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केले खाकर छिलके गमले में दबा देते हो? ऐसे नहीं बनता फर्टीलाइजर, नोट कर लें तरीका

Banana Fertilizer Tips: केले के छिलकों को सीधे मिट्टी में दबाना पौधों को फायदे के बजाय नुकसान पहुंचा सकता है. बेहतर ग्रोथ के लिए इन्हें लिक्विड, सुखाकर पाउडर या कंपोस्ट बनाकर यूज करें.

Banana Fertilizer Tips:  अक्सर लोग केले खाकर उसके छिलके सीधे गमले की मिट्टी में दबा देते हैं. यह सोचकर कि यह पौधों के लिए खाद का काम करेगा. लेकिन सच तो यह है कि यह तरीका पूरी तरह गलत है और इससे पौधों में फंगस या चींटियां लगने का खतरा बढ़ जाता है. गार्डनिंग एक्सपर्ट्स के मुताबिक केले के छिलकों में पोटेशियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम जैसे जरूरी न्यूट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं. 

लेकिन पौधे इन्हें सीधे एब्जॉर्ब नहीं कर पाते. अगर आप वाकई अपने गार्डन को हरा-भरा बनाना चाहते हैं. तो आपको इन छिलकों को सही तरीके से प्रोसेस करना होगा. मॉडर्न गार्डनिंग में केले के छिलकों से फर्टिलाइजर बनाने के कुछ बहुत ही सिंपल और इफेक्टिव तरीके हैं. जो आपके घर के पौधों की ग्रोथ को कई गुना बढ़ा सकते हैं. जान लीजिए तरीका.

बनाना पील से ऐसे बनाएं फर्टिलाइजर

पौधों को तुरंत पोषण देने के लिए लिक्विड फर्टिलाइजर सबसे बेस्ट ऑप्शन माना जाता है. इसे बनाने के लिए केले के छिलकों को छोटे टुकड़ों में काटकर एक जार या बाल्टी में पानी भरकर 2 से 3 दिनों के लिए छोड़ दें. इस दौरान पानी का रंग बदल जाएगा और छिलकों के सारे न्यूट्रिएंट्स पानी में घुल जाएंगे. 

3 दिन बाद छिलकों को छानकर अलग कर लें और तैयार लिक्विड में बराबर मात्रा में सादा पानी मिलाकर पौधों की जड़ों में डालें. यह एक ऑर्गेनिक बूस्टर की तरह काम करता है. जो खासकर फूलों वाले पौधों जैसे गुलाब या गुड़हल के लिए वरदान साबित होता है. यह तरीका न केवल आसान है बल्कि मिट्टी के पीएच लेवल को भी बैलेंस रखता है.

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लंबे समय तक चलने वाला पोषण

अगर आप बार-बार खाद बनाने के झंझट से बचना चाहते हैं. तो बनाना पील पाउडर एक बेहतरीन सॉल्यूशन है. इसके लिए केले के छिलकों को धूप में तब तक सुखाएं जब तक वे पूरी तरह काले और कुरकुरे न हो जाएं. जब छिलके पूरी तरह सूख जाएं. तो उन्हें मिक्सर में पीसकर एक महीन पाउडर तैयार कर लें. 

इस पाउडर को आप एयरटाइट कंटेनर में स्टोर करके महीनों तक इस्तेमाल कर सकते हैं. महीने में एक बार अपने गमलों की मिट्टी की गुड़ाई करके एक-दो चम्मच यह पाउडर डाल दें. यह धीरे-धीरे मिट्टी में डीकंपोज होता है और पौधों को लंबे समय तक पोटेशियम की सप्लाई देता रहता है. जिससे पौधों का तना मजबूत होता है.

इस तरह करें इस्तेमाल

केले के छिलकों को इस्तेमाल करने का एक और स्मार्ट तरीका है उन्हें सीधे कंपोस्ट बिन में डालना. लेकिन छोटे टुकड़ों में काटकर. अगर आप इसे चाय की तरह इस्तेमाल करना चाहते हैं. तो छिलकों को पानी में उबालकर ठंडा कर लें और फिर उस पानी का छिड़काव पौधों पर करें. एक्सपर्ट्स के अनुसार छिलकों को सीधे मिट्टी में दबाने के बजाय उनका टी या स्लरी बनाना ज्यादा फायदेमंद है. 

क्योंकि इससे डीकंपोजिशन का प्रोसेस तेज हो जाता है. ध्यान रहे कि किसी भी फर्टिलाइजर का ओवरडोज न करें. हफ्ते में एक या दो बार ही इनका इस्तेमाल पर्याप्त है. यह मॉडर्न तकनीक आपके कचरे को कीमती खाद में बदल देती है और आपके गार्डन को केमिकल-फ्री रखती है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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