Agrivoltaic Model Farming: सोचिए, आपके खेत में गेहूं, सरसों या सब्जियों की फसल भी लहलहा रही हो और उसी जमीन पर लगे सोलर पैनल से बिजली भी बन रही हो. यानी किसान को एक ही खेत से खेती और सौर ऊर्जा, दोनों का फायदा मिल सके. इसी सोच पर आधारित है एग्रीवोल्टाइक मॉडल. इसमें खेत की जमीन पर फसल उगाई जाती है और उसके ऊपर सोलर पैनल लगाकर बिजली पैदा की जाती है.
सरकार भी इस मॉडल को बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है, ताकि किसानों की कमाई बढ़ाने के साथ खेती की जमीन का बेहतर इस्तेमाल किया जा सके. ऐसे में आइए जानते हैं कि, एग्रीवोल्टाइक मॉडल क्या है और इससे किसानों को क्या फायदा मिल सकता है.
क्या है एग्रीवोल्टाइक मॉडल?
एग्रीवोल्टाइक मॉडल खेती और सौर ऊर्जा को एक साथ जोड़ने का तरीका है. इसमें खेत के ऊपर सोलर पैनल इस तरह लगाए जाते हैं कि, उनके नीचे फसल उगाने के लिए पर्याप्त जगह रहे. पैनलों की ऊंचाई और खंभों के बीच की दूरी फसल और खेती में इस्तेमाल होने वाली मशीनों को ध्यान में रखकर तय की जाती है. इसका मकसद यह है कि, किसान को खेती छोड़कर सिर्फ सोलर प्लांट पर निर्भर न रहना पड़े. वह अपनी जमीन पर फसल भी उगा सके और सौर ऊर्जा से होने वाली कमाई का रास्ता भी खुला रहे.
किसानों को कैसे होगा फायदा?
एग्रीवोल्टाइक मॉडल से किसानों को एक ही जमीन से दो तरह के फायदे मिलने की संभावना है. पहला, फसल बेचकर कमाई और दूसरा, सौर ऊर्जा से आमदनी का मौका. अगर बिजली खरीदने और भुगतान की व्यवस्था सही रहती है, तो किसानों को कमाई का एक अतिरिक्त जरिया मिल सकता है.
इस मॉडल से छोटे और सीमांत किसानों को भी फायदा पहुंचाने की कोशिश है. देश में ज्यादातर किसान कम जमीन पर खेती करते हैं, इसलिए उनके लिए पूरी जमीन पर सोलर पैनल लगाकर खेती छोड़ना आसान नहीं है. एग्रीवोल्टाइक मॉडल में खेती जारी रखने की व्यवस्था होने से जमीन का इस्तेमाल दोनों कामों के लिए किया जा सकता है.
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सोलर पैनल लगाने में किन बातों का ध्यान रखना होगा?
खेत में पैनल लगाना ही काफी नहीं है. उनके नीचे ट्रैक्टर और दूसरे कृषि उपकरणों के आने-जाने की जगह होनी चाहिए. जुताई, बुवाई और फसल की कटाई में परेशानी नहीं आनी चाहिए. साथ ही, पैनलों से गिरने वाले बारिश के पानी को सही तरीके से निकालने या जमा करने की व्यवस्था भी जरूरी है, ताकि मिट्टी न बहे और खेत में पानी जमा न हो.
किसानों को यह भी समझना होगा कि पैनलों की छाया से फसल को मिलने वाली धूप कम हो सकती है. इसलिए फसल का चुनाव और पैनलों की दूरी सही रखना जरूरी है. इसके अलावा, बिजली कौन खरीदेगा, भुगतान कब मिलेगा और प्लांट लगाने वाली कंपनी बीच में काम छोड़ दे तो क्या होगा, इन बातों की शर्तें पहले से तय होनी चाहिए.
पीएम कुसुम योजना से जुड़ेगा एग्रीवोल्टाइक मॉडल
सरकार एग्रीवोल्टाइक मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए पीएम कुसुम योजना के अगले चरण में बड़े कार्यक्रम की तैयारी कर रही है. इस दिशा में किसानों को तकनीकी मदद देने, किसान उत्पादक संगठनों को जोड़ने और गांवों के युवाओं व महिलाओं को पैनल लगाने, चलाने और उनकी मरम्मत का प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जा रहा है.
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