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अश्वगंधा से लेकर स्टीविया तक किसमें है ज्यादा कमाई, कौन से पौधे की खेती करें किसान?

Ashwagandha Stevia Farming: कम लागत और कम पानी में सुरक्षित मुनाफे के लिए अश्वगंधा बेस्ट है. जबकि ज्यादा निवेश और पक्के बाजार के साथ लंबे समय तक मोटी कमाई के लिए स्टीविया अच्छा ऑप्शन साबित होता है.

Ashwagandha Stevia Farming:पारंपरिक फसलों के साथ अब किसान ऐसी खेती की तलाश में हैं. जहां कम जमीन में बेहतर मुनाफा मिल सके. यही वजह है कि औषधीय और प्राकृतिक मिठास देने वाले पौधों की खेती खूब की जा रही है. अश्वगंधा और स्टीविया दोनों ही ऐसी फसलें हैं. जिनकी बाजार में अलग पहचान बन चुकी है. एक तरफ अश्वगंधा की मांग आयुर्वेद, हर्बल दवाओं और वेलनेस इंडस्ट्री में लगातार बढ़ रही है.

तो दूसरी तरफ स्टीविया का इस्तेमाल शुगर फ्री उत्पादों, हेल्थ ड्रिंक्स और फूड इंडस्ट्री में तेजी से हो रहा है. लेकिन सवाल यह है कि अगर किसान कमाई को ध्यान में रखकर खेती शुरू करना चाहते हैं. तो आखिर दोनों में कौन सी फसल ज्यादा फायदे का सौदा साबित हो सकती है? चलिए आपको बताते हैं इसकी पूरी जानकारी.

अश्वगंधा की खेती में लागत कम

अगर किसान पहली बार औषधीय पौधों की खेती में कदम रखना चाहते हैं. तो अश्वगंधा एक बढ़िया ऑप्शन है. इस फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती और यह कम उपजाऊ या सूखी जमीन में भी आसानी से लहलहा उठती है. 

आमतौर पर इसकी फसल 5 से 6 महीने में पूरी तरह तैयार हो जाती है. इसकी जड़, बीज और पत्तियों, तीनों की मार्केट में वैल्यू है और इनका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं में होता है. इसमें शुरुआती लागत बहुत कम आती है और इसे आवारा पशु भी नहीं खाते. जिससे फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है.

यह भी पढ़ें: किसानों के लिए खुशखबरी, इन 4 मसालों की खेती पर सरकार दे रही है आर्थिक मदद, आज ही उठाएं फायदा

स्टीविया में निवेश ज्यादा

स्टीविया को नैचुरल शुगर यानी कुदरती चीनी माना जाता है और फिटनेस इंडस्ट्री में इसकी मांग काफी बढ़ रही है. इस फसल की खेती में शुरुआती निवेश अश्वगंधा की तुलना में थोड़ा ज्यादा होता है. क्योंकि इसके लिए अच्छी क्वालिटी के पौधों, ड्रिप इरिगेशन और नियमित देखभाल की जरूरत पड़ती है. 

हालांकि यह एक वन-टाइम इनवेस्टमेंट जैसा है. एक बार पौधा लगाने के बाद आप कई सालों तक इसकी पत्तियों की कटाई करके मुनाफा कमा सकते हैं. हर साल 3 से 4 बार पत्तियां बेचने को मिलती हैं. जिससे किसानों को सालभर रेगुलर और मोटी इनकम होती रहती है.

किसानों के लिए किसमें ज्यादा फायदा?

अब बात आती है सबसे बड़े सवाल की कि दोनों में से ज्यादा फायदा किसमें? तो आपके बता दें यह कई पहलुओं पर निर्भर करता है. अगर आपके पास सिंचाई के साधन कम हैं, बजट भी लिमिटेड है और आप कम रिस्क में सुरक्षित मुनाफा चाहते हैं. तो अश्वगंधा आपके लिए बेस्ट है. 

वहीं दूसरी तरफ अगर आपकी जमीन उपजाऊ है. पानी की अच्छी व्यवस्था है और आप थोड़ा ज्यादा इनवेस्ट करके 4-5 साल तक लगातार कमाई करना चाहते हैं. तो स्टीविया सबसे ज्यादा फायदे का सौदा है. 

यह भी पढ़ें: फसल खराब हुई तो दुकानदार पर गिरेगी गाज, नकली बीज-खाद बेचने वालों के खिलाफ किसान ऐसे दर्ज कराएं अपनी शिकायत

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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