बाजार तक पहुंच किसानों के लिए फायेमंद हो सकती है. 

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